कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आवास पर गुरुवार को इंडिया गठबंधन की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक के संपन्न होने के तुरंत बाद, सभी विपक्षी नेता एक बस में सवार होकर गांधी स्मृति भवन पहुंचे। यह स्थान राहुल गांधी के घर से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वहां पहुंचकर राहुल गांधी ने महात्मा गांधी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि देने के पश्चात राहुल गांधी वहां से रवाना हुए, जिसके बाद प्रियंका गांधी, सुप्रिया सुले और मीसा भारती सहित कई अन्य विपक्षी नेता भी वहां से निकल गए।
छात्रों के अधिकारों के लिए प्रियंका गांधी का कड़ा संदेश
इस अवसर पर प्रियंका गांधी ने सरकार को एक कड़ा संदेश देते हुए कहा कि वे यहां यह बताने आए हैं कि इसी देश में महात्मा गांधी ने किसानों और गरीबों के साथ मिलकर आंदोलन किया था, जिसमें कभी किसी पर हाथ नहीं उठाया गया था। उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज उसी देश में बच्चों को सिर्फ इसलिए पीटा जा रहा है क्योंकि वे अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। प्रियंका गांधी ने जोर देकर कहा कि सभी को स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि छात्रों के साथ कितना गलत व्यवहार किया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र के लिए महात्मा गांधी शहीद हुए और तमाम लोग आजादी के लिए लड़ते हुए शहीद हुए। आज उसी देश में उस लोकतंत्र को खत्म किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वे लोग इसलिए शहीद हुए थे कि उनके बच्चों को पीटा जाए, सिर्फ इसलिए क्योंकि उनके पेपर लीक हो रहे हैं और जिस पर वे जवाबदेही मांग रहे हैं।
राहुल गांधी का सोशल मीडिया संदेश और इंडिया गेट की योजना
विपक्षी नेताओं का गांधी स्मृति भवन जाना और गठबंधन की यह बैठक मुख्य रूप से नीट पेपर लीक के मुद्दे पर दिल्ली में चल रहे छात्रों के प्रदर्शन से संबंधित थी। बैठक से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए जानकारी दी थी कि इंडिया गठबंधन के सांसद और नेता शांतिपूर्ण तरीके से तीस जनवरी मार्ग पर गांधी स्मृति जा रहे हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, "हम उन छात्रों को याद करने जा रहे हैं जिन्हें हमने खो दिया, वो बच्चे जिन्हें नीट पेपर लीक के बाद अपनी जान देने के लिए मजबूर होना पड़ा और हम उन छात्रों के साथ खड़े होने जा रहे हैं जो आज घायल हैं, जिन्हें न्याय और जवाबदेही की शांतिपूर्ण मांग करने पर पीटा गया। भारत के छात्र अकेले नहीं हैं।
राहुल गांधी ने बाद में मीडिया को बताया कि चूंकि छात्र सड़कों पर हैं, इसलिए विपक्ष के सभी सांसदों को लगा कि उन्हें भी सड़कों पर उतरना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सभी सांसद इंडिया गेट जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें वहां जाने से रोक दिया गया और इसके बाद उन्होंने तीस जनवरी मार्ग जाने का निर्णय लिया। राहुल गांधी ने कहा कि पुलिस ने उनकी बस को वहीं खड़ा कर दिया और उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया गया, लेकिन उनका मुख्य संदेश छात्रों के लिए है कि विपक्ष उनके साथ खड़ा है।
विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं और बैठक का विवरण
कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने कहा कि यह देश गांधी का है और उनके सिद्धांतों पर चलते हुए छात्र शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे हैं। उन्होंने वर्तमान सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह देश किसी राष्ट्र-विरोधी राष्ट्रवादी सरकार का नहीं है। वहीं, सीपीआई (एम) के सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि देश को लोकतंत्र की जरूरत है, न कि सख्ती या मार्शल लॉ की। उन्होंने राजधानी में पुलिस की तैनाती और सख्ती की योजना पर चिंता व्यक्त की और कहा कि सरकार धर्मेंद्र प्रधान को बचाने और प्रदर्शनकारियों को पीटने की कोशिश कर रही है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी शामिल हुईं। उनके अलावा आरजेडी सांसद मनोज झा और कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग भी राहुल गांधी के आवास पर पहुंचे थे। मनोज झा ने युवाओं में व्याप्त बेचैनी और देश के हालातों पर चिंता जताई। वहीं, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा कि वे लड़ेंगे और जीतेंगे, और उन्होंने दिल्ली पुलिस तथा अमित शाह के लोगों की सक्रियता पर भी टिप्पणी की।