Silver Price Today: चांदी की रफ्तार पर लगा ब्रेक: क्या अगले हफ्ते 3 लाख के पार जाएंगे दाम?

Silver Price Today - चांदी की रफ्तार पर लगा ब्रेक: क्या अगले हफ्ते 3 लाख के पार जाएंगे दाम?
| Updated on: 17-Jan-2026 01:47 PM IST
जनवरी 2025 के महीने में चांदी की कीमतों में 19 फीसदी से ज्यादा और कुछ आंकड़ों के अनुसार 22 फीसदी से ज्यादा का इजाफा देखने को मिला था, जिसने बाजार में एक जबरदस्त रफ्तार पकड़ी थी। हालांकि, शुक्रवार को इस रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग गया। वायदा बाजार में चांदी की कीमतों में सवा फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज। की गई, जिससे 3 लाख रुपए के स्तर को छूने की उम्मीदें अधूरी रह गईं। इस अप्रत्याशित गिरावट ने निवेशकों और बाजार विश्लेषकों को हैरान कर दिया है कि आखिर चांदी की कीमतों में यह नरमी क्यों आई और क्या आने वाले दिनों में यह फिर से अपनी तेजी बरकरार रख पाएगी, खासकर क्या अगले हफ्ते 3 लाख रुपए का आंकड़ा पार होगा।

चांदी की कीमतों में अप्रत्याशित गिरावट

शुक्रवार को देश के वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार, चांदी 3,815 रुपए की गिरावट के साथ 2,87,762 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। कारोबारी सत्र के दौरान, चांदी 2,84,045 रुपए के साथ दिन के निचले स्तर पर भी पहुंच गई थी। यह प्रदर्शन एक दिन पहले के 2,91,577 रुपए के बंद भाव से काफी विपरीत था। और 3 लाख रुपए के स्तर तक पहुंचने के व्यापक अनुमानों को पूरा नहीं कर सका। गौरतलब है कि शुक्रवार को वायदा बाजार में चांदी की कीमतों में लगातार पांच कारोबारी सत्रों की तेजी के बाद यह गिरावट देखने को मिली, जो बाजार के रुख में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है और निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

गिरावट के पीछे के प्रमुख कारण

बाजार जानकारों ने चांदी की रफ्तार थमने के पीछे पांच प्रमुख कारणों का उल्लेख किया है। ये कारण भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से लेकर घरेलू बाजार की गतिशीलता तक फैले हुए हैं, जिन्होंने सामूहिक रूप से निवेशकों के व्यवहार को प्रभावित किया और कीमतों में सुधार का कारण बने। इन कारकों के संयोजन ने चांदी की मजबूत रैली पर विराम लगा दिया।

ईरान-अमेरिका तनाव में कमी:

एक महत्वपूर्ण कारक अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में कमी आना है और ऐसी खबरें हैं कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर हमला करने की योजना नहीं बना रहा है, जिससे मध्य पूर्व में सैन्य टकराव की आशंकाएं कम हुई हैं। इसके अलावा, हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धबंदियों को फांसी न देने के ईरान के फैसले की तारीफ भी की है। इन घटनाक्रमों ने निवेशकों का रुख सुरक्षित निवेश (सेफ हैवन) से हटा दिया है, क्योंकि भू-राजनीतिक स्थिरता आमतौर पर सोने और चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों की मांग को कम करती है और हालांकि, परिस्थितियां अभी भी अनिश्चित बनी हुई हैं और आने वाले दिनों में कुछ भी होने की संभावना है, लेकिन तात्कालिक तनाव कम होने से चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों की मांग में कमी आई है।

फेड चेयरमैन पर ट्रंप का बयान:

फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल पर पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप का बयान भी सर्राफा बाजार के लिए सुकून की खबर लेकर आया है। ट्रंप ने पॉवेल पर किसी तरह का केस चलाने या जेल डालने की बात को पूरी तरह से नकार दिया है। इससे दोनों के बीच की रस्साकशी कम हुई है और बाजार में राजनीतिक अनिश्चितता का स्तर घटा है और दुनियाभर के सेंट्रल बैंक भी फेड प्रमुख के फेवर में खड़े हो गए हैं, जिसकी वजह से ट्रंप को नरम रुख अख्तियार करना पड़ा है। इस राजनीतिक स्थिरता ने निवेशकों को जोखिम भरे परिसंपत्तियों की ओर बढ़ने। के लिए प्रोत्साहित किया है, जिससे सुरक्षित निवेश की अपील कम हुई है।

बेरोजगार दर में कमी:

अमेरिका में रोजगार के आंकड़ों में सुधार भी चांदी की कीमतों पर असर डाला है। दिसंबर में जॉब क्रिएशन की गति में कमी देखने को मिली, नवंबर के 56,000 की तुलना में केवल 50,000 नॉन-एग्री रोजगार ही बढ़े। हालांकि, श्रम सांख्यिकी ब्यूरो की मासिक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय बेरोजगारी दर अप्रत्याशित रूप से घटकर 4. 4 फीसदी हो गई और यह लेबर मार्केट में नरमी के बावजूद मजबूती का संकेत है। मजबूत आर्थिक आंकड़े आमतौर पर सुरक्षित निवेश की मांग को कम करते हैं, क्योंकि निवेशक जोखिम भरे निवेशों में अधिक आत्मविश्वास महसूस करते हैं, जिससे चांदी जैसी वस्तुओं पर दबाव पड़ता है।

डॉलर इंडेक्स में तेजी:

