रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में 17 फीसदी की गिरावट, 3 लाख 63 हजार करोड़ की वैल्यूएशन साफ

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रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में 17 फीसदी की गिरावट, 3 लाख 63 हजार करोड़ की वैल्यूएशन साफ
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भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े कॉरपोरेट दिग्गज रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के शेयरों में मौजूदा साल में 17 फीसदी तक की बड़ी गिरावट देखने को मिली है। यह गिरावट तब आई है जब कंपनी का मुख्य तेल-से-रसायन (O2C) व्यवसाय मजबूत सिंगापुर जीआरएम (Gross Refining Margins) और रिफाइनिंग मार्जिन में उछाल के दम पर शानदार प्रदर्शन कर रहा है। बाजार विश्लेषकों और वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों जैसे जेफरीज और जेपी मॉर्गन का मानना है कि दलाल स्ट्रीट फिलहाल रिलायंस रिटेल की सुस्त रफ्तार और न्यू एनर्जी सेगमेंट पर पूंजीगत खर्च (Capex) को लेकर चिंतित है। इस वजह से रिलायंस की वैल्यूएशन में भी 363145 रुपये 67 पैसे की भारी गिरावट देखने को मिल चुकी है।

शेयरों की कीमत और वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट

अगर बात कंपनी के शेयरों की करें तो मौजूदा साल में 3 अगस्त तक कंपनी के शेयरों में 17 फीसदी की गिरावट देखने को मिल चुकी है। पिछले साल के आखिरी कारोबारी दिन कंपनी का शेयर 1569 रुपये 40 पैसे पर बंद हुआ था जो 3 अगस्त को 1301 रुपये 5 पैसे पर आ गया। इसका मतलब है कि कंपनी के शेयरों में 17 फीसदी की गिरावट आई है। अगर 4 अगस्त की बात करें तो बीएसई पर कंपनी के शेयरों में 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखी गई और शेयर 1332 रुपये 90 पैसे तक पहुंचा। इस तेजी के बाद भी मौजूदा साल में कुल गिरावट 15 फीसदी के करीब है। वैल्यूएशन के मोर्चे पर पिछले साल के आखिरी दिन कंपनी की वैल्यू 2123796 रुपये 62 पैसे थी जो 3 अगस्त को घटकर 1760650 रुपये 95 पैसे रह गई। इस तरह कंपनी को कुल 363145 रुपये 67 पैसे का नुकसान हुआ है।

रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल में शानदार प्रदर्शन

रिलायंस के ऑयल-टू-केमिकल्स बिजनेस के लिए कामकाज का माहौल काफी बेहतर हुआ है। जेफरीज का अनुमान है कि वैश्विक टकराव की वजह से ग्लोबल रिफाइनरी थ्रूपुट का लगभग 4 फीसदी हिस्सा कम हो गया है। मिडिल ईस्ट में रिफाइनरी का कामकाज रोजाना लगभग 25 लाख बैरल कम हुआ है जबकि पिछले साल रूस में भी इसमें रोजाना 15 लाख बैरल की कमी आई है। इस रुकावट के कारण डीजल और गैसोलीन का स्टॉक पिछले 5 सालों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में अब तक सिंगापुर का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन औसतन 21 डॉलर 20 सेंट प्रति बैरल रहा है जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह 7 डॉलर 50 सेंट प्रति बैरल था। पेट्रोकेमिकल स्प्रेड भी मजबूत हुए हैं और रिलायंस के पॉलीइथिलीन, पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट मार्जिन में औसतन 64 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जेफरीज ने इसके लिए बाय रेटिंग और 1710 रुपये का प्राइस टारगेट बनाए रखा है।

बाजार की चिंता और ब्रोकरेज की राय

जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के अनुसार मार्केट O2C से होने वाली तुरंत कमाई से आगे की चीजों पर ध्यान दे रहा है। शेयर से और रिटर्न पाने के लिए या तो रिफाइनिंग मार्जिन में और मजबूती चाहिए या रिलायंस रिटेल के लिए ज्यादा वैल्यूएशन की जरूरत है। जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि मौजूदा शेयर की कीमत O2C बिजनेस के लिए EBITDA का 7 पॉइंट 5 गुना वैल्यूएशन दिखाती है। यह रिलायंस के प्रस्तावित रिन्यूएबल्स वेंचर, रियल एस्टेट होल्डिंग्स या तेजी से बढ़ रहे FMCG रेवेन्यू को कोई वैल्यू नहीं देता है। जेपी मॉर्गन की रेटिंग ओवरवेट है और सितंबर 2027 के लिए प्राइस टारगेट 1625 रुपये है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर रिटेल सेक्टर में मजबूती नहीं आती है तो वैल्यूएशन 1100 रुपये या 1210 रुपये तक गिर सकता है।

रिटेल और न्यू एनर्जी सेक्टर का प्रभाव

वैल्यूएशन में रिलायंस रिटेल सबसे अहम फैक्टर है। जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि इस बिजनेस की वैल्यू वित्त वर्ष 2028 के ब्लेंडेड EBITDA का लगभग 26 गुना है जो डीमार्ट के लगभग 34 गुना से कम है। अगर रिलायंस रिटेल अपनी ग्रोथ बढ़ाती है तो इसमें आगे बढ़ने की गुंजाइश है। वहीं न्यू एनर्जी बिजनेस को लेकर मार्केट अभी सावधानी बरत रहा है। कंपनी को मार्च 2027 तक बड़े पैमाने पर सोलर-सेल और बैटरी-पैकिंग लाइनें शुरू करने की उम्मीद है। जेपी मॉर्गन ने न्यू एनर्जी बिजनेस की मौजूदा वैल्यू लगभग 160 रुपये प्रति शेयर आंकी थी यह मानते हुए कि रिलायंस अगले चार वर्षों में लगभग 70 गीगावाट मॉड्यूल लगाएगी। जेफरीज के अनुसार कंपनी तीन वर्षों में रिन्यूएबल प्रोडक्शन चेन में 10 अरब डॉलर का निवेश करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

फ्री कैश फ्लो और भविष्य की राह

रिलायंस पिछले तीन वर्षों से काफी हद तक नेगेटिव फ्री कैश फ्लो के साथ काम कर रही है क्योंकि उसने रिटेल, नई एनर्जी और पेट्रोकेमिकल क्षमता में भारी निवेश किया है। जेपी मॉर्गन को उम्मीद है कि इसमें बदलाव आएगा क्योंकि कंपनी का EBITDA रन रेट सालाना 20 अरब डॉलर के करीब पहुंच रहा है। नेट डेट-टू-EBITDA को एक गुना से कम रखने का रिलायंस का गाइडेंस भी बेहतर कैश जेनरेशन की ओर इशारा करता है। जब तक रिटेल और न्यू एनर्जी बिजनेस अच्छा प्रदर्शन नहीं करते तब तक मजबूत O2C मार्जिन रिलायंस की कमाई को सहारा तो दे सकते हैं लेकिन स्टॉक की रेटिंग में बड़े बदलाव के लिए ये काफी नहीं होंगे। बाजार फिलहाल निवेश के इस चक्र के सकारात्मक परिणामों का इंतजार कर रहा है।

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