रिलायंस जियो के आईपीओ का इंतजार अब खत्म होने वाला है और भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ जल्द ही दस्तक देने वाला है। यह आईपीओ करीब 37,700 करोड़ रुपये का होगा। इसे लेकर निवेशकों के बीच काफी उत्साह देखा जा रहा है। ब्लूमबर्ग की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक जियो प्लेटफॉर्म्स के इस आईपीओ का प्राइस बैंड 1,065 रुपये से लेकर 1,119 रुपये प्रति शेयर के बीच तय किया जा सकता है। इस मेगा इश्यू से जुड़ी सबसे दिलचस्प बात यह है कि ज्यादातर लोगों को लगता है कि जियो पर पूरी तरह से मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का हक है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं।
रिलायंस के पास नहीं है पूरा मालिकाना हक
दस्तावेजों के मुताबिक रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स की 100 फीसदी हिस्सेदार नहीं है। इसमें कई दिग्गज ग्लोबल कंपनियों का पैसा लगा हुआ है। जियो प्लेटफॉर्म्स को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का हिस्सा माना जाता है और यह सच है कि कंपनी की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रिलायंस के ही पास है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक जियो प्लेटफॉर्म्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज की कुल हिस्सेदारी 66 दशमलव 43 प्रतिशत है। बाकी का हिस्सा विदेशी निवेशकों, टेक कंपनियों और सॉवरेन वेल्थ फंड्स के पास है। कंपनी के कुल 105 शेयरधारक हैं। इन शेयरधारकों में दुनिया की कुछ सबसे बड़ी टेक कंपनियां शामिल हैं जिन्होंने जियो के डिजिटल विजन पर भरोसा जताया है।
इन दिग्गज कंपनियों ने किया है भारी निवेश
जियो के टॉप 10 शेयरधारकों की लिस्ट में रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद दूसरी सबसे बड़ी हिस्सेदारी मेटा से जुड़ी कंपनी जादू होल्डिंग्स एलएलसी की है। जादू होल्डिंग्स के पास जियो की 9 दशमलव 98 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके ठीक बाद टेक दिग्गज गूगल का नाम आता है। गूगल इंटरनेशनल एलएलसी ने जियो प्लेटफॉर्म्स में 7 दशमलव 73 प्रतिशत की मजबूत हिस्सेदारी ले रखी है। इसके अलावा मध्य पूर्व के देशों के सॉवरेन वेल्थ फंड्स ने भी भारत की इस डिजिटल क्रांति में पैसा लगाया है। सऊदी अरब के द पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड यानी पीआईएफ के पास जियो की 2 दशमलव 31 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
वैश्विक निवेशकों का मजबूत समर्थन
निवेशकों की सूची में ओमीक्रॉन एशिया होल्डिंग्स (जो केकेआर से जुड़ी है) ने भी 2 दशमलव 31 प्रतिशत शेयर अपने पास रखे हैं। विस्टा इक्विटी पार्टनर्स से जुड़ी कंपनी वीईपीएफ VII एआईवी I लिमिटेड की भी जियो में 2 दशमलव 31 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सिल्वर लेक से जुड़ी कंपनी एसएलपी रेडवुड होल्डिंग्स के पास 1 दशमलव 88 प्रतिशत शेयर हैं। मुबाडाला इन्वेस्टमेंट कंपनी की सब्सिडियरी एमआईसी रेडवुड के पास 1 दशमलव 85 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूद है। जनरल अटलांटिक सिंगापुर के पास 1 दशमलव 34 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वहीं अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी की कंपनी प्लैटिनम जैस्मीन ए 2018 ट्रस्ट ने भी 1 दशमलव 16 प्रतिशत हिस्सेदारी ले रखी है।
बिना ओएफएस के आएगा ये मेगा इश्यू
इस आईपीओ का साइज अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है। कंपनी बाजार से 3 दशमलव 8 बिलियन से 4 बिलियन डॉलर जुटाने की तैयारी में है। 37,700 करोड़ रुपये का यह आंकड़ा भारतीय शेयर बाजार के लिए बहुत बड़ा है। इस मेगा इश्यू के तहत 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। ये शेयर इश्यू के बाद की इक्विटी का करीब 2 दशमलव 9 प्रतिशत हिस्सा होंगे। इस आईपीओ की सबसे खास बात यह है कि इसमें कोई भी ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस नहीं होगा। इसका मतलब है कि कोई भी मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रहा है, जो कंपनी के भविष्य पर उनके भरोसे को दर्शाता है।
शेयर बाजार में लिस्टिंग की समयसीमा
निवेशकों के लिए इस आईपीओ में पैसा लगाने की तारीखें भी सामने आ गई हैं। कंपनी ने विदेशी निवेशकों के लिए रोडशो पूरे कर लिए हैं। 12 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले हफ्ते में कंपनी मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास अपने फाइनल पेपर जमा कर सकती है। एंकर निवेशकों के लिए यह इश्यू 19 अक्टूबर 2026 को खुल सकता है। आम निवेशकों के लिए सब्सक्रिप्शन की तारीख 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2026 तक रखी जा सकती है। 1,065 रुपये से 1,119 रुपये के प्राइस बैंड को देखते हुए रिटेल निवेशकों को इसमें निवेश करने के लिए अपनी खास रणनीति बनानी होगी।