राहुल गांधी का पेपर लीक पर भाषण: लोकसभा में भारी हंगामा, कार्यवाही स्थगित

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राहुल गांधी का पेपर लीक पर भाषण: लोकसभा में भारी हंगामा, कार्यवाही स्थगित
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लोकसभा की कार्यवाही बुधवार को उस समय बाधित हो गई जब सदन में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर गरमागरम बहस हुई। विपक्ष के नेता राहुल गांधी के संबोधन के दौरान हुए हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही को पहले दोपहर 2:30 बजे तक और फिर 2:50 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। राहुल गांधी पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को घेर रहे थे, जिसके दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

पेपर लीक विधेयक पर राहुल गांधी का संबोधन

राहुल गांधी ने अपनी स्पीच की शुरुआत करते हुए कहा कि देश का भविष्य आज सड़कों पर उतरा हुआ है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि बीजेपी में जो लोग हैं, उन्हें अपने बच्चों से जाकर पूछना चाहिए कि सिस्टम में क्या गलत हुआ है। राहुल ने जोर देकर कहा कि छात्रों के प्रदर्शन में कोई गुस्सा या नफरत नहीं थी, बल्कि वे केवल अपनी आवाज उठा रहे थे। उन्होंने शिक्षा प्रणाली में व्याप्त खामियों और बार-बार होने वाले पेपर लीक पर गहरी चिंता व्यक्त की।

'इडियट' शब्द पर सदन में हंगामा

संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने 'इडियट' शब्द का इस्तेमाल किया, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। बीजेपी सांसदों ने इस शब्द को असंसदीय बताते हुए राहुल गांधी से माफी की मांग की। केंद्रीय मंत्री किरेण रिजिजू और राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी को टोकते हुए उनके शब्दों के चयन पर सवाल उठाए। इस पर राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर आप चाहते हैं कि देश में सिर्फ बीजेपी ही बोले तो मैं चुप होकर बैठ जाता हूं और स्पीकर ओम बिरला ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जो भी शब्द असंसदीय होंगे, उन्हें सदन की कार्यवाही से निकाल दिया जाएगा। राहुल गांधी ने बाद में कहा कि वह इस शब्द की जगह कोई दूसरा शब्द इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन स्पीकर ने स्पष्ट किया कि वह इस पर अपनी व्यवस्था दे चुके हैं।

गृह मंत्री पर लगाए गए गंभीर आरोप

राहुल गांधी ने सदन में एक अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गृह मंत्री ने छात्रों पर शूटिंग की इजाजत दी और पैलेट गन चलाने का आदेश दिया। उन्होंने दावा किया कि छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया गया था और इन आरोपों पर केंद्रीय मंत्री किरेण रिजिजू ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि राहुल गांधी बिना सोचे-समझे बोल रहे हैं। रिजिजू ने कहा कि यह एक गंभीर आरोप है और राहुल गांधी को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि राहुल गांधी ने किस आधार पर यह बयान दिया है। इस बीच विपक्षी सांसदों ने 'राहुल गांधी को बोलने दो' के नारे लगाए। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भी इस चर्चा में शामिल होते हुए कहा कि अगर नेता प्रतिपक्ष ने इतने गंभीर आरोप लगाए हैं, तो यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इसकी जांच करे कि छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार किसने किया।

RSS और शिक्षा प्रणाली पर कटाक्ष

राहुल गांधी ने अपने भाषण में आरोप लगाया कि देश के शिक्षा तंत्र और विश्वविद्यालयों पर आरएसएस का कब्जा हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि देश की हर यूनिवर्सिटी में आरएसएस से जुड़े लोग ही वाइस चांसलर के पद पर तैनात हैं। राहुल ने कहा कि छात्रों ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी हाल में 'अंधभक्त' नहीं बनेंगे। उन्होंने गृह मंत्री की सदन में अनुपस्थिति पर भी टिप्पणी की और कहा कि उन्होंने गृह मंत्री को कार में बैठे देखा था और वे डरे हुए लग रहे थे। राहुल ने कहा कि गृह मंत्री में सदन में आकर बैठने की हिम्मत नहीं है क्योंकि वे डरे हुए हैं।

विधेयक पर चर्चा का दूसरा दिन

पेपर लीक से जुड़े इस महत्वपूर्ण विधेयक पर आज लगातार दूसरे दिन चर्चा हो रही है। इससे पहले मंगलवार को इस बिल पर सदन में 9 घंटे तक लंबी बहस चली थी। चर्चा के पहले दिन केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने सरकार का पक्ष मजबूती से रखा था। वहीं विपक्ष की ओर से गौरव गोगोई, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव ने बहस में हिस्सा लिया था। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि एक परीक्षा आयोजित करने पर शिक्षा के बजट से भी ज्यादा खर्च होता है, फिर भी पेपर लीक हो जाते हैं, जिससे गरीब बच्चों के लाखों लाख रुपये बर्बाद हो रहे हैं। उन्होंने अंत में टिप्पणी की कि अंधभक्त किसी मूर्ख को ही भगवान मान लेते हैं।

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