उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर ने देश की राजनीति में उबाल ला दिया है और इस मामले को लेकर कांग्रेस पार्टी बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए है और उत्तराखंड से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र की आवाज दबाने की साजिश करार दिया है, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए राहुल गांधी पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया है।
देहरादून में पुलिस मुख्यालय तक कांग्रेस का विशाल मार्च
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज शिकायत को वापस लेने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। 200 से अधिक कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकाला और उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) दीपम सेठ को एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मामला वापस नहीं लिया गया, तो वे पूरे राज्य में उग्र धरना प्रदर्शन शुरू करेंगे। इसी कड़ी में पार्टी आज देहरादून में सचिवालय तक मार्च करने की तैयारी में है, जिससे राज्य में सियासी हलचल और तेज होने की संभावना है।
हल्द्वानी से शुरू हुआ विवाद और एफआईआर की वजह
इस पूरे विवाद की शुरुआत हल्द्वानी के रामलीला मैदान से हुई। 8 अगस्त को यहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की एक बड़ी जनसभा हुई थी। इस रैली के 3 दिन बाद, यानी 11 अगस्त को कुछ लोगों ने कथित तौर पर उस स्थान का शुद्धिकरण यज्ञ आयोजित किया। राहुल गांधी ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे छुआछूत का एक रूप बताया और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि, मामला तब पलट गया जब रविवार रात उत्तराखंड पुलिस ने वाल्मीकि समुदाय के सदस्य और श्री राम सेना धर्मस्व सेवा न्यास के सदस्य अमित कुमार की शिकायत पर राहुल गांधी के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर ली। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी ने बिना किसी संपर्क के उन लोगों पर अनुसूचित जाति विरोधी होने और छुआछूत मानने के झूठे आरोप लगाए हैं।
केरल, झारखंड और तेलंगाना में भी विरोध की गूंज
राहुल गांधी पर हुई इस कानूनी कार्रवाई का असर देश के अन्य राज्यों में भी देखने को मिल रहा है। केरल, झारखंड और तेलंगाना जैसे राज्यों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बीजेपी के खिलाफ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। तेलंगाना में युवक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बीजेपी के प्रदेश कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और कार्यालय के पिछले गेट पर काला रंग फेंककर अपना विरोध दर्ज कराया। झारखंड में भी कांग्रेस की प्रदेश इकाई ने रांची में विरोध मार्च निकाला। प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में कांग्रेस भवन से अल्बर्ट एक्का चौक तक निकाले गए इस मार्च में केंद्र सरकार का पुतला फूंका गया। डी. सतीशन ने भी इस मामले पर चिंता जताते हुए उत्तराखंड सरकार की आलोचना की और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसे बेहद चिंताजनक बताया।
दिल्ली में 14 जिलों में कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन आज
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने भी इस मुद्दे पर बीजेपी को आड़े हाथों लिया है और उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने जब दलितों के साथ हो रहे अन्याय और भेदभाव का मुद्दा उठाया, तो उसके 24 घंटे के भीतर ही उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई। यादव ने तर्क दिया कि संविधान के तहत छुआछूत एक दंडनीय अपराध है, इसलिए कार्रवाई उन लोगों पर होनी चाहिए थी जिन्होंने शुद्धिकरण का अपमानजनक कार्य किया। उन्होंने घोषणा की है कि आज मंगलवार को दिल्ली के सभी 14 संगठनात्मक जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ता बीजेपी के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस प्रदर्शन में हजारों कार्यकर्ताओं के शामिल होने का दावा किया गया है।
बीजेपी का जवाबी हमला और पुतला दहन
दूसरी तरफ, बीजेपी भी इस मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। बीजेपी ने राहुल गांधी के बयान को एक सामान्य सफाई प्रक्रिया को जातिगत रंग देने की कोशिश बताया है और उत्तराखंड के सभी जिला मुख्यालयों और राजधानी देहरादून में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का पुतला दहन कर अपना विरोध जताया। बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए घटिया राजनीति कर रही है और राहुल गांधी को देश का सबसे बड़ा दलित विरोधी नेता करार दिया। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रही है, जबकि हल्द्वानी में हुई घटना केवल एक सामान्य प्रक्रिया थी जिसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।