पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है क्योंकि तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा आंतरिक विवाद अब पार्टी की स्पष्ट टूट की ओर बढ़ गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नए गुट की ओर से नेता प्रतिपक्ष बने ऋतब्रत बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर बेहद तीखा हमला बोला है। ऋतब्रत बनर्जी का कहना है कि अभिषेक बनर्जी का अब न तो जनता से कोई सरोकार रह गया है और न ही पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ उनका कोई वास्तविक संबंध बचा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभिषेक बनर्जी की भूमिका अब पार्टी और जनता के बीच पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है।
अभिषेक बनर्जी की अनुपस्थिति पर उठाए सवाल
ऋतब्रत बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उनका जनता के साथ कोई वास्तविक जुड़ाव होता, तो वे 26 दिनों तक सार्वजनिक रूप से गायब नहीं रहते। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक सच्चा नेता वही होता है जो मुश्किल समय में लोगों के बीच रहे, न कि वह जो हफ्तों तक जनता की नजरों से ओझल हो जाए। ऋतब्रत ने आगे कहा कि अभिषेक बनर्जी का पार्टी से अब कोई वास्तविक संबंध नहीं रह गया है और उनके गायब रहने से यह साबित होता है कि वे जनता का सामना करने की स्थिति में नहीं हैं।
सुरक्षा को लेकर तीखा कटाक्ष
अभिषेक बनर्जी पर हमला जारी रखते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने उनके सुरक्षा संबंधी दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जैसे चोरों को पीटा जाता है, वैसे ही उन्हें पीटा गया। ऋतब्रत ने याद दिलाया कि अभिषेक बनर्जी ने पहले कहा था कि आवाम उनकी रक्षा करेगी, लेकिन चोरों की तरह पिटाई खाने के बाद उन्होंने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा बढ़ाने की मांग की और उन्होंने कहा कि उनके गुट का कोई भी नेता न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार से सुरक्षा की मांग कर रहा है, जबकि अभिषेक बनर्जी विरोधाभासी व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अब अभिषेक बनर्जी को लेकर और चर्चा नहीं करना चाहते।
ममता बनर्जी के प्रति सम्मान और मुख्य सलाहकार की मांग
अभिषेक बनर्जी की आलोचना के बीच ऋतब्रत बनर्जी ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने ममता बनर्जी को एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी नेत्री बताया। ऋतब्रत ने मांग की कि ममता बनर्जी पार्टी की मुख्य सलाहकार के रूप में बनी रहें और अपने लंबे राजनीतिक अनुभव से संगठन का मार्गदर्शन करती रहें और उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी का नेतृत्व पार्टी के लिए आवश्यक है, लेकिन अभिषेक बनर्जी की कार्यप्रणाली अब स्वीकार्य नहीं है।
विधायक दल में बहुमत का दावा
विधायक दल के नेतृत्व को लेकर ऋतब्रत बनर्जी ने एक बड़ा संवैधानिक दावा पेश किया है। उन्होंने कहा कि 18वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस का दो-तिहाई से अधिक विधायक दल 'मैं' के बजाय 'हम' की भावना में विश्वास करता है। उन्होंने जानकारी दी कि तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर कुल 80 विधायक चुने गए थे। ऋतब्रत के अनुसार, इन 80 विधायकों में से दो-तिहाई से अधिक ने उनके पक्ष में अपना समर्थन दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी संवैधानिक और विधायी नियमों का पालन करने के बाद ही उनके समूह को विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के रूप में मान्यता मिली है।
भाजपा का तृणमूल कांग्रेस पर प्रहार
तृणमूल कांग्रेस के इस आंतरिक संकट पर भारतीय जनता पार्टी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेता इंद्रनील खान ने ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता बनाए जाने का समर्थन करते हुए टीएमसी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब टीएमसी सत्ता में थी, तब युवाओं की नौकरियां छीनी गईं और गरीबों के राशन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया। खान ने आरोप लगाया कि टीएमसी की राजनीति केवल घोटालों पर आधारित रही है और उसके पास कोई स्पष्ट नीति या विचारधारा नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता ने चुनाव में बदलाव लाकर भय की राजनीति को खत्म किया है।