हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व है। जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। यह दिन देवों के देव महादेव की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या का दिन पितृ पूजा, तर्पण, जप-तप, दान और पवित्र नदियों में स्नान के लिए बहुत ही शुभ होता है। इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों से सौभाग्य में वृद्धि होती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वर्ष 2026 में 15 जून को सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन कई दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहे हैं, जो इस तिथि के महत्व को कई गुना बढ़ा देते हैं।
सोमवती अमावस्या 2026 के शुभ मुहूर्त
पंचांग के विवरण के अनुसार, अमावस्या तिथि का आरंभ 14 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर होगा। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 15 जून 2026 को सुबह 08 बजकर 23 मिनट पर होगा। सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर स्नान, दान और विशेष पूजा-अर्चना के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 03 बजकर 33 मिनट से लेकर सुबह 04 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। इस ब्रह्म मुहूर्त में किए गए कार्यों का फल अनंत गुना प्राप्त होता है।
भगवान शिव की विशेष पूजा विधि
सोमवती अमावस्या के दिन महादेव को प्रसन्न करने के लिए भक्तों को एक निश्चित विधि का पालन करना चाहिए। सबसे पहले प्रातःकाल जल्दी उठकर पवित्र नदी या घर पर ही स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके पश्चात सोमवती अमावस्या व्रत का संकल्प लें। शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का विधिपूर्वक जलाभिषेक करें। शिवलिंग पर सबसे पहले गंगाजल अर्पित करें, फिर दूध, दही, घी, शहद और चीनी से अभिषेक करें। पंचामृत अभिषेक के बाद दोबारा शुद्ध जल से शिवलिंग को स्नान कराएं और अब शिवलिंग पर बेलपत्र, भांग, धतूरा, श्वेत चंदन, अक्षत यानी साबुत चावल और आंकड़े के फूल चढ़ाएं। इसके साथ ही माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करना न भूलें। अंत में कपूर और घी के दीपक से भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
शिवजी के प्रभावशाली मंत्रों का जाप
पूजा के दौरान और बाद में भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी होता है। भक्त महामृत्युंजय मंत्र का जाप कर सकते हैं: "ॐ त्र्यम्बकम् यजामहे सुगन्धिम् पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥" इसके अलावा शिव गायत्री मंत्र "ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात॥" और स्तुति "कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥" का पाठ करें और सरल मंत्र "ॐ नमः शिवाय" का निरंतर जाप भी मानसिक शांति प्रदान करता है।
2026 में बनने वाले दुर्लभ शुभ संयोग
इस वर्ष की सोमवती अमावस्या कई मायनों में खास है क्योंकि यह अधिकमास के दौरान पड़ रही है और अधिकमास हर तीन साल में एक बार आता है, इसलिए इस दौरान किया गया स्नान-दान अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इसके अतिरिक्त, 15 जून को मिथुन संक्रांति का भी संयोग बन रहा है, जब सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इसी दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है। ज्योतिष में इन योगों को किसी भी शुभ कार्य की सिद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इन सभी संयोगों के कारण 15 जून 2026 का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हो गया है।