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राजेश एक्सपोर्ट्स पर SEBI का बड़ा एक्शन: गोल्ड किंग राजेश मेहता पर 15 लाख 15 हजार करोड़ की हेराफेरी का आरोप

राजेश एक्सपोर्ट्स पर SEBI का बड़ा एक्शन: गोल्ड किंग राजेश मेहता पर 15 लाख 15 हजार करोड़ की हेराफेरी का आरोप
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भारतीय बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने देश के जाने-माने स्वर्ण व्यवसायी राजेश मेहता और उनकी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स के खिलाफ एक बहुत बड़ी कार्रवाई की है। एक समय में देश के 'गोल्ड किंग' कहे जाने वाले राजेश मेहता और उनकी कंपनी अब गंभीर विवादों के घेरे में आ गए हैं। सेबी ने कंपनी पर वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच करीब 15 लाख 15 हजार करोड़ रुपये का रेवेन्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का गंभीर आरोप लगाया है। जांच एजेंसी के अनुसार, यह भारी-भरकम राशि कंपनी की ओर से बताए गए कुल वैल्यू का लगभग 99 दशमलव 80 प्रतिशत हिस्सा है। इस खुलासे ने पूरे कॉर्पोरेट जगत और निवेशकों को चौंका दिया है।

सेबी का प्रतिबंध और बाजार की प्रतिक्रिया

मामले की गंभीरता को देखते हुए सेबी ने 3 जून की शाम को राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर राजेश मेहता समेत कंपनी के प्रमुख लोगों पर बाजार में कारोबार करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। सेबी ने यह भी आरोप लगाया है कि कंपनी ने जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग नहीं किया। इस कार्रवाई के बाद कंपनी के नए फॉरेंसिक ऑडिट के आदेश भी दिए गए हैं। सेबी के इस कड़े कदम का असर कंपनी के शेयरों पर तुरंत देखने को मिला। 4 जून की सुबह जैसे ही शेयर बाजार खुला, राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर 5 फीसदी के लोअर सर्किट के साथ 103 रुपये 92 पैसे पर पहुंच गया। इस गिरावट से निवेशकों में भारी चिंता देखी जा रही है और कई लोग अपने शेयर बेचकर बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं।

राजेश मेहता का पक्ष

इन गंभीर आरोपों के बीच राजेश मेहता ने अपनी सफाई पेश की है और सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कहा कि सेबी का यह आदेश सिर्फ एक अंतरिम आदेश है और इसमें लगाए गए आरोप सत्य नहीं हैं। मेहता का कहना है कि उनकी कंपनी वर्तमान में इस आदेश का गहराई से अध्ययन कर रही है और जल्द ही नियामक को अपना आधिकारिक जवाब सौंपेगी। हालांकि, इस घटनाक्रम ने उस कारोबारी साम्राज्य की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसे दशकों की मेहनत से खड़ा किया गया था।

गैराज से शुरू हुआ था स्वर्ण साम्राज्य का सफर

राजेश मेहता की सफलता की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी लगती है। उन्होंने अपने कारोबारी सफर की शुरुआत 1989 में अपने भाई प्रशांत मेहता के साथ बहुत ही छोटे स्तर पर की थी। शुरुआती दिनों में वे चेन्नई से सोने के गहने खरीदते थे और उन्हें गुजरात के राजकोट में ले जाकर बेचते थे। उसी साल उन्होंने बेंगलुरु में एक छोटे से गैराज से सोने के गहनों का निर्माण कार्य शुरू किया। अपनी मेहनत और व्यापारिक सूझबूझ के दम पर उन्होंने इस छोटे से काम को एक बड़े उद्योग में बदल दिया। धीरे-धीरे उनके उत्पाद ब्रिटेन, दुबई, ओमान, कुवैत, अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक अपनी पहचान बनाने में सफल रहे। मार्च 2026 तक कंपनी का रेवेन्यू 2516 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है।

दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनर बनने की उपलब्धि

राजेश मेहता की कंपनी देखते ही देखते भारत से सोने के उत्पादों की सबसे बड़ी निर्यातक कंपनियों की सूची में शामिल हो गई। साल 2015 में उन्होंने स्विट्जरलैंड की मशहूर गोल्ड रिफाइनिंग कंपनी Valcambi SA का अधिग्रहण करके पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस बड़े अधिग्रहण के बाद उनका कारोबार भारत, स्विट्जरलैंड और दुबई जैसे प्रमुख केंद्रों से संचालित होने लगा। आज राजेश एक्सपोर्ट्स को दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग कंपनियों में गिना जाता है। कंपनी की आधुनिक रिफाइनिंग यूनिट में सालाना 2400 टन सोने के उत्पाद तैयार करने की विशाल क्षमता है और इसका व्यापारिक जाल 60 से अधिक देशों में फैला हुआ है। लेकिन अब 15 लाख 15 हजार करोड़ रुपये के रेवेन्यू विवाद ने इस विशाल साम्राज्य के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं।

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