RBI की स्कीम से रुपये में जबरदस्त उछाल: डॉलर के मुकाबले 47 पैसे की रिकवरी

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RBI की स्कीम से रुपये में जबरदस्त उछाल: डॉलर के मुकाबले 47 पैसे की रिकवरी
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ग्लोबल फॉरेक्स मार्केट और अंतरबैंकिंग विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में भारतीय रुपये ने एक बार फिर अपनी ताकत का अहसास कराया है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा उठाए गए रणनीतिक कदमों और विशेष योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के चलते रुपये में 47 पैसे की जबरदस्त रिकवरी देखी गई है। गुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 94 रुपये 26 पैसे के स्तर पर पहुंच गया। यह उछाल न केवल घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि विदेशी निवेशकों के बढ़ते भरोसे का भी प्रतीक है। पिछले महीने के दौरान रुपया दुनिया की दूसरी सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली करेंसी बनकर उभरा है, जो आरबीआई की प्रभावी नीतियों का परिणाम है।

आरबीआई की एफसीएनआर (बी) स्कीम का कमाल

रुपये में आई इस तूफानी तेजी का सबसे बड़ा श्रेय भारतीय रिजर्व बैंक की एफसीएनआर (बी) यानी विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) योजना को जाता है। इस विशेष कार्यक्रम के तहत भारत ने उम्मीद से कहीं अधिक सफलता हासिल करते हुए 127 पॉइंट 23 बिलियन अमेरिकी डॉलर की रिकॉर्ड राशि जुटाई है। अगर हम इसमें विदेशी विदेशी मुद्रा उधार और बाह्य वाणिज्यिक उधार को भी शामिल कर लें, तो 31 अगस्त तक कुल पूंजी प्रवाह 136 पॉइंट 377 बिलियन अमेरिकी डॉलर के प्रभावशाली स्तर पर पहुंच गया है। इतनी बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा के आने से आरबीआई को बाजार में रुपये की स्थिति को संभालने और डॉलर की मांग को संतुलित करने में बड़ी मदद मिली है और विदेशी मुद्रा व्यापारियों का मानना है कि रुपये की यह चाल मजबूत अंतर्निहित प्रवाह और आरबीआई के आक्रामक हस्तक्षेप को दर्शाती है, जिसने कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के नकारात्मक प्रभाव को भी कम कर दिया है।

बाजार के आंकड़े और वैश्विक प्रभाव

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की शुरुआत 94 रुपये 30 पैसे पर हुई थी, लेकिन जल्द ही इसने और मजबूती हासिल की और 94 रुपये 26 पैसे के स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले बंद भाव 94 रुपये 73 पैसे के मुकाबले 47 पैसे की बड़ी बढ़त है। बुधवार को भी रुपये में 22 पैसे की तेजी देखी गई थी। दूसरी ओर, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 99 पॉइंट 43 पर कारोबार कर रहा था। इसमें 0 पॉइंट 16 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी स्थिरता देखी गई है और ब्रेंट क्रूड वायदा 0 पॉइंट 16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 95 डॉलर 48 सेंट प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल प्रवाह बाधित होने की आशंकाओं के बीच एक महत्वपूर्ण बदलाव है।

शेयर बाजार और विदेशी निवेश का सहारा

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की सक्रियता ने भी रुपये को सहारा दिया है। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 221 पॉइंट 17 अंक चढ़कर 76,791 पॉइंट 52 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 59 पॉइंट 55 अंक की बढ़त के साथ 23,974 के स्तर पर देखा गया। एक्सचेंज डेटा के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को शुद्ध आधार पर 6,688 करोड़ 37 लाख रुपये की इक्विटी खरीदी। आईएफए ग्लोबल की एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई द्वारा जुटाई गई यह भारी पूंजी उसे रुपये की रक्षा करने के लिए एक लंबी रस्सी प्रदान करती है। हालांकि, इससे बैंकिंग प्रणाली में तरलता अधिशेष लगभग 10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है, क्योंकि बैंक आरबीआई के साथ जमा की अदला-बदली करेंगे।

भविष्य की राह और आर्थिक स्थिरता

आरबीआई द्वारा 136 पॉइंट 377 बिलियन अमेरिकी डॉलर का कुल प्रवाह सुनिश्चित करना देश की वित्तीय स्थिरता के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। 31 अगस्त तक एफसीएनआर (बी) जमा में 127 पॉइंट 226 बिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रवाह दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी रुपये की रफ्तार सकारात्मक बनी रह सकती है, बशर्ते वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहें। रुपये में आई यह 47 पैसे की रिकवरी आयातकों के लिए राहत की खबर है और यह भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति वैश्विक निवेशकों के सकारात्मक दृष्टिकोण को पुख्ता करती है। आरबीआई की इन योजनाओं ने न केवल विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती दी है, बल्कि बाजार में रुपये की साख को भी बढ़ाया है।

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