सीकर में मंगलवार को किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर एक बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला,। जिसमें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद अमराराम के नेतृत्व में हजारों की संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे। यह प्रदर्शन उस समय तनावपूर्ण हो गया जब सांसद और उनके समर्थकों ने कलेक्ट्रेट परिसर में घुसने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी धक्का-मुक्की हुई। इस दौरान सांसद अमराराम पर महिला पुलिसकर्मियों को भी धक्का देने। का आरोप लगा है, जिसने घटना को और भी गंभीर बना दिया।
कलेक्ट्रेट पर तनावपूर्ण स्थिति
किसानों की मांगों को लेकर निकाली गई रैली जब कलेक्ट्रेट पहुंची, तो प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार से अंदर घुसने का प्रयास किया और पुलिस बल, जिसमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं, ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इसी दौरान सांसद अमराराम और पुलिसकर्मियों के बीच सीधी धक्का-मुक्की हुई। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस घटना के बाद, प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट के बाहर ही धरने पर बैठ गए, जिससे क्षेत्र में यातायात बाधित हुआ और पुलिस को ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा। यह घटना स्थानीय प्रशासन और किसानों के बीच बढ़ते गतिरोध को दर्शाती है।
कानून व्यवस्था पर सवाल
इस प्रदर्शन से पहले, जयपुर रोड स्थित कृषि उपज मंडी में एक सभा का आयोजन किया गया था, जिसमें सांसद अमराराम ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला और उन्होंने कहा कि कानून को अपने हाथ में लेने का अधिकार किसी को भी नहीं है, लेकिन भाजपा और आरएसएस के गुंडे लगातार आतंक मचा रहे हैं। सांसद ने हाल ही में हुई एक घटना का जिक्र किया, जिसमें पुष्कर से ऊंट खरीद कर जा रहे एक युवक को बहरोड़ में भाजपा और आरएसएस के गुंडों ने कपड़े उतार कर पीटा था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने पीड़ित पर ही मुकदमा दर्ज कर दिया, जो कानून व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है और यह बयान राज्य में राजनीतिक और सामाजिक तनाव को उजागर करता है।
पेयजल संकट और सरकारी उदासीनता
सांसद अमराराम ने सभा में पेयजल संकट को लेकर भी राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने सीकर संभाग और नीमकाथाना जिले को समाप्त करने का काम किया है, जिससे इन क्षेत्रों के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार को दो साल होने जा रहे हैं, लेकिन 8 हजार करोड़ रुपए की जल जीवन योजना अभी तक झूले खा रही है और इसका कोई ठोस परिणाम नहीं दिख रहा है और सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार ने पिछले दो साल में सीकर और झुंझुनूं के लिए एक पैसा भी नहीं दिया है, जबकि मुख्यमंत्री नौ बार सीकर जिले में आ चुके हैं और शेखावाटी के तीनों जिलों में एक-एक दिन रुककर भी गए हैं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सिर्फ बातचीत से पानी पिलाना चाहते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हो रहा है।
फसल खराबे और मुआवजे का मुद्दा
मानसून के समय शेखावाटी क्षेत्र में फसलों को भारी नुकसान हुआ था, लेकिन सरकार द्वारा किसानों को उचित मुआवजा नहीं दिए जाने पर सांसद अमराराम ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि सीकर जिले में 50% से 60% तक फसल नष्ट हो गई थी, लेकिन सरकार केवल तीन प्रतिशत फसल नष्ट बता रही है और उसी के आधार पर मुआवजा देने की बात कर रही है, जो किसानों के साथ अन्याय है और उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों के नुकसान का पूरा आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा देना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यह किसानों के बीच असंतोष का एक प्रमुख कारण बना हुआ है।
स्मार्ट मीटर और बिजली निजीकरण का विरोध
सांसद अमराराम ने आम जनता के घरों, खेतों और दुकानों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाने की योजना का भी कड़ा विरोध किया। उन्होंने इसे जनता पर अतिरिक्त बोझ बताया और कहा कि यह योजना रद्द की जानी चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने बिजली के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग की, क्योंकि उनका मानना है कि निजीकरण से बिजली की दरें बढ़ेंगी और आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खाद मांगने वाले किसानों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं, जो सरकार के किसान विरोधी रवैये को दर्शाता है और ये मुद्दे सीधे तौर पर आम जनता और किसानों के हितों से जुड़े हैं।
सांसद की प्रमुख मांगें
सांसद अमराराम ने राजस्थान सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। उन्होंने फसल खराबे का पूरा मुआवजा देने, किसानों का पूरा कर्ज माफ करने, सीकर जिले के सभी गांवों व कस्बों में पेयजल की उचित व्यवस्था करने और जल जीवन मिशन योजना में राज्य सरकार द्वारा अपने हिस्से का आधा पैसा (4000 करोड़ रुपए) जमा करवाने की मांग की और इसके अतिरिक्त, उन्होंने स्मार्ट मीटर योजना को रद्द करने, बिजली के निजीकरण पर रोक लगाने, सभी विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती करने, नए रोजगार सृजन कर बेरोजगारी खत्म करने, महंगाई पर रोक लगाने और पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम करने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दलितों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों पर रोक लगाने की पुरजोर मांग की, जो समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। इन मांगों को लेकर ही यह प्रदर्शन आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य सरकार का ध्यान इन गंभीर मुद्दों की ओर आकर्षित करना था।