भारतीय इक्विटी बाजार में रविवार को बजट सत्र के दौरान भारी बिकवाली का दबाव देखा गया, जिसके परिणामस्वरूप प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। 94 के स्तर पर बंद हुआ। 45 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार की शुरुआत सकारात्मक रही थी, लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण के दौरान कर संबंधी घोषणाओं के बाद बाजार ने अपनी बढ़त खो दी और लाल निशान में चला गया।
फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस पर प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) में वृद्धि
बाजार में गिरावट का प्राथमिक कारण वित्त मंत्री द्वारा फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) में वृद्धि की घोषणा को माना जा रहा है। 05% कर दिया गया है। 15% करने का निर्णय लिया गया है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस कदम से ट्रेडिंग की लागत बढ़ जाएगी, जिसके कारण ट्रेडर्स और संस्थागत निवेशकों ने बाजार में बिकवाली शुरू कर दी।
दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) कर पर यथास्थिति
बाजार की गिरावट का दूसरा महत्वपूर्ण कारण दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) कर संरचना में किसी भी राहत का न होना रहा। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों को उम्मीद थी कि सरकार निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए LTCG कर की दरों में कटौती या होल्डिंग अवधि में बदलाव कर सकती है। 5% की दर से LTCG कर वसूल रही है। इस मोर्चे पर कोई सकारात्मक घोषणा न होने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई और उन्होंने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी।
बाजार विशेषज्ञों का विश्लेषण और प्रतिक्रिया
बाजार विशेषज्ञ कुणाल सरावगी के अनुसार, बजट में कर संबंधी इन बदलावों ने बाजार की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। उन्होंने बताया कि STT में वृद्धि और LTCG में राहत की कमी ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता पैदा की। विशेषज्ञों का मानना है कि करों में वृद्धि से बाजार की तरलता पर प्रभाव पड़ सकता है, विशेष रूप से डेरिवेटिव सेगमेंट में जहां ट्रेडिंग वॉल्यूम अधिक रहता है। बजट भाषण के दौरान जैसे-जैसे इन कर प्रस्तावों की स्पष्टता बढ़ी, बाजार में गिरावट की गति और तेज हो गई।
पूंजीगत लाभ कर की वर्तमान संरचना
वर्तमान कर नियमों के अनुसार, 12 महीने से अधिक समय तक रखे गए सूचीबद्ध इक्विटी शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ के दायरे में आते हैं। वहीं, गोल्ड ईटीएफ और असूचीबद्ध शेयरों के लिए यह अवधि 24 महीने निर्धारित है। 5% का कर लगाया जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, कर की यह उच्च दर और बजट में इसमें किसी भी प्रकार की कटौती का अभाव बाजार के लिए एक निराशाजनक संकेत रहा, जिससे निवेशकों ने बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया।
निष्कर्ष के तौर पर, रविवार का कारोबारी सत्र पूरी तरह से बजट घोषणाओं के प्रभाव में रहा। कर संरचना में बदलाव और निवेशकों की अपेक्षाओं के अनुरूप राहत न मिलने के कारण बाजार में यह तीव्र गिरावट देखी गई। विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले सत्रों में बाजार इन कर परिवर्तनों के दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन करेगा और वैश्विक संकेतों के साथ तालमेल बिठाने का प्रयास करेगा।