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तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी का बयान: बीजेपी के लिए ओवैसी ही भगवान।

तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी का बयान: बीजेपी के लिए ओवैसी ही भगवान।
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तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला करते हुए एक बड़ा राजनीतिक दावा किया है। सोमवार 9-02-2026 को हैदराबाद में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा के लिए असदुद्दीन ओवैसी ही असली 'भगवान' हैं और पार्टी भगवान राम का नाम केवल दिखावे के लिए लेती है। रेड्डी ने भाजपा की राजनीतिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे 'सोच की गरीबी' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा चुनावी लाभ के लिए ओवैसी को एक 'भूत' की तरह पेश करती है ताकि वोटों का ध्रुवीकरण किया जा सके।

भाजपा की 'लाइफ लाइन' पर मुख्यमंत्री का प्रहार

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अपने संबोधन में भाजपा और एआईएमआईएम के बीच एक गुप्त राजनीतिक तालमेल होने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा के इतिहास का विश्लेषण किया जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि उनके लिए केवल एक ही भगवान हैं और वह असदुद्दीन ओवैसी हैं। रेड्डी ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा नेता हर दिन ओवैसी के सामने सिर झुकाते हैं और उन्हें अपनी 'लाइफ लाइन' मानते हैं। उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि भाजपा नेता कितनी बार भगवान राम का नाम लेते हैं और कितनी बार ओवैसी का। मुख्यमंत्री के अनुसार, भाजपा ओवैसी को 'अलादीन का जादुई चिराग' बनाकर वोट मांगने का काम करती है।

प्रशासनिक नियंत्रण और राजनीतिक विरोधाभास

रेवंत रेड्डी ने केंद्र सरकार की नीतियों और उनके दावों के बीच के विरोधाभास पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि भाजपा असदुद्दीन ओवैसी को इतना बड़ा 'विलेन' मानती है, तो उनकी सरकार उन्हें नियंत्रित क्यों नहीं करती? उन्होंने तर्क दिया कि लोकतंत्र में एआईएमआईएम एक राजनीतिक दल है जो गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में चुनाव लड़ती है। रेड्डी ने कहा कि किसी राजनीतिक दल को केवल धार्मिक नफरत भड़काने के लिए 'शैतान' बताना और उसके जरिए राजनीतिक रूप से जीवित रहने की कोशिश करना लोकतंत्र के लिए स्वस्थ संकेत नहीं है। उन्होंने तेलंगाना की जनता से अपील की कि वे इस तरह की राजनीति को पहचानें और भाजपा के दावों पर विचार करें।

कांग्रेस और एआईएमआईएम के बदलते समीकरण

तेलंगाना की राजनीति में 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद से बड़े बदलाव देखे गए हैं। चुनाव के दौरान रेवंत रेड्डी और असदुद्दीन ओवैसी के बीच तीखी बयानबाजी होती थी, लेकिन कांग्रेस की सरकार बनने के बाद संबंधों में व्यावहारिक बदलाव आया है। मुख्यमंत्री रेड्डी ने हाल के महीनों में हैदराबाद के विकास और पुराने शहर की बुनियादी सुविधाओं के मुद्दों पर एआईएमआईएम के साथ सहयोग की बात कही है। हालांकि दोनों दलों के बीच कोई औपचारिक गठबंधन नहीं है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर बढ़ता समन्वय राज्य की राजनीति में एक नई दिशा का संकेत दे रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, रेवंत रेड्डी का यह ताजा बयान भाजपा के ध्रुवीकरण के एजेंडे को कुंद करने की एक रणनीतिक कोशिश हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का दृष्टिकोण

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, रेवंत रेड्डी का यह बयान तेलंगाना में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से दिया गया है। भाजपा अक्सर कांग्रेस पर तुष्टीकरण का आरोप लगाती रही है, जिसके जवाब में रेड्डी ने अब भाजपा पर ही ओवैसी के सहारे राजनीति करने का पलटवार किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयानों से कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि भाजपा और एआईएमआईएम एक-दूसरे के पूरक के रूप में काम करते हैं ताकि धर्मनिरपेक्ष वोटों का बंटवारा हो सके। यह राजनीतिक विमर्श आने वाले समय में तेलंगाना के चुनावी परिदृश्य को और अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकता है।

निष्कर्ष और भविष्य की दिशा

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के इन आरोपों ने तेलंगाना में एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है और भाजपा ने फिलहाल इन दावों को निराधार बताया है, लेकिन रेड्डी के कड़े रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस राज्य में भाजपा के आक्रामक हिंदुत्व कार्ड का मुकाबला करने के लिए तैयार है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा इन आरोपों का किस प्रकार जवाब देती है और क्या एआईएमआईएम अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को लेकर कोई नया रुख अपनाती है। फिलहाल, तेलंगाना की राजनीति में 'ओवैसी फैक्टर' एक बार फिर केंद्र बिंदु बन गया है, जिससे राज्य के राजनीतिक समीकरणों में जटिलता बढ़ गई है।

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