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राज्यसभा में बढ़ा BJP का कुनबा: AAP के 7 सांसदों के विलय को मंजूरी, संख्या 113 पहुंची

राज्यसभा में बढ़ा BJP का कुनबा: AAP के 7 सांसदों के विलय को मंजूरी, संख्या 113 पहुंची
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राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (AAP) से अलग होकर आए गुट के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में विलय को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है और आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों का एक गुट पिछले हफ्ते शुक्रवार को पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गया था। हालांकि, आम आदमी पार्टी की ओर से इन बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की गई थी, लेकिन सभापति ने इस गुट के बीजेपी में विलय को स्वीकार कर लिया है और इस संबंध में राज्यसभा सचिवालय द्वारा अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।

राज्यसभा में बदला सीटों का समीकरण

बागी गुट के बीजेपी में विलय होने के साथ ही उच्च सदन में बीजेपी की स्थिति और अधिक मजबूत हो गई है। राज्यसभा में बीजेपी के सांसदों की संख्या अब बढ़कर 113 तक पहुंच गई है, जिसमें राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत 5 सदस्य भी शामिल हैं। दूसरी ओर, पिछले हफ्ते तक 10 सांसदों वाली आम आदमी पार्टी के पास अब महज 3 सांसद ही शेष रह गए हैं। उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले 7 सांसदों में से 6 सांसद पंजाब से राज्यसभा सदस्य हैं।

इन सांसदों ने छोड़ी आम आदमी पार्टी

आम आदमी पार्टी को पिछले हफ्ते शुक्रवार को उस समय बड़ा झटका लगा जब राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, विक्रम साहनी, राजेंद्र गुप्ता और स्वाति मालीवाल ने एक साथ पार्टी छोड़ दी और बीजेपी का दामन थाम लिया। इन सांसदों ने पार्टी छोड़ते समय आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों से भटक गई है। इसी बीच, आम आदमी पार्टी के एक अन्य सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने दावा किया है कि राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने उनसे भी आजाद समूह में शामिल होने के लिए संपर्क किया था, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया था।

सदस्यता रद्द करने की मांग और कानूनी तर्क

इससे पहले, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने रविवार को सभापति सीपी राधाकृष्णन को पत्र लिखकर उन 7 सांसदों को अयोग्य घोषित करने का अनुरोध किया था। संजय सिंह का तर्क था कि इन सदस्यों द्वारा उठाया गया कदम दल-बदल कानून के दायरे में आता है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी जरूरत पड़ने पर इस मामले में कानूनी कदम उठाएगी। संजय सिंह ने दावा किया कि ये सांसद आम आदमी पार्टी के टिकट पर निर्वाचित हुए थे, इसलिए उनका बीजेपी में जाना अयोग्यता का आधार है। उन्होंने उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी हवाला दिया।

राघव चड्ढा का बयान और भविष्य की रणनीति

पार्टी छोड़ने के फैसले पर राघव चड्ढा ने कहा कि वह अपना करियर बनाने के लिए नहीं, बल्कि करियर छोड़कर राजनीति में आए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अब पार्टी में काम करने से रोका जाता है और आम आदमी पार्टी उन लोगों के हाथों में है जो निजी फायदे के लिए काम कर रहे हैं। चड्ढा ने बताया कि उनके पास तीन विकल्प थे: राजनीति छोड़ना, पार्टी के भीतर सुधार की कोशिश करना या दूसरी पार्टी के साथ जुड़कर सकारात्मक राजनीति करना और उन्होंने कहा कि सभी 7 सांसदों ने मिलकर दल छोड़ने का फैसला किया ताकि वे जनता की समस्याओं को अधिक मेहनत से उठा सकें।

बीजेपी में शामिल होने वाले सात सांसदों के नाम राघव चड्ढा, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप कुमार पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता हैं। आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों के बीजेपी में शामिल होने से राज्यसभा में बीजेपी के सांसदों की कुल संख्या 113 हो गई है।

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