राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र आज से विधिवत रूप से शुरू होने जा रहा है और सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे प्रारंभ होगी। इस सत्र को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने ही अपनी रणनीतियां तैयार कर ली हैं। सर्वदलीय बैठक और भाजपा विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सदन के भीतर जोरदार राजनीतिक बहस देखने को मिलेगी। एक ओर जहां राज्य सरकार अपने अब तक के कार्यकाल की उपलब्धियों और जनहितकारी निर्णयों को मजबूती से सदन के पटल पर रखने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष समान नागरिक संहिता (UCC), चंदा चोरी, किसान, युवा, रोजगार और कर्मचारी कल्याण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए तैयार है।
विधायी औपचारिकताएं और महत्वपूर्ण दस्तावेज
सत्र के पहले दिन की कार्यवाही के दौरान मुख्य रूप से विधायी औपचारिकताओं को पूरा किया जाएगा। विधानसभा के प्रमुख सचिव द्वारा उन सभी विधेयकों का विस्तृत विवरण सदन के पटल पर रखा जाएगा, जिन्हें पिछले सत्रों में पारित किया गया था और जिन्हें अब राज्यपाल महोदय की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इसके साथ ही, सदन की कार्यसूची में शामिल अन्य आवश्यक सरकारी प्रतिवेदन और पत्रादि भी प्रस्तुत किए जाएंगे। यह प्रक्रिया सदन की आगामी कार्यवाही के लिए एक आधार तैयार करेगी।
शोकाभिव्यक्ति और श्रद्धांजलि
सदन की कार्यवाही की शुरुआत शोकाभिव्यक्ति के साथ होगी। वाई. पाटील, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन और भास्कर राव को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इनके अलावा पूर्व सांसद एवं विधायक विष्णु मोदी, पूर्व सदस्य ब्रह्मदेव कुमावत, पूर्व सदस्य बाबूलाल बैरवा और पूर्व सदस्य नवनीत लाल निनामा के निधन पर भी सदन में शोक व्यक्त किया जाएगा और शोकाभिव्यक्ति के पश्चात ही सदन की अन्य विधायी प्रक्रियाएं आगे बढ़ेंगी।
राज्यपाल द्वारा 10 ऐतिहासिक विधेयकों की वापसी
इस सत्र की शुरुआत में ही एक बड़ा संवैधानिक घटनाक्रम सामने आया है। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने पिछली सरकारों के समय पारित किए गए 10 महत्वपूर्ण विधेयकों को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया है। इनमें से 9 विधेयक अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के समय के हैं, जबकि 1 विधेयक साल 2008 का है जब वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री थीं। लौटाए गए विधेयकों में व्यास विद्या पीठ विश्वविद्यालय जोधपुर विधेयक (2022), सौरभ विश्वविद्यालय हिंडौन सिटी विधेयक (2022) और राजस्थान विद्युत (शुल्क) विधेयक (2023) शामिल हैं। इसके अलावा साल 2020 के तीन कृषि संशोधन विधेयक, जिनमें कृषक उपज व्यापार, कृषक सशक्तिकरण-संरक्षण और आवश्यक वस्तु संशोधन शामिल हैं, उन्हें भी वापस किया गया है। अन्य विधेयकों में नाथद्वारा मंदिर संशोधन विधेयक (2023), राजस्थान लिंचिंग से संरक्षण विधेयक (2019), सम्मान के नाम पर वैवाहिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप प्रतिषेध विधेयक (2019) और राजस्थान धर्म स्वातंत्र्य विधेयक (2008) शामिल हैं। इन विधेयकों पर सदन में तीखी चर्चा होने की उम्मीद है।
कार्य सलाहकार समिति की बैठक
आज सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की अध्यक्षता में कार्य सलाहकार समिति (BAC) की बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में सत्र के आगामी दिनों के कामकाज का एजेंडा तय किया जाएगा। चूंकि वर्तमान में सत्र की अवधि सीमित बताई जा रही है, इसलिए यह समिति तय करेगी कि कौन से विधायी कार्य किस दिन लिए जाएंगे। लंबित विधेयकों और नए प्रस्तावों पर चर्चा के लिए समय का आवंटन इसी बैठक में सुनिश्चित होगा।
UCC और अन्य मुद्दों पर राजनीतिक टकराव
मानसून सत्र के दौरान समान नागरिक संहिता (UCC) सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभर सकता है और सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह इस संबंध में विधेयक ला सकती है। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा है कि सरकार यूसीसी पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने चंदा चोरी, कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और युवाओं के मुद्दों पर सरकार को घेरने की बात कही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भाजपा विधायकों को निर्देश दिए हैं कि वे सदन में सक्रिय रहें और सरकार के दो साल छह महीने के कार्यकाल की उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से रखें। विपक्ष का आरोप है कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से भाग रही है, जबकि सत्ता पक्ष हर सवाल का जवाब देने का दावा कर रहा है।