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: परमाणु समझौते के लिए कतर ने झोंकी ताकत, होर्मुज संकट से अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट

- परमाणु समझौते के लिए कतर ने झोंकी ताकत, होर्मुज संकट से अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट
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कतर इस समय अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को सफल बनाने के लिए अपनी पूरी कूटनीतिक ताकत झोंक रहा है। यह सक्रियता केवल क्षेत्रीय शांति के लिए नहीं है बल्कि कतर की अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने की एक बड़ी कोशिश है। ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से कतर की अर्थव्यवस्था एक गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। दुनिया के सबसे अमीर देशों में शुमार होने के बावजूद कतर को अब उन आंकड़ों का डर सता रहा है जो उसकी वित्तीय स्थिरता को हिला सकते हैं।

होर्मुज स्ट्रेट पर कतर की निर्भरता

कतर की आर्थिक चिंता का सबसे बड़ा कारण उसकी भौगोलिक स्थिति है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे पड़ोसी देशों के पास ऐसी पाइपलाइनें मौजूद हैं जो होर्मुज स्ट्रेट को बायपास कर सकती हैं लेकिन कतर पूरी तरह से इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर है। फरवरी से होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण कतर का लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी एलएनजी का निर्यात लगभग पूरी तरह ठप हो गया है। पिछले 30 सालों में कतर ने इसी गैस कारोबार के दम पर अपनी रेगिस्तानी जमीन को आधुनिक शहरों में बदल दिया था। राजधानी दोहा की गगनचुंबी इमारतें शानदार सड़कें और मेट्रो सिस्टम इसी कमाई का नतीजा हैं।

रास लाफान प्लांट और उत्पादन को लगा झटका

कतर के लिए स्थिति तब और भी चुनौतीपूर्ण हो गई जब ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों में रास लाफान प्लांट के महत्वपूर्ण उपकरणों को नुकसान पहुंचा। यह प्लांट कतर का सबसे बड़ा गैस उत्पादन केंद्र है और इस हमले की वजह से देश की गैस उत्पादन क्षमता में 17 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आज होर्मुज स्ट्रेट को खोल भी दिया जाए तो भी उत्पादन को पुराने स्तर पर लाने में कई साल का समय लग सकता है। दोहा के पास स्थित हमाद पोर्ट पर भी कामकाज की गति बहुत धीमी हो गई है जिससे व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।

अर्थव्यवस्था में गिरावट के डरावने आंकड़े

इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड यानी आईएमएफ का अनुमान है कि इस साल कतर की अर्थव्यवस्था में 8 दशमलव 6 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। युद्ध के कारण केवल गैस निर्यात ही नहीं बल्कि पर्यटन और विदेशी निवेश पर भी बुरा असर पड़ा है। अमेरिका सहित कई देशों द्वारा यात्रा चेतावनी जारी किए जाने के बाद पर्यटकों और विदेशी कंपनियों ने कतर से दूरी बना ली है। आंकड़ों के अनुसार मार्च के महीने में युद्ध की वजह से खाड़ी देशों को हर दिन 600 मिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ रहा था।

कतर का विशाल निवेश और वैश्विक संपत्तियां

कतर ने अपनी गैस की कमाई से 600 अरब डॉलर का एक विशाल निवेश फंड बनाया है। इस फंड के जरिए कतर ने दुनिया की कई प्रतिष्ठित संपत्तियों में हिस्सेदारी खरीदी है। इसमें लंदन का हीथ्रो एयरपोर्ट और न्यूयॉर्क की एम्पायर स्टेट बिल्डिंग जैसे नाम शामिल हैं। कतर ने फीफा वर्ल्ड कप के आयोजन पर भी अरबों डॉलर खर्च किए थे ताकि वह खुद को एक वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित कर सके। लेकिन वर्तमान युद्ध की स्थिति ने इन सभी निवेशों और भविष्य की योजनाओं पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं।

खाद्य सुरक्षा और आयात की बढ़ती लागत

कतर अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत खाना विदेशों से आयात करता है। पहले यूरोप से आने वाली सब्जियां और अमेरिका से आने वाला अनाज समुद्री रास्ते से आसानी से पहुंच जाता था लेकिन अब इसके लिए महंगे हवाई मार्ग या सऊदी अरब के रास्ते ट्रकों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे आयात की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि कतर सरकार अपने मजबूत विदेशी रिजर्व और सरकारी फंड के दम पर फिलहाल सब्सिडी देकर कीमतों को नियंत्रित कर रही है और कर्मचारियों को वेतन दे रही है लेकिन अगर होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहा तो कतर की आर्थिक स्थिति और भी ज्यादा बिगड़ सकती है।

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