संसद के बजट सत्र के चौथे दिन लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान भारी हंगामा देखने को मिला। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने डोकलाम में चीनी घुसपैठ का मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेरने का प्रयास किया। राहुल गांधी ने अपने संबोधन के दौरान पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के संस्मरणों (मेमोइर) का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि चीनी सेना के टैंक भारतीय सीमा के अत्यंत निकट आ गए थे। इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जिसके परिणामस्वरूप सदन की कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न हुआ।
डोकलाम और चीनी टैंकों की घुसपैठ का दावा
राहुल गांधी ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि वह कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को साझा करना चाहते हैं जो देश की सुरक्षा से जुड़े हैं। उन्होंने जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक का हवाला देते हुए दावा किया कि डोकलाम में चीनी सेना के 4 टैंक भारतीय क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे और वे कैलाश रिज पर चढ़ने का प्रयास कर रहे थे। राहुल गांधी ने कहा कि ये टैंक भारतीय सीमा से मात्र कुछ 100 मीटर की दूरी पर थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस पुस्तक को प्रकाशित नहीं होने दे रही है क्योंकि इसमें संवेदनशील जानकारियां शामिल हैं और राहुल गांधी ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के लोग चर्चा से डर रहे हैं और उन्हें अपनी बात पूरी करने से रोका जा रहा है।
रक्षा मंत्री और गृह मंत्री की कड़ी आपत्ति
राहुल गांधी के दावों पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तुरंत हस्तक्षेप किया और कड़ी आपत्ति जताई और राजनाथ सिंह ने कहा कि जिस पुस्तक का हवाला विपक्ष के नेता दे रहे हैं, वह अभी तक प्रकाशित ही नहीं हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो सामग्री सार्वजनिक डोमेन में नहीं है और जिसकी प्रामाणिकता सिद्ध नहीं हुई है, उसे सदन के पटल पर कैसे रखा जा सकता है और रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी से मांग की कि वे उस पुस्तक को सदन के समक्ष प्रस्तुत करें या फिर ऐसे असत्यापित दावों को वापस लें। गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करते हुए कहा कि किसी मैगजीन की रिपोर्ट या अप्रकाशित सामग्री के आधार पर सदन को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान केवल प्रामाणिक तथ्यों का ही उल्लेख किया जाना चाहिए।
सदन की मर्यादा और अध्यक्ष की व्यवस्था
हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की और उन्होंने स्पष्ट किया कि संसदीय नियमों के अनुसार, केवल वही दस्तावेज या समाचार पत्रों की कतरनें सदन में प्रस्तुत की जा सकती हैं जो प्रमाणित हों। अध्यक्ष ने राहुल गांधी को निर्देश दिया कि वे विपक्ष के नेता के रूप में नियमों का पालन करें और बिना किसी ठोस आधार के संवेदनशील सुरक्षा मुद्दों पर बयान न दें। इस दौरान समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने राहुल गांधी का समर्थन करते हुए कहा कि चीन का मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और विपक्ष के नेता को इस पर बोलने की अनुमति दी जानी चाहिए। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने भी आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।
सुरक्षा विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का दृष्टिकोण
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, सीमा सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा करते समय अत्यधिक सावधानी की आवश्यकता होती है और विश्लेषकों का मानना है कि पूर्व सैन्य अधिकारियों के संस्मरण अक्सर संवेदनशील जानकारी साझा करते हैं, जिन्हें आधिकारिक रूप से जारी होने से पहले सुरक्षा समीक्षा से गुजरना पड़ता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राहुल गांधी द्वारा इस मुद्दे को उठाना सरकार की रक्षा नीति पर सवाल खड़े करने की रणनीति का हिस्सा है, जबकि सरकार इसे प्रक्रियात्मक नियमों के उल्लंघन के रूप में देख रही है। सदन में इस गतिरोध के कारण कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित भी करना पड़ा, जिससे विधायी कार्यों पर प्रभाव पड़ा।
निष्कर्षतः, डोकलाम मुद्दे पर संसद में हुआ यह विवाद राष्ट्रीय सुरक्षा और संसदीय प्रक्रियाओं के बीच के संतुलन को रेखांकित करता है और जहां विपक्ष पारदर्शिता की मांग कर रहा है, वहीं सरकार तथ्यों की प्रामाणिकता और गोपनीयता के नियमों पर जोर दे रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और अधिक स्पष्टीकरण और राजनीतिक बहस होने की संभावना है।