राजस्थान सरकार ने मानसून, खरीफ सीजन और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में कई बड़े और महत्वपूर्ण फैसले किए हैं। सरकार ने यह तय किया है कि राज्य में लगातार हो रही बारिश और संभावित आपदा की स्थिति को देखते हुए सभी प्रभारी मंत्री अपने-अपने जिलों का अनिवार्य रूप से दौरा करेंगे। इन दौरों का मुख्य उद्देश्य मौके पर जाकर व्यवस्थाओं की समीक्षा करना और स्थानीय प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश देना है। बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और मंत्री राज्यवर्द्धन राठौड़ ने इन महत्वपूर्ण निर्णयों की विस्तृत जानकारी साझा की।
मानसून और आपदा प्रबंधन के लिए मंत्रियों के दौरे
कैबिनेट बैठक में मानसून की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार ने निर्णय लिया है कि सभी प्रभारी मंत्री अपने आवंटित जिलों में जाकर बिजली, पेयजल, सड़क, चिकित्सा और आपदा प्रबंधन से जुड़ी तमाम व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे और मंत्रियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि भारी बारिश के कारण आम जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी जरूरी सरकारी सेवाएं बिना किसी रुकावट के निरंतर चलती रहें। जरूरत पड़ने पर प्रभारी मंत्री स्थानीय प्रशासन को तत्काल प्रभाव से निर्देश भी जारी कर सकेंगे ताकि राहत कार्यों में तेजी लाई जा सके।
किसानों के लिए खाद और बीज की उपलब्धता
बैठक के दौरान खरीफ की फसलों को लेकर भी विशेष रणनीति तैयार की गई। सरकार ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में उर्वरक, प्रमाणित बीज और अन्य आवश्यक कृषि सामग्री उपलब्ध कराई जाए। प्रभारी मंत्री अपने जिला दौरों के दौरान इन कृषि व्यवस्थाओं की भी गहन समीक्षा करेंगे। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खेती-किसानी से जुड़ी गतिविधियों में किसी भी तरह की रुकावट न आए और किसानों को समय पर सभी संसाधन सुलभ हो सकें।
'वन स्टेट, वन इलेक्शन' की दिशा में कदम
कैबिनेट ने भविष्य में पंचायतीराज संस्थाओं और नगरीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने का एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है और सरकार का तर्क है कि बार-बार चुनाव होने से न केवल विकास कार्य प्रभावित होते हैं, बल्कि प्रशासनिक संसाधनों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है। एक साथ चुनाव कराने से पूरी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और सरकारी खर्च में भी बड़ी कमी आएगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से विकास कार्यों की रफ्तार बनी रहेगी और प्रशासनिक दक्षता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। यह निर्णय राज्य में चुनावी सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
मनरेगा में 125 दिन का रोजगार और बीमा सुरक्षा
रोजगार गारंटी को लेकर भी कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में मनरेगा के तहत रोजगार की गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर अब 125 दिन करने का निर्णय लिया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को अधिक दिनों का काम मिलेगा और उनकी आजीविका के अवसर मजबूत होंगे। इसके अलावा, राजस्थान सरकारी कर्मचारी बीमा नियम, 1998 में संशोधन को भी मंजूरी दी गई है। यह नया संशोधन 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। पहले की व्यवस्था में जिस वित्तीय वर्ष में कर्मचारी सेवानिवृत्त होता था, उसी साल 1 अप्रैल से उसकी बीमा पॉलिसी भुगतानित मान ली जाती थी, जिससे रिटायरमेंट की वास्तविक तारीख तक उसे बीमा सुरक्षा नहीं मिल पाती थी। अब नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति की वास्तविक तिथि तक निरंतर बीमा कवरेज मिलता रहेगा।
सरकार की प्राथमिकताएं और प्रशासनिक मजबूती
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मानसून के दौरान जनता की सुरक्षा, प्रभावी आपदा प्रबंधन और किसानों को समय पर सुविधाएं प्रदान करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों के जिला दौरे, कृषि तैयारियों की निगरानी और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं और सरकार का विश्वास है कि इन फैसलों से जहां एक ओर आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर राज्य में विकास कार्यों और प्रशासनिक व्यवस्था को नई मजबूती प्राप्त होगी।