कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर इंडियन एक्सप्रेस में हुए खुलासे पर अत्यंत तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक पोस्ट में राहुल गांधी ने मतदान चोरी को भारतीय जनता के खिलाफ एक बड़ा अपराध और भारतीय संविधान पर सीधा हमला करार दिया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और चुनाव आयोग ने मिलकर इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया है और राहुल गांधी ने इन तीनों संस्थाओं के इस कथित तालमेल को देशद्रोह की श्रेणी में रखा है।
संविधान पर हमला और देशद्रोह का आरोप
राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट रूप से लिखा कि मतदान चोरी भारतीय जनता के खिलाफ एक अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग, जिन्होंने इसे आयोजित किया है, उन्होंने देशद्रोह का कार्य किया है और राहुल गांधी ने विश्वास जताया कि इस मामले में न्याय जरूर होगा। इस पोस्ट के साथ उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया है, जिसमें वे चुनाव आयोग के अधिकारियों को सीधे तौर पर चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। वीडियो में राहुल गांधी ने कहा कि वे चुनाव आयोग और उनके अफसरों को साफ कह रहे हैं कि जो वे कर रहे हैं वह पूरी तरह गलत है और यह राजद्रोह की श्रेणी में आता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि वक्त आने पर उन्हें पकड़ा जाएगा और वे बच नहीं पाएंगे।
चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक कलह का दावा
कांग्रेस पार्टी ने भी राहुल गांधी के इस रुख का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया पर उनका वीडियो साझा किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा और निर्वाचन आयोग मिलकर देश के लोकतंत्र को नष्ट करने और जनता की आवाज को दबाने की साजिश रच रहे हैं। कांग्रेस के अनुसार, वोट चोरी करना सबसे बड़ा देशद्रोही कार्य है और पार्टी ने विशेष रूप से चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि वे आयोग में अपनी मनमर्जी चला रहे हैं। कांग्रेस का दावा है कि खुद दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीने में 14 बार इस संबंध में शिकायत की है। इन शिकायतों में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी नहीं दी जाती है और न ही उनसे किसी प्रकार की सलाह ली जाती है।
शिकायतों के मुख्य बिंदु और तानाशाही के आरोप
कांग्रेस द्वारा बताए गए विवरण के अनुसार, ये 14 शिकायतें मुख्य रूप से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के कई संवेदनशील पहलुओं से जुड़ी थीं। इनमें एसआईआर (SIR), फॉर्म 6 में किए गए बदलाव, नए मतदाताओं का पंजीकरण, और मतदाता सूची से नाम हटाने या जोड़ने की प्रक्रिया शामिल थी। इसके अलावा, नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ की गई अपीलों, मतदाता सूची की सुरक्षा और आयोग के सामान्य कामकाज को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए थे। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि तीन सदस्यों वाले चुनाव आयोग में केवल ज्ञानेश कुमार की ही चल रही है और वे प्रधानमंत्री मोदी के इशारे पर तानाशाही कर रहे हैं। पार्टी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार मोदी के हाथ की कठपुतली की तरह काम कर रहे हैं और मोदी को खुश करने के लिए वोट चोरी जैसे कार्यों में संलिप्त हैं।
पुरानी तकरार और भविष्य की जवाबदेही
यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। वे लंबे समय से चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची में होने वाले बदलावों को लेकर हमलावर रहे हैं। उन्होंने हमेशा चुनावी व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता की मांग की है। हालांकि, चुनाव आयोग ने पूर्व में राहुल गांधी द्वारा लगाए गए वोट चोरी के आरोपों को पूरी तरह से गलत और निराधार बताते हुए खारिज कर दिया था। सितंबर 2026 में भी राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा था, जब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर आयोग ने कार्रवाई की थी। उस समय भी उन्होंने भाजपा और चुनाव आयोग पर विपक्षी दलों को कमजोर करने का आरोप लगाया था और इसे वोट चोरी, सरकार चोरी और पार्टी चोरी की राजनीति से जोड़ा था। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि लोकतंत्र को पहुंचाए गए इस नुकसान का हिसाब वक्त आने पर जरूर होगा और इस अपराध की सजा दी जाएगी।