भारतीय शेयर बाजार में आज सुबह निवेशकों के बीच जबरदस्त उत्साह का माहौल देखा गया और शुरुआती संकेतों को देखकर ऐसा लग रहा था कि सेंसेक्स और निफ्टी आज नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे। हालांकि, दोपहर का सत्र आते-आते बाजार की पूरी तस्वीर बदल गई। ऊंचे स्तरों पर निवेशकों द्वारा की गई भारी मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के कारण बाजार अपनी बढ़त बरकरार नहीं रख सका और धड़ाम से नीचे गिरकर लाल निशान पर बंद हुआ। इस अचानक आई गिरावट ने सुबह के उत्साह को चिंता में बदल दिया।
बाजार का उतार-चढ़ाव और क्लोजिंग आंकड़े
मंगलवार का दिन शेयर बाजार के लिए भारी उठापटक वाला रहा। कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही शानदार तेजी के साथ खुले थे। एक समय ऐसा था जब सेंसेक्स 400 अंकों से भी ज्यादा की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था और निफ्टी भी 23,780 के स्तर के बेहद करीब पहुंच गया था। लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ा, बाजार का मूड पूरी तरह बिगड़ गया। सेंसेक्स अपनी दिन की ऊंचाई से करीब 600 अंक टूट गया। बाजार बंद होने के समय सेंसेक्स 114 अंक की गिरावट के साथ 75,200 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी भी फिसलकर 23,618 के स्तर पर आ गया।
आईटी सेक्टर में दिखी जबरदस्त खरीदारी
भले ही पूरे बाजार पर बिकवाली का दबाव हावी रहा, लेकिन आईटी सेक्टर ने आज बाजार को संभालने की पूरी कोशिश की। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 3 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। दिग्गज आईटी कंपनी इन्फोसिस के शेयरों में करीब 5 प्रतिशत तक का उछाल देखा गया। इसके अलावा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचसीएलटेक और टेक महिंद्रा जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों ने अच्छी खरीदारी की। आईटी शेयरों की इस मजबूती ने बाजार को और अधिक गिरने से रोकने में मदद की, लेकिन अन्य सेक्टरों में कमजोरी के कारण बाजार अंततः गिरावट के साथ ही बंद हुआ।
बाजार में गिरावट के मुख्य कारण
शेयर बाजार के अचानक लाल निशान में आने के पीछे कई प्रमुख कारण रहे। सबसे पहला कारण कमजोर वैश्विक संकेत थे। एशियाई बाजारों, विशेषकर जापान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में कमजोरी का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा। इसके साथ ही अमेरिकी फ्यूचर्स में गिरावट ने भी निवेशकों के भरोसे को हिला दिया। दूसरा बड़ा कारण भारतीय रुपये में आई रिकॉर्ड गिरावट रही। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 96 रुपये 52 पैसे तक पहुंच गया। डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने रुपये पर दबाव बनाया, जिससे विदेशी निवेशकों ने बाजार में बिकवाली तेज कर दी। तीसरा कारण अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड का एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचना रहा। इससे यह संकेत मिला कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व भविष्य में ब्याज दरें बढ़ा सकता है, जिससे विदेशी निवेश भारत जैसे उभरते बाजारों से निकलकर अमेरिकी बॉन्ड की ओर जा सकता है।
आगे की राह और विशेषज्ञों की राय
बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ दिनों तक शेयर बाजार में इसी तरह का उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। बाजार की भविष्य की दिशा काफी हद तक वैश्विक संकेतों, रुपये की चाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे मौजूदा स्थिति में सावधानी बरतें और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रमों पर पैनी नजर रखें, क्योंकि ये कारक बाजार की चाल को प्रभावित करना जारी रख सकते हैं।