शहबाज शरीफ ने फिर अलापा कश्मीर राग, ट्रंप को दिया भारत-पाकिस्तान सीजफायर का श्रेय

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शहबाज शरीफ ने फिर अलापा कश्मीर राग, ट्रंप को दिया भारत-पाकिस्तान सीजफायर का श्रेय
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से एक बार फिर कश्मीर का राग अलापा। अपने लगभग 23 मिनट के संबोधन के दौरान शरीफ ने वर्ष 2025 में भारत के साथ होने वाले संभावित संघर्ष को रोकने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप की सराहना की और उन्हें इसका श्रेय दिया। शरीफ ने कहा कि ट्रंप के समय पर किए गए हस्तक्षेप की वजह से दक्षिण एशिया में एक बड़ी सैन्य त्रासदी टल गई और करोड़ों लोगों की जान बच सकी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

2025 का संघर्ष और ऑपरेशन सिंदूर का घटनाक्रम

शहबाज शरीफ ने जिस 2025 के संघर्ष का जिक्र किया, उसकी पृष्ठभूमि पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकवादी हमले से जुड़ी है। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए इस हमले में 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे। इस हमले के जवाब में भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए पिछले साल 6 और 7 मई की मध्यरात्रि को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस सैन्य कार्रवाई के तहत भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकवादी ढांचों को निशाना बनाया था। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी थी, जिसे शरीफ के अनुसार अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जरिए शांत किया गया।

डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका और शरीफ का आभार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में दावा किया था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाया था। शहबाज शरीफ ने ट्रंप को उनके दृढ़तापूर्ण और दूरदर्शी नेतृत्व के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के समय पर हस्तक्षेप से दक्षिण एशिया में शांति बनी रही। हालांकि, नई दिल्ली लगातार किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से इनकार करता रहा है। भारत का हमेशा से यह मानना रहा है कि पाकिस्तान के साथ सभी मुद्दे द्विपक्षीय ढांचे के तहत ही सुलझाए जाने चाहिए और इसमें किसी मध्यस्थ की आवश्यकता नहीं है।

कश्मीर मुद्दे पर भारत का कड़ा रुख

अपने संबोधन में कश्मीर राग अलापते हुए शहबाज शरीफ ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि दक्षिण एशिया फिर कभी 2025 के संघर्ष जैसी स्थिति में न पहुंचे, कश्मीर मुद्दे का न्यायसंगत और निष्पक्ष समाधान जरूरी है। भारत संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र के अन्य मंचों पर कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के दावों को बार-बार खारिज करता रहा है। भारत का स्पष्ट कहना है कि जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा रहा है, है तथा हमेशा रहेगा। भारत ने पाकिस्तान को अपनी आंतरिक समस्याओं पर ध्यान देने की सलाह दी है।

सिंधु जल संधि और आतंकवाद पर भारत की शर्त

शरीफ ने अपने भाषण में सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) का भी जिक्र किया। इस संधि को लेकर भारत का रुख बेहद सख्त रहा है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान जब तक सीमा पार आतंकवाद और किसी भी तरह के आतंकवाद को अपना समर्थन खत्म नहीं करता, तब तक यह संधि स्थगित रहेगी। भारत ने पहलगाम आतंकवादी हमले के तुरंत बाद कूटनीतिक कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला किया था और भारत का मानना है कि आतंकवाद और बातचीत या संधियां एक साथ नहीं चल सकतीं।

सेना प्रमुख की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति

शरीफ ने अपने संबोधन में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को कई बार धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि बेहद कठिन एवं चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कूटनीति के लिए रास्ता बनाने में आसिम मुनीर के निरंतर प्रयासों की अहम भूमिका रही और इसके अलावा, शरीफ ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच शांति कायम कराने के पाकिस्तान के प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने पाकिस्तान को एक शांतिदूत के रूप में पेश करने की कोशिश की, जबकि भारत लगातार पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा उठाता रहा है।

भारत का जवाब देने का अधिकार

हर साल की तरह, भारत संयुक्त राष्ट्र में अपने स्थायी मिशन में तैनात सबसे युवा राजनयिकों में से एक को पाकिस्तान के नेता के संबोधन का जवाब देने के लिए भेजेगा। भारत 'जवाब के अधिकार' (राइट ऑफ रिप्लाई) का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के दावों की धज्जियां उड़ाने की तैयारी में है। भारतीय राजनयिक द्वारा पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर घेरने और कश्मीर पर भारत की संप्रभुता को दोहराने की उम्मीद है। पूरी दुनिया की नजरें अब भारत के इस आधिकारिक जवाब पर टिकी हैं।

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