सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच जारी विवाद ने पश्चिम एशिया में एक बार फिर से गंभीर तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। इस संघर्ष में एक नया और खतरनाक मोड़ तब आया जब हूती विद्रोहियों ने दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको को अपनी बैलिस्टिक मिसाइल का निशाना बनाया और यह हमला न केवल सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि इसने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी हलचल मचा दी है। हूती विद्रोही पिछले कुछ समय से लगातार सऊदी अरब के विभिन्न ठिकानों पर हमले कर रहे हैं, जिनमें पहले हवाई अड्डों को निशाना बनाया गया था और अब वे सीधे तेल डिपो और मुख्यालयों को टारगेट कर रहे हैं।
अरामको मुख्यालय पर मिसाइल प्रहार और भारी नुकसान
हूती विद्रोहियों द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल सीधे अरामको के मुख्यालय के पास जाकर गिरी, जिससे वहां भीषण आग लग गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस हमले के कारण अरामको मुख्यालय की इमारत की सबसे ऊपरी तीन मंजिलों में आग लग गई, जिससे इमारत को काफी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, इस घटना में राहत की बात यह रही कि किसी के हताहत होने की खबर सामने नहीं आई है। लेकिन इस हमले की गंभीरता को देखते हुए सऊदी अरब प्रशासन ने एहतियात के तौर पर अरामको में तेल उत्पादन को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। वर्तमान में नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है और माना जा रहा है कि तेल डिपो को फिर से पूरी तरह सक्रिय होने में कई दिनों का समय लग सकता है।
वैश्विक तेल संकट की आशंका
अरामको दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में से एक है और इसके उत्पादन में किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हूती विद्रोहियों के ये हमले नहीं रुके, तो दुनिया को एक बार फिर से बड़े तेल संकट का सामना करना पड़ सकता है और हूती विद्रोहियों की रणनीति भी यही नजर आ रही है कि वे तेल संकट पैदा करके अमेरिका और पूरे मिडिल ईस्ट पर दबाव बना सकें। इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है क्योंकि तेल की कीमतों में उछाल आने की संभावना प्रबल हो गई है।
सऊदी गठबंधन की जवाबी कार्रवाई और सना में एयरस्ट्राइक्स
अरामको पर हुए हमले के जवाब में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने भी कड़ी कार्रवाई की है। गठबंधन ने यमन की राजधानी सना के पश्चिम में स्थित तेल सुविधाओं पर कई एयरस्ट्राइक्स की हैं। इन हमलों ने पश्चिम एशिया में चल रहे संकट को और अधिक गहरा कर दिया है। यमन में ये हमले गठबंधन के प्रवक्ता द्वारा लोगों से सुरक्षा के लिए क्षेत्र खाली करने की अपील करने के कुछ ही समय बाद किए गए। सना के स्थानीय निवासियों ने इन हमलों के दौरान तेज धमाकों की आवाजें सुनीं, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
खाली स्टोरेज फैसिलिटी का दावा
सऊदी गठबंधन ने हमले से पहले हूती के नियंत्रण वाली राजधानी में आम नागरिकों से अपील की थी कि वे यमनी तेल कंपनी की साइट और उसके आसपास के भंडारण क्षेत्रों को छोड़ दें। ऐसा प्रतीत होता है कि हूती अधिकारियों को पहले से ही इन स्थानों पर हमले की आशंका थी। हमले के बाद यमन की तेल कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा कि उसकी स्टोरेज फैसिलिटी उस समय खाली थीं और कंपनी का दावा है कि सऊदी अरब के इन हमलों से तेल के भंडार या आम जनता के लिए होने वाली तेल की सप्लाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
हूती विद्रोहियों की रियाद को चेतावनी और सुरक्षा पर सवाल
इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने सऊदी अरब को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि सना पर किए गए किसी भी हमले का जवाब रियाद में और भी कड़े तरीके से दिया जाएगा। इस बयान ने भविष्य में और बड़े हमलों की आशंका को जन्म दे दिया है। दूसरी ओर, सऊदी अरब इस बात की जांच करने में जुटा है कि उसका अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम हूती विद्रोहियों द्वारा दागी गई मिसाइलों और ड्रोन की बौछार को रोकने में विफल क्यों रहा। यह विफलता सऊदी अरब की आंतरिक सुरक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करती है।