इस्लामाबाद में आयोजित शांति वार्ता के किसी ठोस परिणाम पर पहुंचे बिना विफल होने के बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से बंद करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है और अमेरिकी प्रशासन के इस कड़े फैसले के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका ओमान की खाड़ी में अपनी पनडुब्बियों और अत्याधुनिक जंगी जहाजों की तैनाती करेगा। इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरान को इस सामरिक जलमार्ग से होने वाली किसी भी प्रकार की वित्तीय आय को रोकना है। युद्ध की स्थिति के बीच ईरान अब तक इस रास्ते से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों से टोल वसूल रहा था, जिसे अब अमेरिका ने पूरी तरह प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया है।
अमेरिका के इस कदम से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है। पिछले 45 दिनों से यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग आंशिक रूप से प्रभावित था, लेकिन अब पूर्ण नाकाबंदी के कारण वैश्विक व्यापार पर इसके गंभीर परिणाम होने की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, अब एक भी जहाज इस रास्ते से सुरक्षित नहीं गुजर सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है।
ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य तैनाती और ट्रंप का रुख
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने हालिया बयान में कहा है कि ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का उपयोग राजस्व जुटाने के लिए नहीं करने दिया जाएगा। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, ओमान की खाड़ी में तैनात किए जाने वाले युद्धपोत और पनडुब्बियां किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखेंगी। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरान टोल के नाम पर जो राशि वसूल रहा है, उसका उपयोग क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने के लिए किया जा रहा है। इस सैन्य घेराबंदी के बाद अब ईरान के लिए अपने समुद्री आर्थिक हितों की रक्षा करना एक बड़ी चुनौती बन गया है और अमेरिका ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई जहाज इस क्षेत्र में नियमों का उल्लंघन करता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मालवाहक जहाजों का संकट: 650 से अधिक जहाज फंसे
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वर्तमान स्थिति 'इधर गड्ढा, उधर खाई' जैसी बनी हुई है। एक तरफ ईरान केवल उन्हीं देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दे रहा है जिनसे उसके कूटनीतिक संबंध बेहतर हैं और जो भारी टोल देने को तैयार हैं। दूसरी तरफ, अमेरिका ने घोषणा की है कि होर्मुज से बाहर निकलते ही जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है। इस दोहरी मार के कारण वर्तमान में 650 से अधिक मालवाहक जहाज समुद्र के बीच फंसे हुए हैं। इन जहाजों पर अरबों डॉलर का सामान लदा हुआ है। जहाजों के कप्तानों और शिपिंग कंपनियों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे किस पक्ष के निर्देशों का पालन करें, क्योंकि दोनों ही स्थितियों में जहाजों की सुरक्षा खतरे में है।
रूस और तुर्की की मध्यस्थता के प्रयास
इस्लामाबाद वार्ता के विफल होने के बाद अब दुनिया की नजरें रूस और तुर्की पर टिकी हैं और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस संकट को सुलझाने के लिए व्यक्तिगत रूप से पहल की है। पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेशकियन से फोन पर विस्तृत चर्चा की है। चूंकि रूस और ईरान के संबंध काफी गहरे हैं और पुतिन के अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ भी संवाद के रास्ते खुले हैं, इसलिए रूस को इस विवाद में एक प्रभावी मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, तुर्की ने भी बैकडोर चैनल के माध्यम से कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। तुर्की के विदेश मंत्री हक्कान फिदान ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री से संपर्क कर अमेरिका द्वारा दिए गए प्रस्तावों पर ईरान की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की है, ताकि वार्ता का दूसरा दौर शुरू हो सके।
लेबनान और इजराइल के बीच ऐतिहासिक सीधी वार्ता
मिडिल ईस्ट के इस तनावपूर्ण माहौल के बीच एक अप्रत्याशित कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। वर्ष 1983 के बाद पहली बार लेबनान और इजराइल के बीच सीधी बातचीत शुरू हुई है। वाशिंगटन में लेबनान की दूत नादा मोआद ने इजराइली राजदूत से फोन पर संवाद किया है। इस बातचीत को क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि यदि लेबनान और इजराइल के बीच किसी प्रकार का सफल समझौता हो जाता है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव ईरान और अमेरिका के संबंधों पर भी पड़ सकता है। यह वार्ता लेबनान की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फ्रांस और ब्रिटेन की वैश्विक शांति पहल
यूरोपीय देशों ने भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी को लेकर चिंता व्यक्त की है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि फ्रांस इस क्षेत्र में सीजफायर की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए तैयार है। मैक्रों ने जोर देकर कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए होर्मुज के रास्ते का खुला रहना अनिवार्य है। उन्होंने घोषणा की है कि फ्रांस इस मुद्दे पर ब्रिटेन के साथ मिलकर एक संयुक्त रणनीति तैयार करेगा और जल्द ही अन्य यूरोपीय देशों को भी इस गठबंधन में शामिल किया जाएगा। फ्रांस का लक्ष्य एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाना है जिससे अमेरिका और ईरान दोनों ही पक्ष लचीला रुख अपनाने को मजबूर हों और समुद्री व्यापार पुनः सुचारू रूप से शुरू हो सके।