आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा और छह अन्य सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) संसदीय दल में विलय करने का बड़ा ऐलान किया है। इन सातों सांसदों ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति को लिखित रूप में बीजेपी संसदीय दल में मर्ज होने की अपनी इच्छा व्यक्त की है। सूत्रों के अनुसार, आम आदमी पार्टी के इन सांसदों की जॉइनिंग का मुख्य उद्देश्य आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में बीजेपी की स्थिति को मजबूत करना है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में भ्रष्टाचार के आरोप और विलय का ऐलान
राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने दिल्ली के संविधान क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया, जहां बीजेपी नेताओं की मौजूदगी ने स्पष्ट कर दिया कि यह रणनीति पहले से तैयार थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने आम आदमी पार्टी पर भ्रष्टाचार और सिद्धांतों से समझौता करने का गंभीर आरोप लगाया। राघव चड्ढा ने जानकारी दी कि आम आदमी पार्टी के कुल 10 राज्यसभा सांसद हैं, जिनमें से 7 सांसदों ने उपराष्ट्रपति को लिखित में सूचित किया है कि वे भाजपा में विलय करना चाहते हैं।
संवैधानिक प्रक्रिया और तकनीकी औपचारिकताएं
राघव चड्ढा ने बताया कि उन्होंने दो-तिहाई संख्या बल के नियम का पालन करते हुए आम आदमी पार्टी संसदीय दल को भाजपा के साथ मर्ज करने की गुजारिश उपराष्ट्रपति से की है और संसदीय नियमों के अनुसार, राज्यसभा के सभापति इस अपील पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से चर्चा करेंगे। उनकी सहमति मिलने के बाद राज्यसभा सचिवालय इस संबंध में एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करेगा। इस नोटिफिकेशन को राजपत्र (Gazette) में शामिल किए जाने के बाद ही ये सातों सांसद आधिकारिक तौर पर बीजेपी के सदस्य माने जाएंगे। वर्तमान में तीन सांसदों ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात कर ली है, जबकि शेष चार सांसद अगले चार-पांच दिनों में पार्टी नेतृत्व से मिलेंगे। इन चार सांसदों में से एक वर्तमान में अमेरिका में हैं, दूसरे आईपीएल मैच की कमेंट्री कर रहे हैं, तीसरे एक कमेटी की बैठक में व्यस्त हैं और चौथे आज देर शाम दिल्ली पहुंचेंगे।
राज्यसभा में एनडीए का बढ़ता संख्या बल
इस विलय का सीधा असर राज्यसभा के समीकरणों पर पड़ेगा। इन 7 सांसदों के शामिल होने से राज्यसभा में एनडीए के सांसदों की संख्या 141 से बढ़कर 148 हो जाएगी। इस बढ़ोतरी के बाद एनडीए अब राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से केवल 18 सांसद दूर रह गया है। पार्टी सूत्रों का मानना है कि यह जॉइनिंग न केवल राज्यसभा में सरकार को मजबूती देगी, बल्कि पंजाब की राजनीति में भी निर्णायक साबित होगी।
मिशन पंजाब और चुनावी रणनीति
पंजाब विधानसभा चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने वाले हैं और बीजेपी इस बार अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। राघव चड्ढा और संदीप पाठक, जो 2022 के पंजाब चुनाव में AAP की जीत के मुख्य रणनीतिकार थे, पिछले कुछ महीनों से बीजेपी के संपर्क में थे। बीजेपी अब पंजाब के विभिन्न वोटर समूहों, विशेषकर पंथिक और अनुसूचित जाति (SC) वर्ग पर ध्यान केंद्रित कर रही है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के कमजोर होने के बाद बीजेपी उस पंथिक वोट बैंक को साधने की कोशिश में है जो कांग्रेस या AAP के साथ नहीं जाना चाहता। इसी कड़ी में वकील एचएस फूलका का बीजेपी में शामिल होना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दलित और धार्मिक समुदायों तक पहुंच
बीजेपी अनुसूचित जाति समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए सक्रिय है। फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां का दौरा किया था। हाल ही में केंद्र सरकार ने डेरा प्रमुख संत निरंजन दास को पद्मश्री से सम्मानित किया है। रविदासिया समुदाय का यह प्रमुख धार्मिक केंद्र राजनीतिक रूप से अत्यंत प्रभावशाली है। आगामी चुनावों से पहले कई अन्य प्रमुख नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के भी बीजेपी में शामिल होने की संभावना है।