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बसंत पंचमी पर रींगस श्याम मंदिर के कपाट बंद, उमड़ा भक्तों का सैलाब

बसंत पंचमी पर रींगस श्याम मंदिर के कपाट बंद, उमड़ा भक्तों का सैलाब
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राजस्थान के सीकर जिले के रींगस में शुक्रवार सुबह बसंत पंचमी के पावन पर्व पर बाबा श्याम के दर्शन करने आए श्रद्धालुओं के लिए स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई और रींगस श्याम मंदिर में उमड़ी भक्तों की अभूतपूर्व भीड़ के आगे प्रशासन और मंदिर कमेटी के तमाम इंतजाम ताश के पत्तों की तरह ढह गए। हालात इस कदर बेकाबू हो गए कि मंदिर प्रशासन को सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए आनन-फानन में मंदिर के पट (कपाट) बंद करने पड़े और इस फैसले के बाद वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं का गुस्सा फूट पड़ा और माहौल गरमा गया।

मंदिर कमेटी की लापरवाही पर उठे सवाल

भक्तों की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण मंदिर कमेटी का कुप्रबंधन बताया जा रहा है। ग्राउंड जीरो पर मौजूद चश्मदीदों के अनुसार, मंदिर के प्रवेश द्वारों पर अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है और देर रात से कतारों में लगे भक्त अब पुलिस और प्रशासन के सामने अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। पुलिस बल मौके पर पहुंचकर भीड़ को नियंत्रित करने और लोगों को शांत करने की। कोशिश कर रहा है, लेकिन कपाट बंद होने से भक्तों का धैर्य जवाब दे रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि जब इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद थी, तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए?

सोशल मीडिया रील का दिखा घातक असर

इस हंगामे के पीछे सोशल मीडिया का भी बड़ा हाथ बताया जा रहा है। एक पीड़ित भक्त ने बताया कि वे इंस्टाग्राम पर मंदिर कमेटी के एक पदाधिकारी की रील देखकर यहां आए थे। उस रील में बसंत पंचमी पर विशेष दर्शन की अपील की गई थी। भक्त ने कहा, 'हम सुबह 6 बजे ट्रेन से पहुंचे थे, लेकिन घंटों बीत जाने के बाद भी गेट बंद हैं। प्रशासन की यह भारी चूक है, भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है लेकिन हमारी सुनने वाला कोई नहीं है। ' यह घटना दर्शाती है कि कैसे बिना तैयारी के सोशल मीडिया पर किए गए प्रचार से स्थितियां जानलेवा हो सकती हैं।

मुंबई से आए भक्तों का फूटा गुस्सा

अव्यवस्था का शिकार केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु भी हुए हैं और मुंबई से आए एक भक्त ने अपना दुख साझा करते हुए बताया कि वह सुबह 4 बजे से लाइन में लगे हैं, लेकिन मंदिर परिसर में लाइन मैनेजमेंट जैसी कोई व्यवस्था नजर नहीं आ रही है। भक्तों का आरोप है कि कपाट बंद होने की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी, जिसके कारण बुजुर्ग और बच्चे घंटों तक कड़ाके की ठंड और उमड़ती भीड़ के बीच फंसे रहे।

'पीतांबरी' के वितरण की अफवाह ने बिगाड़ा खेल

इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ बाबा श्याम का वह पवित्र पीला वस्त्र है, जिसे 'पीतांबरी' या 'बागा' कहा जाता है। परंपरा के अनुसार, बसंत पंचमी पर बाबा का यह वस्त्र बदला जाता है। भक्तों में इस वस्त्र का एक छोटा सा टुकड़ा पाने की जबरदस्त होड़ रहती है। खाटू श्याम मंदिर कमेटी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे वस्त्र वितरण नहीं करेंगे, लेकिन इसके विपरीत रींगस श्याम मंदिर कमेटी ने सोशल मीडिया पर इसका भारी प्रचार किया। इसी 'पीतांबरी' के लालच में लाखों की संख्या में भक्त रींगस पहुंच गए, जिससे स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई

मामले के तूल पकड़ने के बाद रींगस SDM बृजेश गुप्ता ने मोर्चा संभाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यवस्था को किसी भी कीमत पर बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। मंदिर कमेटी ने सफाई दी है कि अचानक हुई तेज बारिश के कारण भक्त सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई थी। सुरक्षा को देखते हुए ही कुछ समय के लिए पट बंद किए गए थे। फिलहाल, भारी पुलिस जाब्ता तैनात है और स्थिति को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिश की जा रही है।

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