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राजस्थान मानसून अलर्ट: 8% कम बारिश का अनुमान, भीषण गर्मी बढ़ाएगी मुश्किलें

राजस्थान मानसून अलर्ट: 8% कम बारिश का अनुमान, भीषण गर्मी बढ़ाएगी मुश्किलें
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राजस्थान में इस साल मानसून की रफ्तार सुस्त रहने की संभावना है, जिससे कृषि और आम जनजीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। जयपुर मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, देश में इस वर्ष सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान लगाया गया है। जून से सितंबर के बीच होने वाली मानसूनी बारिश अपने दीर्घकालिक औसत का केवल 92 प्रतिशत ही रह सकती है। इसका सीधा अर्थ है कि इस सीजन में बारिश में 8 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है।

अल नीनो का प्रभाव और मानसून की सुस्ती

जयपुर मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक राधेशयम शर्मा के अनुसार, मानसून में इस संभावित गिरावट का मुख्य कारण 'अल नीनो' प्रभाव है। प्रशांत महासागर के पानी के तापमान में होने वाली वृद्धि को अल नीनो कहा जाता है, जिसका सीधा असर भारतीय मानसून पर पड़ता है और जब प्रशांत महासागर का पानी गर्म होता है, तो भारत में मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। अधिकारियों के अनुसार, इसका प्रभाव जून के महीने से दिखना शुरू हो जाएगा, जिससे न केवल मानसून की शुरुआत धीमी होगी, बल्कि इसकी तीव्रता में भी कमी आएगी।

उत्तर भारत के राज्यों पर सबसे अधिक असर

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस मानसून की कमी का सबसे ज्यादा असर उत्तर भारत के राज्यों में देखने को मिलेगा। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामान्य के मुकाबले 10 से 20 प्रतिशत तक कम बारिश होने की आशंका जताई गई है। मध्य भारत के हिस्सों में भी 5 से 10 प्रतिशत की कमी रह सकती है। हालांकि, पूर्वोत्तर भारत में बारिश के सामान्य रहने की उम्मीद है। पिछले एक दशक में यह दूसरी बार है जब मानसून के इतना कमजोर रहने का पूर्वानुमान जारी किया गया है।

कृषि उत्पादन और अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव

भारत की लगभग 75 प्रतिशत वर्षा मानसून सीजन के दौरान होती है, जो सीधे तौर पर खरीफ फसलों को प्रभावित करती है। कम बारिश के कारण धान, मक्का और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों के उत्पादन में गिरावट आ सकती है। अधिकारियों का मानना है कि पैदावार कम होने से बाजार में खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ेगा। इसके अतिरिक्त, कम वर्षा के कारण जलाशयों में पानी का स्तर कम रहने और बिजली की मांग में अत्यधिक वृद्धि होने की भी संभावना है।

राजस्थान में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप

मानसून के आगमन से पहले ही राजस्थान के कई जिलों में तापमान ने रिकॉर्ड तोड़ना शुरू कर दिया है। 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 17 और 18 अप्रैल को जोधपुर और बीकानेर संभाग में पारा 42 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। प्रदेश के कई इलाकों में भीषण हीटवेव (लू) चलने का अलर्ट जारी किया गया है, जिससे आने वाले दिनों में गर्मी का टॉर्चर और बढ़ेगा।

वर्षा के आंकड़ों में गिरावट का गणित

आमतौर पर भारत में मानसून सीजन के दौरान औसतन 87 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की जाती है। हालांकि, इस साल के पूर्वानुमान के अनुसार यह आंकड़ा घटकर लगभग 80 सेंटीमीटर तक रह सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह 7 सेंटीमीटर की कमी सुनने में छोटी लग सकती है, लेकिन भौगोलिक और आर्थिक स्तर पर इसके परिणाम व्यापक हो सकते हैं। विशेष रूप से राजस्थान जैसे शुष्क प्रदेश में, जहां भूजल स्तर पहले से ही चिंता का विषय है, वहां कम बारिश जल संकट को और गहरा कर सकती है।

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