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सम्राट चौधरी: 19 की उम्र में मंत्री से बिहार के 24वें मुख्यमंत्री तक का सफर

सम्राट चौधरी: 19 की उम्र में मंत्री से बिहार के 24वें मुख्यमंत्री तक का सफर
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बिहार की राजनीति में एक नए युग का सूत्रपात होने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है और उनके पिता शकुनी चौधरी राज्य के कद्दावर नेताओं में शुमार रहे हैं। सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है, जिसमें उन्होंने क्षेत्रीय दलों से लेकर राष्ट्रीय दल तक की यात्रा की है।

राजनीतिक विरासत और आरजेडी से शुरुआत

सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को हुआ था। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का ककहरा अपने पिता शकुनी चौधरी के सानिध्य में सीखा। दिलचस्प बात यह है कि सम्राट ने अपनी राजनीति की शुरुआत उसी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से की थी, जिसके वह आज सबसे प्रखर विरोधी माने जाते हैं। लालू प्रसाद यादव की पाठशाला से निकले सम्राट चौधरी ने कम समय में ही अपनी पहचान बना ली थी। उनके पिता शकुनी चौधरी भी कभी लालू प्रसाद के बेहद करीबी माने जाते थे, जिन्होंने बाद में नीतीश कुमार का दामन थाम लिया था।

1999 का उम्र विवाद और मंत्री पद से बर्खास्तगी

सम्राट चौधरी के नाम एक अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है। वह महज 19 साल की उम्र में राबड़ी देवी की सरकार में कृषि राज्य मंत्री बन गए थे। हालांकि, यह उपलब्धि विवादों में घिर गई जब उनकी उम्र को लेकर सवाल उठाए गए। तत्कालीन समता पार्टी के नेताओं ने राज्यपाल के पास शिकायत दर्ज कराई थी कि सम्राट की उम्र मंत्री बनने के लिए निर्धारित 25 वर्ष से कम है। इसके बाद 1999 में तत्कालीन राज्यपाल सूरजभान ने उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था। उन पर जालसाजी और गलत हलफनामा देने के आरोप में मामला भी दर्ज करने का आदेश दिया गया था।

जेडीयू से बीजेपी तक का राजनीतिक सफर

आरजेडी छोड़ने के बाद सम्राट चौधरी जनता दल यूनाइटेड (JDU) में शामिल हुए। 2014 में जब नीतीश कुमार ने जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया, तब सम्राट चौधरी उनकी सरकार में भी मंत्री रहे। हालांकि, बाद में उन्होंने जेडीयू से किनारा कर लिया और भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। बीजेपी में शामिल होने के बाद उनका कद तेजी से बढ़ा और उन्हें प्रदेश अध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने समय-समय पर नीतीश कुमार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया, जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा।

कर्पूरी ठाकुर के रिकॉर्ड की बराबरी

सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री बनकर एक बड़ा राजनीतिक मिथक तोड़ दिया है। वह बिहार के इतिहास में कर्पूरी ठाकुर के बाद दूसरे ऐसे नेता बन गए हैं, जो पहले उपमुख्यमंत्री रहे और बाद में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे। इससे पहले सुशील कुमार मोदी, तेजस्वी यादव और विजय कुमार सिन्हा जैसे कई दिग्गज नेता उपमुख्यमंत्री तो रहे, लेकिन वे मुख्यमंत्री के पद तक नहीं पहुंच सके थे। सम्राट चौधरी ने इस उपलब्धि के साथ अपना नाम बिहार के राजनीतिक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया है।

व्यक्तिगत जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

सम्राट चौधरी के परिवार का बिहार की राजनीति में गहरा प्रभाव रहा है। उनकी माता पार्वती देवी और पिता शकुनी चौधरी दोनों ही सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे हैं। सम्राट की शादी ममता कुमारी से हुई है और उनके दो बच्चे हैं। उनकी शिक्षा और डिग्री को लेकर भी समय-समय पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं, लेकिन उन्होंने हर बार इन चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत की है। अब मुख्यमंत्री के रूप में उनके सामने राज्य के विकास और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

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