भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए महाराष्ट्र स्थित सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। केंद्रीय बैंक द्वारा मंगलवार को की गई इस कार्रवाई ने सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में हलचल पैदा कर दी है। RBI ने स्पष्ट किया है कि बैंक की वित्तीय स्थिति अब इस स्तर पर नहीं रह गई है कि वह अपने परिचालन को जारी रख सके। बैंक के पास न तो पर्याप्त पूंजी बची है और न ही भविष्य में कमाई की कोई ठोस संभावनाएं नजर आ रही हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए, बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के प्रावधानों के तहत यह सख्त फैसला लिया गया है। RBI के आदेश के अनुसार, सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक 12 मई, 2026 से अपना बैंकिंग कारोबार करना पूरी तरह से बंद कर देगा।
लाइसेंस रद्द करने के पीछे के मुख्य कारण
RBI ने बैंक के खिलाफ इस कड़ी कार्रवाई के लिए कई महत्वपूर्ण कारणों का हवाला दिया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट की कई आवश्यक नियामक शर्तों और आवश्यकताओं का पालन करने में पूरी तरह विफल रहा था और बैंक की वर्तमान वित्तीय स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि वह अपने मौजूदा जमाकर्ताओं को उनकी पूरी जमा राशि का भुगतान करने में असमर्थ है। RBI ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि यदि इस बैंक को आगे भी बैंकिंग कारोबार जारी रखने की अनुमति दी जाती है, तो यह जमाकर्ताओं के हितों और व्यापक जनहित के लिए बेहद हानिकारक साबित होगा। जनहित पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को रोकने के लिए लाइसेंस रद्द करना अनिवार्य हो गया था।
बैंकिंग गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक
लाइसेंस कैंसिल होने के साथ ही सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक पर तत्काल प्रभाव से बैंकिंग कारोबार करने पर रोक लगा दी गई है और इसमें जनता से नई जमा राशि स्वीकार करना और पुरानी जमा राशि का पुनर्भुगतान (Repayment) करना दोनों शामिल हैं। अब यह बैंक किसी भी प्रकार का बैंकिंग लेनदेन नहीं कर सकेगा। RBI ने महाराष्ट्र के सहकारिता आयुक्त और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार से भी संपर्क किया है। उनसे अनुरोध किया गया है कि वे बैंक को बंद करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करें और इस मामले में एक लिक्विडेटर (परिसमापक) की नियुक्ति करें। यह लिक्विडेटर बैंक की संपत्तियों और देनदारियों के निपटान की जिम्मेदारी संभालेगा ताकि बैंक को व्यवस्थित रूप से बंद किया जा सके।
जमाकर्ताओं के लिए 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर
बैंक के ग्राहकों के लिए राहत की बात यह है कि उनकी जमा राशि पूरी तरह असुरक्षित नहीं है। RBI ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक जमाकर्ता, जमा बीमा और क्रेडिट गारंटी निगम (DICGC) से 5 लाख रुपये तक की जमा बीमा राशि प्राप्त करने का हकदार होगा। यह सुरक्षा कवच उन सभी जमाकर्ताओं को मिलेगा जिनकी राशि बैंक में जमा है। 36 फीसदी जमाकर्ता ऐसे हैं, जो DICGC से अपनी पूरी जमा राशि प्राप्त करने के पात्र हैं। इसका मतलब है कि अधिकांश छोटे जमाकर्ताओं को बैंक के बंद होने से कोई वित्तीय नुकसान नहीं होगा और उन्हें उनकी पूरी मेहनत की कमाई वापस मिल जाएगी।
वित्तीय भुगतान और वर्तमान स्थिति का विवरण
जमाकर्ताओं को भुगतान करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। 72 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है। यह भुगतान उन जमाकर्ताओं को किया गया है जिन्होंने सर्वसमावेशी निर्देशों के तहत अपने दावे प्रस्तुत किए थे। RBI ने दोहराया है कि बैंक की खराब कमाई की संभावनाओं और पूंजी की कमी के कारण इसे बैंकिंग क्षेत्र में बनाए रखना संभव नहीं था। बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन और जमाकर्ताओं के प्रति बैंक की असमर्थता ने इस कार्रवाई को अपरिहार्य बना दिया। अब लिक्विडेटर की नियुक्ति के बाद बैंक की शेष प्रक्रियाओं को पूरा किया जाएगा और बैंकिंग कारोबार का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।