टाटा शेयर ट्रांसफर मामला: चैरिटी कमिश्नर ने 33 साल पुराने विवाद में दी क्लीन चिट

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टाटा शेयर ट्रांसफर मामला: चैरिटी कमिश्नर ने 33 साल पुराने विवाद में दी क्लीन चिट
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महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए टाटा समूह से जुड़े 33 साल पुराने एक विवाद को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। यह मामला वर्ष 1989 में नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट (NRTT) से नवल एच टाटा को टाटा सन्स के 833 शेयरों के ट्रांसफर से संबंधित था। चैरिटी कमिश्नर ने अपनी विस्तृत जांच के बाद इस शेयर ट्रांसफर को पूरी तरह से क्लीन चिट दे दी है और जांच को बंद करने का आदेश जारी किया है। जांच के निष्कर्षों में यह स्पष्ट रूप से पाया गया कि उस समय किया गया यह शेयर ट्रांसफर तत्कालीन कानूनों और नियमों के पूर्णतः अनुरूप था। इस फैसले के साथ ही तीन दशकों से अधिक समय से चले आ रहे इस विवाद का एक बहुत बड़ा हिस्सा अब कानूनी रूप से सुलझ गया है।

विवाद की पृष्ठभूमि और हालिया घटनाक्रम

यह मामला पिछले कुछ महीनों के दौरान एक बार फिर से सुर्खियों में आया था। टाटा समूह से जुड़े विभिन्न ट्रस्टों के बीच नियंत्रण और प्रबंधन को लेकर चल रही आंतरिक खींचतान के दौरान वर्ष 1989 के इस पुराने शेयर ट्रांसफर के मुद्दे को फिर से उठाया गया था। शिकायतकर्ताओं का मुख्य तर्क यह था कि इन 833 शेयरों का लाभ आगे चलकर नोएल टाटा को प्राप्त हुआ था। इस आधार पर शिकायतकर्ताओं ने यह आरोप लगाया था कि इस पूरे सौदे में हितों के टकराव की स्थिति बन सकती है और हालांकि, महाराष्ट्र के स्टेट चैरिटी कमिश्नर अमोघ एस कलोती ने 2 सितंबर को दिए गए अपने महत्वपूर्ण आदेश में इन सभी आशंकाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शेयरों की इस बिक्री के पीछे ठोस और वैध कारण मौजूद थे। ट्रस्ट के पास इस सौदे से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध थे और शेयरों की कीमत का निर्धारण भी एक निर्धारित और पारदर्शी प्रक्रिया के आधार पर किया गया था।

मुख्य कारण: टैक्स अनुपालन और वित्तीय सुरक्षा

जांच में यह बात सामने आई कि असल में क्या हुआ था। NRTT के पास टाटा सन्स के शेयर थे और वर्ष 1984 से ही ट्रस्ट इन शेयरों को बेचने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा था। इसकी सबसे बड़ी वजह इनकम टैक्स एक्ट यानी आयकर कानून में होने वाले बदलाव थे। आयकर नियमों में बदलाव के बाद कुछ ऐसे निवेश, जो निर्धारित कैटेगरी में नहीं आते थे, उन्हें रखने वाले चैरिटेबल ट्रस्ट्स को मिलने वाली टैक्स छूट का नुकसान होने का खतरा था। नवंबर 1988 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (CBDT) ने NRTT को नेशनल ट्रस्ट के तौर पर मान्यता देने से भी इनकार कर दिया था। इसके बाद ट्रस्ट पर टैक्स का भारी बोझ बढ़ने की पूरी संभावना बन गई थी।

चैरिटी कमिश्नर के आदेश के अनुसार, वर्ष 1986-87 से 1988-89 के बीच ट्रस्ट पर करीब 4 लाख 23 हजार रुपये की संभावित टैक्स देनदारी बन रही थी। ऐसी स्थिति में ट्रस्ट ने टाटा सन्स के शेयर बेचने का निर्णय लिया ताकि टैक्स के इस भारी बोझ को कम किया जा सके और ट्रस्ट की संपत्ति को सुरक्षित रखा जा सके। यह कदम ट्रस्ट के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए उठाया गया था।

नवल टाटा की भूमिका और कानूनी प्रक्रिया

इस पूरे मामले में नवल टाटा की भूमिका की भी गहन जांच की गई। नवल टाटा पहले NRTT के ट्रस्टी के रूप में कार्यरत थे, लेकिन उन्होंने 1 जनवरी 1988 से ही ट्रस्टी के पद से अपना इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे की जानकारी संबंधित अधिकारियों को समय पर दे दी गई थी और फरवरी 1990 में इसे आधिकारिक तौर पर स्वीकार भी कर लिया गया था। इस प्रस्तावित शेयर खरीद की कानूनी वैधता सुनिश्चित करने के लिए मशहूर वकील नानी ए पालकीवाला से कानूनी राय ली गई थी। दिसंबर 1988 में दी गई अपनी राय में पालकीवाला ने स्पष्ट किया था कि चूंकि नवल टाटा अब ट्रस्ट के ट्रस्टी नहीं थे, इसलिए उनकी ओर से शेयर खरीदने पर कोई कानूनी रोक नहीं थी। उन्होंने यह भी सलाह दी थी कि इस्तीफे के कम से कम एक साल बाद ही शेयरों की बिक्री की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह शर्त रखने का सुझाव भी दिया था जिससे ये शेयर टाटा परिवार के दायरे से बाहर न जाएं।

वित्तीय आंकड़े और बोर्ड की मंजूरी

इसके बाद 833 शेयरों की कीमत 1 हजार 914 रुपये प्रति शेयर तय की गई थी। नवल टाटा ने इसी निर्धारित कीमत पर शेयर खरीदने की अपनी सहमति दी थी। यह पूरी डील 18 जनवरी 1989 को पूरी हुई थी। आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, इस पूरे सौदे की कुल रकम करीब 15 लाख 94 हजार रुपये थी। इस बिक्री से ट्रस्ट को लगभग 8 लाख 15 हजार रुपये का मुनाफा भी हुआ था। चैरिटी कमिश्नर ने अपने फैसले में यह भी माना कि शेयर ट्रांसफर के लिए सभी जरूरी दस्तावेज रिकॉर्ड पर मौजूद थे और टाटा सन्स के बोर्ड ने भी इस पूरे ट्रांजैक्शन को अपनी मंजूरी दी थी और इस प्रकार, यह सौदा पूरी तरह से पारदर्शी और कानूनी था।

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