विज्ञापन

: लावरोव की दिल्ली यात्रा: रूस ने पश्चिमी देशों को दिया कड़ा संदेश, भारत के साथ मजबूत साझेदारी का ऐलान

- लावरोव की दिल्ली यात्रा: रूस ने पश्चिमी देशों को दिया कड़ा संदेश, भारत के साथ मजबूत साझेदारी का ऐलान
विज्ञापन

आगामी BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक से ठीक पहले रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की भारत यात्रा को लेकर मॉस्को ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया है और इस बयान में न केवल एक कूटनीतिक दौरे की रूपरेखा दी गई है, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति और जियोपॉलिटिकल परिदृश्य को लेकर रूस के व्यापक नजरिए को भी स्पष्ट किया गया है। रूसी विदेश मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव 13 मई को नई दिल्ली पहुंचेंगे, जहां वे भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरे और इससे जुड़े आधिकारिक बयान की भाषा अत्यंत गंभीर है, जिसमें कई महत्वपूर्ण जियोपॉलिटिकल संकेत छिपे हुए हैं जो भविष्य की वैश्विक व्यवस्था की दिशा तय कर सकते हैं।

रूस ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में इस बात पर विशेष बल दिया है कि भारत और रूस के बीच के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध किसी भी प्रकार के जियोपॉलिटिकल उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होते हैं। मॉस्को का यह स्पष्ट संदेश है कि पश्चिमी देशों द्वारा बनाए जा रहे दबाव, लगाए गए कड़े प्रतिबंधों और वर्तमान वैश्विक तनावों के बावजूद दोनों देशों की साझेदारी पूरी तरह से अडिग और कायम है और यूक्रेन संघर्ष के बाद से रूस लगातार पश्चिमी आर्थिक प्रतिबंधों की मार झेल रहा है, और ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भारत उन गिने-चुने बड़े देशों में शामिल रहा है जिसने मॉस्को के साथ न केवल संवाद का रास्ता खुला रखा, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी निरंतर जारी रखा है। यही कारण है कि रूस अब सार्वजनिक मंचों पर भारत को एक अत्यंत विश्वसनीय और अपरिहार्य रणनीतिक साझेदार के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और BRICS का महत्व

रूसी बयान में एक अत्यंत महत्वपूर्ण शब्दावली 'Polycentric World Order' यानी बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का उपयोग किया गया है। इसका सरल अर्थ एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था से है जिसमें शक्ति का केंद्र केवल एक देश या कोई विशेष ब्लॉक न होकर, दुनिया के विभिन्न हिस्सों में विभाजित हो। रूस लंबे समय से अमेरिका केंद्रित एकध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था की आलोचना करता रहा है और वह BRICS जैसे प्रभावशाली मंचों को उसी संतुलन के एक सशक्त विकल्प के रूप में देखता है। चूंकि वर्तमान में BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है, इसलिए मॉस्को भारत को 'ग्लोबल साउथ' और मल्टिपोलर डिप्लोमेसी के एक प्रमुख केंद्र के रूप में देख रहा है।

नव-साम्राज्यवादी दबाव और वित्तीय सुरक्षा

इस आधिकारिक बयान का सबसे तीखा और कड़ा हिस्सा वह था जिसमें 'नव-साम्राज्यवादी फरमान' (Neo-Imperialist Diktat) का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। कूटनीतिक गलियारों में इसे सीधे तौर पर पश्चिमी देशों, विशेषकर संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगियों की नीतियों पर प्रहार माना जा रहा है। रूस का तर्क है कि प्रतिबंधों, वित्तीय दबावों और जियोपॉलिटिकल आइसोलेशन के माध्यम से संप्रभु देशों पर अपनी इच्छा थोपने की कोशिश की जाती है और इसी संदर्भ में, बयान में वित्तीय चैनलों को गैरकानूनी बाहरी दबावों से पूरी तरह सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया है। इसका सीधा जुड़ाव वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों (Alternative Payment Systems), स्थानीय मुद्रा व्यापार (Local Currency Trade) और अमेरिकी डॉलर पर वैश्विक निर्भरता को कम करने के प्रयासों से है। पिछले कुछ वर्षों में भारत और रूस के बीच 'रुपया-रूबल' व्यापार और वैकल्पिक बैंकिंग व्यवस्थाओं पर निरंतर और गहन चर्चा होती रही है।

ऊर्जा सुरक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में सहयोग

रूस के बयान में ऊर्जा सहयोग और स्पेस टेक्नोलॉजी का उल्लेख भी विशेष महत्व रखता है। रूस वर्तमान में भारत के लिए ऊर्जा के सबसे बड़े और प्रमुख भागीदारों में से एक बना हुआ है और यूक्रेन युद्ध के आरंभ होने के बाद से भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद में की गई भारी वृद्धि को लेकर पश्चिमी देशों में लगातार बहस और चर्चा होती रही है। हालांकि, नई दिल्ली ने हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह स्पष्ट किया है कि ऊर्जा सुरक्षा और तेल की खरीद पूरी तरह से उसके राष्ट्रीय हित का विषय है। इसके साथ ही, अंतरिक्ष के क्षेत्र में दोनों देशों का पुराना और गहरा सहयोग भी इस यात्रा के दौरान चर्चा का मुख्य केंद्र रहेगा, जो दोनों देशों के तकनीकी संबंधों की गहराई को दर्शाता है।

भारत का कूटनीतिक संतुलन और वैश्विक समीकरण

सर्गेई लावरोव की यह यात्रा एक ऐसे महत्वपूर्ण समय पर हो रही है जब आने वाले कुछ ही दिनों में दिल्ली में 'क्वॉड' (Quad) देशों की गतिविधियां और अमेरिकी इंगेजमेंट भी बढ़ने की प्रबल संभावना है। यह स्थिति भारत की विदेश नीति की परिपक्वता को दर्शाती है, जहां एक तरफ वह BRICS और रूस के साथ अपनी पारंपरिक और रणनीतिक कूटनीति को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समन्वय को भी प्राथमिकता दे रहा है। भारत इन दोनों अलग-अलग ट्रैक्स पर एक साथ सक्रिय और प्रभावी दिखाई दे रहा है और अंततः, मॉस्को का यह विस्तृत बयान केवल एक यात्रा की औपचारिक घोषणा मात्र नहीं है, बल्कि यह बदलती वैश्विक शक्ति राजनीति के बीच भारत-रूस समीकरणों को एक नए और अधिक सुदृढ़ संदर्भ में स्थापित करने का रूस का एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

विज्ञापन