बेरोजगारी दर में कमी आने की वजह से डॉलर इंडेक्स में इजाफा देखने को मिला है। मौजूदा समय में डॉलर इंडेक्स 6 हफ्तों के हाई के साथ 99. 838 के लेवल पर देखने को मिल रहा है और खास बात तो ये है कि मौजूदा महीने में डॉलर इंडेक्स में 1 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली है। एक मजबूत अमेरिकी डॉलर अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए चांदी जैसी डॉलर-मूल्यवान वस्तुओं को महंगा बनाता है, जिससे उनकी खरीद शक्ति कम होती है और परिणामस्वरूप मांग कम होती है। यह डॉलर और कीमती धातुओं के बीच एक क्लासिक विपरीत संबंध है, जो शुक्रवार को स्पष्ट रूप से देखा गया।

मुनाफावसूली:

अंततः, एक महत्वपूर्ण मात्रा में मुनाफावसूली ने भी गिरावट में योगदान दिया। गुरुवार को चांदी के दाम लाइफटाइम हाई पर पहुंच गए थे, जिसके बाद शुक्रवार को कई निवेशकों ने अपने लाभ को भुनाना शुरू कर दिया। एमसीएक्स पर चांदी की कीमतें एक समय 7,500 रुपए से ज्यादा की गिरावट के साथ 2. 84 लाख रुपए के लेवल पर आ गई थी, हालांकि उसके बाद थोड़ी रिकवरी देखने को मिली। तेजी के बाद मुनाफावसूली एक सामान्य बाजार प्रक्रिया है, जहां निवेशक अपने लाभ को सुरक्षित करने के लिए बिक्री करते हैं, खासकर जब बाजार में तेजी की गति धीमी होने के संकेत मिलते हैं या अन्य कारक कीमतों पर दबाव डालते हैं। **क्या 3 लाख के पार जाएंगी कीमतें?

वायदा बाजार में जनवरी की जबरदस्त तेजी

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या चांदी की कीमतें आने वाले दिनों में 3 लाख रुपए के स्तर को पार कर पाएंगी और इस सवाल का जवाब देते हुए या वेल्थ के डायरेक्टर अनुज गुप्ता का कहना है कि अगले हफ्ते मार्च कांट्रैक्ट सिल्वर का 3 लाख रुपए के लेवल पर आना मुश्किल लग रहा है। उनका तर्क है कि भू-राजनीतिक और फेड के साथ तनाव कम होने के साथ-साथ डॉलर में तेजी का माहौल बना हुआ है, जो चांदी की कीमतों पर दबाव बनाए रख सकता है। मार्च कांट्रैक्ट के तहत चांदी के दाम 2. 90 लाख से 2. 95 लाख रुपए के लेवल पर देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, मई कांट्रैक्ट के चांदी के दाम 3 लाख रुपए के लेवल पर पहुंचने की संभावना है। आंकड़ों को देखें तो शुक्रवार को मई कांट्रैक्ट की चांदी 2,99,993 रुपए के साथ लाइफ टाइम हाई पर पहुंच गई थी, उसके बाद उसमें 4,569 रुपए की गिरावट देखने को मिली और 2,95,424 रुपए पर बंद हुई। रुपए में लगातार गिरावट की वजह से लोकल लेवल पर सोने और चांदी की कीमतों में इजाफा देखा जा रहा है, जो भविष्य में कीमतों को सहारा दे सकता है और मई कांट्रैक्ट को 3 लाख के करीब ले जा सकता है।

शुक्रवार की गिरावट के बावजूद, जनवरी 2025 में देश के वायदा बाजार में चांदी की कीमतों में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है और 31 दिसंबर 2024 को चांदी के दाम 2,41,048 रुपए पर थे, जो कि मौजूदा समय में बढ़कर 2,87,762 रुपए पर आ चुके हैं। इसका मतलब है कि चांदी की कीमतों में 46,714 रुपए का इजाफा देखने को मिल चुका है, जो जनवरी महीने में 19 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्शाता है और दिल्ली सर्राफा बाजार में शुक्रवार को चांदी की कीमत लगातार छठे दिन रिकॉर्ड तेजी के साथ 3,600 रुपए उछलकर 2,92,600 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई। गुरुवार को चांदी 2,89,000 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। कारोबारियों ने बताया कि कमजोर वैश्विक रुख के बावजूद लगातार औद्योगिक उठाव के कारण चांदी मजबूत बनी हुई है। चांदी अब सिर्फ छह सत्रों में 20. 16 फीसदी यानी 49,100 रुपए चढ़ चुकी है। आठ जनवरी को इसकी कीमत 2,43,500 रुपए प्रति किलोग्राम थी। चांदी लगातार दूसरे साल सोने से आगे रही और अबतक इसने 22. 4 फीसदी का लाभ दिया है, जो इसकी मजबूत बाजार स्थिति को दर्शाता है।

विदेशी बाजारों में भी गिरावट का रुख

चांदी की कीमतों में गिरावट का यह रुख केवल भारतीय बाजार तक ही सीमित नहीं था, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी देखा गया और न्यूयॉर्क के कॉमेक्स मार्केट में सिल्वर फ्यूचर के दाम शुक्रवार को 4. 13 फीसदी यानी 3 और 81 डॉलर प्रति औंस की गिरावट के साथ 88. 54 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुए। वहीं, गोल्ड स्पॉट के दाम भी 2. 49 फीसदी की गिरावट के साथ 90. 1257 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुए हैं। यूरोपीय बाजार में चांदी के दाम 2. 63 फीसदी की गिरावट के साथ 77. 7345 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुए, जबकि ब्रिटिश बाजार में चांदी के दाम में 2. 48 फीसदी की गिरावट के साथ 67. 35 डॉलर प्रति औंस पर देखने को मिला। यह वैश्विक स्तर पर एक साथ गिरावट इस बात का संकेत देती है कि शुक्रवार को चांदी की कीमतों को प्रभावित। करने वाले कारक व्यापक थे और किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं थे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की गतिशीलता से भी जुड़े थे।

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