स्मॉलकैप की तेजी में बड़ा खतरा: 8 साल में पहली बार सिर्फ 37.2 प्रतिशत शेयर ही बेंचमार्क से आगे

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स्मॉलकैप की तेजी में बड़ा खतरा: 8 साल में पहली बार सिर्फ 37.2 प्रतिशत शेयर ही बेंचमार्क से आगे
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भारतीय शेयर बाजार में इन दिनों स्मॉलकैप इंडेक्स लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। लेकिन इस चमक-धमक के पीछे एक गंभीर चेतावनी छिपी हुई है जो निवेशकों के लिए जोखिम का संकेत दे रही है। यस सिक्योरिटीज की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स के केवल 37 दशमलव 2 प्रतिशत शेयरों ने ही अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया है। यह आंकड़ा पिछले आठ सालों का सबसे निचला स्तर है, जो यह दर्शाता है कि इंडेक्स की तेजी बहुत ही सीमित शेयरों पर टिकी हुई है।

इंडेक्स की तेजी और शेयरों की भागीदारी में अंतर

आमतौर पर जब कोई इंडेक्स ऊपर जाता है, तो उसमें शामिल अधिकांश शेयरों में बढ़त देखी जाती है। लेकिन वर्तमान स्थिति में ऐसा नहीं हो रहा है। इस साल 24 प्रतिशत स्मॉलकैप शेयरों ने 25 प्रतिशत से ज्यादा का शानदार रिटर्न दिया है, लेकिन इसके बावजूद ज्यादातर शेयर इंडेक्स की रफ्तार को पकड़ने में नाकाम रहे हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि इंडेक्स का प्रदर्शन कुछ चुनिंदा शेयरों की असाधारण तेजी की वजह से अच्छा दिख रहा है। जो निवेशक केवल इंडेक्स के पिछले रिटर्न को देखकर पैसा लगा रहे हैं, उनके लिए यह एक बड़ा ट्रैप साबित हो सकता है क्योंकि बाजार की भागीदारी अपने आठ साल के निचले स्तर पर है।

लार्जकैप में दिख रही है ज्यादा मजबूती

स्मॉलकैप के विपरीत लार्जकैप शेयरों में स्थिति काफी बेहतर और संतुलित नजर आ रही है और निफ्टी 100 इंडेक्स के लगभग 65 प्रतिशत शेयर अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह आंकड़ा वर्ष 2025 के 46 दशमलव 5 प्रतिशत से काफी अधिक है और पिछले आठ वर्षों में सबसे ऊंचे स्तर पर है। हालांकि निफ्टी 100 का कुल प्रदर्शन व्यापक बाजार की तुलना में थोड़ा कमजोर रहा है, लेकिन इसके अधिकांश शेयरों का अच्छा प्रदर्शन यह बताता है कि लार्जकैप में तेजी का आधार अधिक व्यापक और मजबूत है। विशेषज्ञों का मानना है कि लार्जकैप में गिरावट केवल कुछ बड़े शेयरों तक सीमित है, जबकि बाकी कंपनियां अच्छा कर रही हैं।

म्यूचुअल फंड निवेश का बदलता रुख

निवेशकों के व्यवहार पर नजर डालें तो वे अभी भी स्मॉलकैप की ओर ज्यादा आकर्षित हैं। केनरा रोबेको एएमसी के मुख्य निवेश अधिकारी श्रीदत्त भांडवलदार का कहना है कि निवेशक अक्सर पिछले प्रदर्शन को आधार बनाकर निवेश का फैसला लेते हैं। पिछले तीन वर्षों में स्मॉल और मिडकैप ने लार्जकैप को काफी पीछे छोड़ दिया है, यही वजह है कि वहां निवेश का प्रवाह अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के महीने में स्मॉलकैप फंड्स में 7,770 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया है। इसके ठीक उलट, लार्जकैप फंड्स से निवेशकों ने 1,320 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं।

कंपनियों के मुनाफे और भविष्य का अनुमान

स्मॉलकैप की इस तेजी को केवल सट्टा नहीं माना जा सकता क्योंकि इसे कंपनियों के मजबूत नतीजों का भी समर्थन मिल रहा है। मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट बताती है कि जून तिमाही में स्मॉलकैप कंपनियों की अर्निंग्स में सालाना आधार पर 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो बाजार के अनुमानों से कहीं बेहतर है। इस मुनाफे में फाइनेंशियल, ऑयल, गैस, एनबीएफसी और केमिकल सेक्टर की कंपनियों का सबसे बड़ा योगदान रहा है। एचएसबीसी म्यूचुअल फंड के सीआईओ वेणुगोपाल मंगत के मुताबिक, भविष्य के अनुमान भी छोटी कंपनियों के पक्ष में हैं। वित्त वर्ष 2027 के लिए निफ्टी 100 की प्रॉफिट ग्रोथ 16 प्रतिशत, मिडकैप की 20 प्रतिशत और स्मॉलकैप की 34 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है।

वैल्युएशन और विशेषज्ञों की सावधानी भरी सलाह

मजबूत मुनाफे के बावजूद स्मॉलकैप शेयरों का महंगा वैल्युएशन विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इक्विट्री कैपिटल एडवाइजर्स के सह-संस्थापक पवन भरडिया का मानना है कि अब केवल मार्केट कैप देखकर निवेश करने का समय निकल चुका है। उनके अनुसार मिडकैप में वैल्युएशन काफी ऊपर चला गया है, हालांकि वे 1,000 करोड़ से 5,000 करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली चुनिंदा कंपनियों में अभी भी निवेश के मौके देख रहे हैं। कोटक लाइफ इंश्योरेंस के हेड ऑफ इक्विटी हेमंत कानावाला का कहना है कि लार्जकैप में, विशेष रूप से बैंकिंग और आईटी सेक्टर में, वैल्युएशन अब काफी आकर्षक और सुरक्षित स्तर पर है और निष्कर्ष यह है कि स्मॉलकैप की रैली पूरी तरह से कोई धोखा नहीं है क्योंकि अर्निंग्स ग्रोथ मजबूत है, लेकिन कम भागीदारी और ऊंचे वैल्युएशन को देखते हुए अब बहुत सावधानी से निवेश करने की जरूरत है।

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