राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) के दौसा आगार में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एसीबी की टीम ने बुधवार को कार्रवाई करते हुए दौसा आगार के मुख्य प्रबंधक विश्राम मीणा को ₹20,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई एसीबी मुख्यालय के निर्देशों पर अलवर प्रथम इकाई द्वारा की गई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक पुलिस गोविंद गुप्ता ने इस पूरी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी अधिकारी के खिलाफ पुख्ता सबूतों के आधार पर जाल बिछाया गया था।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की योजनाबद्ध कार्रवाई
एसीबी के अनुसार, विभाग को हेल्पलाइन नंबर 1064 पर एक परिवादी द्वारा शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में बताया गया था कि मुख्य प्रबंधक विश्राम मीणा उसके जायज कार्यों को रोकने और मेडिकल लीव स्वीकृत करने के बदले अवैध राशि की मांग कर रहे हैं। शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने गोपनीय तरीके से मामले का सत्यापन किया। सत्यापन के दौरान रिश्वत की मांग की पुष्टि होने पर टीम ने बुधवार को ट्रैप की योजना बनाई और आरोपी को रिश्वत की राशि स्वीकार करते हुए मौके पर ही दबोच लिया।
मेडिकल लीव अप्रूवल के लिए मांगी गई रिश्वत
मामले के विवरण के अनुसार, परिवादी दिसंबर 2025 में बीमार होने के कारण चिकित्सा अवकाश पर गया था। इलाज पूरा होने के बाद जब वह जनवरी 2026 में वापस ड्यूटी पर लौटा, तो उसने अपने चिकित्सा प्रमाण पत्र और संबंधित दस्तावेज एलडीसी भगवत को सौंप दिए थे। जब परिवादी 25 मार्च को अपनी मेडिकल लीव को आधिकारिक रूप से स्वीकृत करवाने के लिए मुख्य प्रबंधक विश्राम मीणा के पास पहुंचा, तो आरोपी ने इस प्रक्रिया के बदले ₹20,000 की मांग की। परिवादी को मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था, जिसके बाद उसने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की शरण ली।
एसीबी द्वारा रिश्वत की मांग का सत्यापन
शिकायतकर्ता की रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए एसीबी की टीम ने दो अलग-अलग तारीखों, 2 अप्रैल और 7 अप्रैल को रिश्वत की मांग का सत्यापन किया। इन दोनों ही मौकों पर मुख्य प्रबंधक द्वारा ₹20,000 की मांग दोहराई गई। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद, एसीबी की अलवर प्रथम इकाई ने बुधवार को जाल बिछाया। जैसे ही परिवादी ने मुख्य प्रबंधक को रिश्वत की राशि सौंपी, पहले से तैयार एसीबी की टीम ने उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के पास से रिश्वत की पूरी राशि बरामद कर ली गई है।
आरोपी से पूछताछ और आगामी विधिक प्रक्रिया
गिरफ्तारी के बाद एसीबी की टीम आरोपी मुख्य प्रबंधक विश्राम मीणा को लेकर अलवर रवाना हो गई, जहां उनसे विस्तृत पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। इसके साथ ही, आरोपी के आवास और अन्य ठिकानों पर भी तलाशी ली जा सकती है ताकि आय से अधिक संपत्ति या अन्य भ्रष्टाचार के मामलों का पता लगाया जा सके। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
विभाग में हड़कंप और प्रशासनिक प्रभाव
राजस्थान रोडवेज के दौसा आगार में हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद विभाग के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। एसीबी की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी सेवाओं के बदले रिश्वत की मांग करने वाले किसी भी लोक सेवक को बख्शा नहीं जाएगा और इस घटना ने रोडवेज प्रशासन के भीतर छुट्टी और अन्य प्रशासनिक कार्यों की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसकी अब आंतरिक स्तर पर भी समीक्षा की जा सकती है।