अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार दान पेटी में जो पैसा और जेवरात चढ़ाते थे, उसे वहां तैनात कुछ जिम्मेदार लोग ही चोरी कर रहे थे। इस मामले में लंबे इंतजार के बाद एफआईआर दर्ज कर ली गई है और टिन्नू यादव समेत 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह खुलासा तब हुआ जब मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों को दान में मिलने वाली रकम में लगातार कमी महसूस हुई। अब ये सभी आरोपी सलाखों के पीछे हैं और पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
चोरी का शक और हिडन कैमरों का जाल
इस पूरे खेल का खुलासा मई महीने के आखिरी सप्ताह में शुरू हुआ। राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने जब बैंक में जमा होने वाली रकम और दान पेटियों के खाली होने के क्रम का मिलान किया, तो उन्हें गड़बड़ी का अहसास हुआ। सामान्य तौर पर एक दान पेटी से एक बार में 6 से 7 लाख रुपये निकलते थे, लेकिन कुछ समय से 500 रुपये के नोटों की गड्डियों में कमी देखी जा रही थी। शक गहराने पर ट्रस्ट ने नोट गिनने वाले कमरे में कुछ हिडन कैमरे लगवा दिए। इन कैमरों की एक सप्ताह की फुटेज देखने पर पता चला कि कर्मचारी सीसीटीवी कैमरों के सामने खड़े होकर ओट बना लेते थे और उनके साथी नोटों की गड्डियां चुराकर अपने कपड़ों में छिपा लेते थे।
बाथरूम में छिपाते थे नोट और घर पर होता था बंटवारा
जांच में यह बात सामने आई कि अनुकल्प मिश्रा और उसके साथी चोरी की गई नोटों की गड्डियों को पहले मंदिर के बाथरूम में छिपा देते थे। इसके बाद मौका मिलते ही वे इन गड्डियों को मंदिर परिसर से बाहर ले जाते थे। चोरी की गई इस रकम का बंटवारा एक तय मकान में किया जाता था। बताया जा रहा है कि यह खेल पिछले 2 से 3 साल से लगातार चल रहा था। आरोपियों ने सुरक्षा की कमी का फायदा उठाया, क्योंकि ड्यूटी से वापस जाते समय कर्मचारियों की ठीक से तलाशी नहीं ली जाती थी। इसी लापरवाही की वजह से वे दान पेटी से निकलने वाले नोटों और जेवरात पर हाथ साफ कर रहे थे।
वाउचर और एक्स्ट्रा नोटों की अनोखी हेराफेरी
चोरी करने का एक और तरीका बेहद शातिर था। नोट गिनने वाले कर्मचारी हर गड्डी में कुछ एक्स्ट्रा नोट डाल देते थे। जब बैंक में रकम जमा करने की बारी आती, तो बैंक कर्मचारी हर गड्डी के एक-एक नोट को गिनने के बजाय सिर्फ गड्डियों की गिनती करते थे और उसी के आधार पर वाउचर बन जाता था। मंदिर से बैंक ले जाते समय, आरोपी उन गड्डियों में से एक्स्ट्रा लगाए गए नोट निकाल लेते थे। इस तरह बैंक के वाउचर से रकम का मिलान भी हो जाता था और बीच रास्ते में चोरी भी हो जाती थी। अनुकल्प मिश्रा इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य हिस्सा था और वह अपने बहनोई लव कुश मिश्रा के जरिए इस हेराफेरी को अंजाम दे रहा था।
सिफारिशों से मिली थी नौकरी और जेवरात की चोरी
इस मामले में पकड़े गए सभी आरोपी किसी न किसी प्रभावशाली व्यक्ति की सिफारिश पर काम कर रहे थे। चंपत राय का ड्राइवर टिन्नू यादव, जो वहां व्यवस्थापक के तौर पर तैनात था, उसने अपने चचेरे भाई मनीष यादव को नोट गिनने के काम में लगवाया था। इसी तरह अनुकल्प मिश्रा ने अपने रिश्तेदार लव कुश मिश्रा को वहां भर्ती कराया था। ये लोग सिर्फ नकदी ही नहीं, बल्कि भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के जेवरात भी चोरी कर लेते थे। बाली, झुमकी, नथ और राम लला के कंगन व पैजनिया जैसे जेवरात भी ये लोग नहीं छोड़ते थे। पुलिस ने लव कुश मिश्रा के घर से करीब 10 लाख रुपये बरामद किए हैं।
बैंक खातों में जमा हो रही थी चोरी की रकम
ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने पूछताछ के दौरान पाया कि चोरी की गई रकम का एक हिस्सा आरोपी अविनाश पांडे अपने बैंक खाते में जमा कर रहा था। बैंक रिकॉर्ड के मिलान से इस बात की पुष्टि हुई है। इस मामले में राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष चंद्र की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जो अक्सर उस कमरे में आते-जाते थे जहां दान पेटियां खोली जाती थीं। फिलहाल पुलिस ने सभी 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस सिंडिकेट में और कौन-कौन शामिल है।