राजस्थान में भीषण गर्मी और लू के प्रकोप के बीच शनिवार दोपहर को मौसम ने अचानक करवट ली, जिससे प्रदेशवासियों को तपिश से बड़ी राहत मिली है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण राज्य के कई हिस्सों में धूल भरी आंधी और रेतीले बवंडर का प्रकोप देखा गया, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है और जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर को चूरू सहित कुल 4 जिलों में अचानक आए इस बदलाव ने पूरे इलाके को अपनी आगोश में ले लिया और देखते ही देखते दिन में ही रात जैसा नजारा हो गया। इस प्राकृतिक घटना ने जहां एक ओर लोगों को डरा दिया, वहीं दूसरी ओर चिलचिलाती धूप से राहत भी पहुंचाई।
चार जिलों में दिखा प्रकृति का रौद्र रूप
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, शनिवार दोपहर को सीकर, चूरू, गंगानगर और बीकानेर जिले में भयानक रेतीला बवंडर देखने को मिला। हालात इतने गंभीर हो गए थे कि महज कुछ ही मिनटों के भीतर पूरा शहर रेत की मोटी चादर से ढक गया और दिन के उजाले में अचानक छाए इस गहरे अंधेरे को देखकर लोग काफी घबरा गए और अपनी सुरक्षा के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर दौड़ पड़े। धूल के इस विशाल बवंडर ने पूरे आसमान को इस कदर ढंक लिया कि कुछ समय के लिए स्थिति बिल्कुल रात जैसी हो गई थी। सड़कों पर दृश्यता शून्य के करीब पहुंच गई, जिससे वाहनों की आवाजाही थम गई और लोग जहां थे वहीं रुकने को मजबूर हो गए।
कैसे बनता है यह रेतीला बवंडर
रेगिस्तानी इलाकों में उठने वाले इस रेतीले बवंडर की प्रक्रिया काफी विशिष्ट होती है। रेगिस्तान में चलने वाली तेज हवाएं वहां फैले रेत के समंदर में लहरें पैदा कर देती हैं। जब हवा की गति अत्यधिक तेज होती है, तो इन लहरों की ढीली धूल ऊपर की ओर उठने लगती है और एक विशाल बवंडर का रूप धारण कर लेती है। रेगिस्तान में उठने वाले ये बवंडर कई बार मीलों लंबे होते हैं और अपनी राह में आने वाली हर चीज को धूल से ढक देते हैं। यह बवंडर जिस भी दिशा से होकर गुजरता है, वहां केवल धूल का साम्राज्य ही नजर आता है। शनिवार को भी सीकर और चूरू के इलाकों में ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां धूल की ऊंची दीवारों ने आसमान को छू लिया था।
भीषण गर्मी और हीटवेव से मिली निजात
हालांकि इस तूफान ने कुछ समय के लिए जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया और लोगों में डर का माहौल पैदा किया, लेकिन इसने पिछले कई दिनों से जारी भीषण गर्मी से बड़ी राहत भी दिलाई है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से तापमान में आई इस अचानक गिरावट से लोगों ने राहत की सांस ली है और इस रेतीले बवंडर के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिनमें धूल की विशाल दीवार को रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ते हुए देखा जा सकता है। यह घटना राजस्थान के रेगिस्तानी जिलों में प्रकृति के प्रभाव और मौसम में आने वाले अचानक बदलावों को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। सीकर, चूरू, गंगानगर और बीकानेर के निवासियों के लिए यह बवंडर डर के साथ-साथ ठंडक का संदेश लेकर आया है।