राहुल गांधी का NCLT पर हमला: 22000 करोड़ का कर्ज 6 करोड़ 50 लाख में निपटाने को बताया लूट

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राहुल गांधी का NCLT पर हमला: 22000 करोड़ का कर्ज 6 करोड़ 50 लाख में निपटाने को बताया लूट
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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने देश में दो अलग-अलग सिस्टम बना दिए हैं। राहुल गांधी के अनुसार एक सिस्टम मुट्ठी भर अरबपतियों के लिए काम करता है और दूसरा सिस्टम बाकी सभी आम नागरिकों के लिए है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी NCLT पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने इसे नेता-कंपनी लूट ट्रिब्यूनल का नाम दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बैंक और वित्तीय संस्थान आम नागरिकों के साथ बहुत सख्ती से पेश आते हैं लेकिन कुछ खास उद्योगपतियों के साथ उनका बर्ताव बहुत ही नरम और मददगार होता है।

22000 करोड़ रुपये के कर्ज का मामला

राहुल गांधी की इस प्रतिक्रिया का मुख्य कारण NCLT द्वारा एक बड़े डिफॉल्ट लोन का निपटारा करना है। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि 22000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम डिफॉल्ट लोन को महज 6 करोड़ 50 लाख रुपये में सेटल कर दिया गया। यह सेटलमेंट मूल कर्ज का 99 दशमलव 97 प्रतिशत माफ करने के बराबर है। गांधी ने इसे जनता के पैसे की पूरी तरह से लूट करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कैसे इतनी बड़ी राशि को इतनी आसानी से छोड़ा जा सकता है जबकि आम आदमी छोटे से कर्ज के लिए भी संघर्ष करता है।

किसान और नौकरीपेशा वर्ग के साथ भेदभाव

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी एक पोस्ट में राहुल गांधी ने कर्ज वसूली की प्रक्रिया में मौजूद असमानता को उजागर किया। उन्होंने कहा कि अगर कोई किसान 50000 रुपये का कर्ज नहीं चुका पाता है तो प्रशासन तुरंत उसकी जमीन नीलाम कर देता है। इसी तरह अगर कोई सैलरी वाला व्यक्ति अपनी एक भी ईएमआई देने में चूक जाता है तो बैंक के रिकवरी एजेंट उसके घर पहुंच जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गरीब छात्रों को अपनी पढ़ाई के लिए लोन तक नहीं मिल पाता है और राहुल गांधी का तर्क है कि कुछ खास दोस्तों के लिए बैंक का पैसा निजी संपत्ति की तरह है जिसे वे अपनी मर्जी से निकाल सकते हैं और अपनी मर्जी से चुका सकते हैं।

हेयरकट के नाम पर मुंडन का आरोप

बैंकिंग शब्दावली में हेयरकट का मतलब कर्ज की राशि में कटौती करना होता है। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह सिर्फ हेयरकट नहीं है बल्कि यह असल में मुंडन है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सेटलमेंट इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड 2016 का पूरी तरह से मजाक उड़ाते हैं। कांग्रेस पार्टी ने मौजूदा सरकार के कार्यकाल में NCLT की कार्यप्रणाली और उसकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

12 साल के आंकड़ों की मांग

कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री से मांग की कि वे पिछले 12 सालों के आंकड़े सार्वजनिक करें कि NCLT के जरिए अब तक कितने लाख करोड़ रुपये हेयरकट के नाम पर लुटाए गए हैं। सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार NCLT के माध्यम से जनता और बैंकों के पैसे की लूट होने दे रही है। उन्होंने अंदेशा जताया कि यह आंकड़ा 10 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे यह बात किसी अंदाजे के आधार पर नहीं बल्कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर कह रहे हैं।

NCLT की भूमिका पर सवाल

सुरजेवाला ने आगे सवाल किया कि जब 50 प्रतिशत से लेकर 99 प्रतिशत तक का हेयरकट ही करना है तो फिर NCLT की लंबी चौड़ी कार्रवाई करने की जरूरत ही क्या है। उन्होंने इसे उद्योगपतियों का कर्ज माफ करने का एक कानूनी तरीका बताया। विपक्ष का मानना है कि जिस NCLT को दिवालियापन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए बनाया गया था उसका उपयोग अब कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

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