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: BRICS बैठक: जयशंकर ने दिल्ली से दुनिया को दिए 5 बड़े संदेश, जानें क्या कहा?

- BRICS बैठक: जयशंकर ने दिल्ली से दुनिया को दिए 5 बड़े संदेश, जानें क्या कहा?
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नई दिल्ली में आयोजित BRICS विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक की शुरुआत करते हुए भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक परिदृश्य पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की और उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया एक अत्यंत गहरे भू-राजनीतिक (geopolitical) और आर्थिक अस्थिरता (economic flux) के दौर से गुजर रही है। जयशंकर के अनुसार, इस अनिश्चितता के माहौल में उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों की उम्मीदें BRICS संगठन से पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गई हैं। भारत ने इस मंच के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल सैन्य शक्ति या प्रतिबंधों के माध्यम से नहीं निकाला जा सकता है। विदेश मंत्री ने वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भारत का पक्ष रखते हुए एक साथ कई बड़े संदेश दिए, जिनमें पश्चिम एशिया से लेकर आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा, प्रतिबंधों की राजनीति और संयुक्त राष्ट्र सुधार तक के विषय शामिल थे।

पश्चिम एशिया और समुद्री सुरक्षा पर भारत का रुख

विदेश मंत्री एस. जयशंकर के संबोधन में सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण फोकस पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति पर रहा। उन्होंने विशेष रूप से 'Strait of Hormuz' और 'Red Sea' (लाल सागर) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों का उल्लेख किया। जयशंकर ने चेतावनी देते हुए कहा कि समुद्री रास्तों में किसी भी प्रकार की बाधा और ऊर्जा बुनियादी ढांचे (energy infrastructure) पर मंडराते खतरे पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए सुरक्षित और निर्बाध समुद्री प्रवाह सुनिश्चित करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान संकट और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव लगातार वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है।

क्षेत्रीय संकट और मानवीय दृष्टिकोण

बैठक के दौरान भारत ने गाजा में जारी संघर्ष और वहां उत्पन्न मानवीय संकट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि गाजा में मानवीय स्थिति को किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। भारत ने इस संदर्भ में तत्काल सीजफायर (युद्धविराम), प्रभावित क्षेत्रों तक मानवीय सहायता की पहुंच और 'दो राष्ट्र सिद्धांत' (two-state solution) के प्रति अपने पुराने और अडिग समर्थन को एक बार फिर दोहराया। इसके अतिरिक्त, जयशंकर ने लेबनान, सीरिया, सूडान, यमन और लीबिया जैसे देशों की स्थितियों का भी विशेष रूप से जिक्र किया। इन देशों का नाम लेकर भारत ने यह संदेश देने की कोशिश की कि क्षेत्रीय अस्थिरता अब केवल एक सीमित भौगोलिक मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि उसका व्यापक असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर पड़ रहा है।

एकतरफा प्रतिबंधों और आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश

विदेश मंत्री ने अपने भाषण में एकतरफा प्रतिबंधों (unilateral sanctions) के मुद्दे पर भी अत्यंत तीखा और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर (UN Charter) के सिद्धांतों के खिलाफ जाकर लगाए गए दंडात्मक उपाय अक्सर विकासशील देशों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। जयशंकर ने तर्क दिया कि दबाव की राजनीति कभी भी सार्थक संवाद का विकल्प नहीं बन सकती है। BRICS मंच पर यह बयान पश्चिमी प्रतिबंधों की नीति पर भारत की लगातार बनी हुई असहजता को भी दर्शाता है। इसके साथ ही, आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने अपना पारंपरिक लेकिन सख्त रुख बरकरार रखा। उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद (cross-border terrorism) अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है और आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' (zero tolerance) को एक सार्वभौमिक मानक के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र सुधार और भविष्य की राह

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए जयशंकर ने कहा कि अब इस प्रक्रिया को और अधिक समय तक टाला नहीं जा सकता है। उन्होंने रेखांकित किया कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियां यह साबित कर रही हैं कि वर्तमान बहुपक्षीय प्रणाली (multilateral system) धीरे-धीरे कमजोर पड़ती जा रही है। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है और BRICS जैसे प्रभावशाली मंचों पर इस मुद्दे को उठाना भारत की कूटनीतिक प्राथमिकता रही है। पूरे संबोधन का सार यही था कि दुनिया अब खंडित भू-राजनीति (fragmented geopolitics) के युग में प्रवेश कर चुकी है, जहां संघर्ष, ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक दबाव, तकनीकी असमानता और जलवायु संकट (climate crisis) जैसे मुद्दे आपस में जुड़ गए हैं। भारत ने खुद को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत किया जो टकराव के बजाय संवाद, कूटनीति और एक समावेशी वैश्विक व्यवस्था का पक्षधर है।

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