बड़ा फैसला, नेपाल में भारत के नए राजदूत बने BRICS घोषणापत्र के आर्किटेक्ट सुधाकर दलेला, जानिए पूरी कूटनीतिक कहानी

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बड़ा फैसला, नेपाल में भारत के नए राजदूत बने BRICS घोषणापत्र के आर्किटेक्ट सुधाकर दलेला, जानिए पूरी कूटनीतिक कहानी
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भारत सरकार ने कूटनीतिक मोर्चे पर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ अधिकारी सुधाकर दलेला को नेपाल में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया है। विदेश मंत्रालय द्वारा शुक्रवार 16 अक्टूबर को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, वर्तमान में विदेश मंत्रालय में सचिव के पद पर कार्यरत सुधाकर दलेला जल्द ही काठमांडू में अपना नया कार्यभार संभालेंगे। उनकी यह नियुक्ति दोनों पड़ोसी देशों के द्विपक्षीय संबंधों और कूटनीतिक प्राथमिकताओं के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। सुधाकर दलेला इस जिम्मेदारी को संभालने के बाद नवीन श्रीवास्तव की जगह लेंगे, जिनका तीन साल का कार्यकाल हाल ही में पूरा हो चुका है और वो सेवानिवृत्त हो गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस घोषणा से ठीक एक दिन पहले ही नेपाल ने भारत में अपने नए राजदूत के रूप में निश्चल नाथ पांडे के नाम को अपनी मंजूरी दी थी।

सुधाकर दलेला की नेपाल में नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब नई दिल्ली और काठमांडू के बीच कूटनीतिक संवाद बेहद सक्रिय है। कूटनीतिक हलकों में इस बात की प्रबल संभावना जताई जा रही है कि नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह आगामी नवंबर महीने में अपनी पहली द्विपक्षीय यात्रा पर भारत आ सकते हैं। सुधाकर दलेला को नेपाल के साथ संबंधों और जटिल कूटनीतिक मामलों का पहले से ही लंबा और व्यापक अनुभव रहा है। ऐसे में उनकी इस पद पर ताजपोशी से दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित पड़े मुद्दों, व्यापारिक समझौतों और महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं पर बातचीत को एक नई गति मिलने की पूरी उम्मीद है।

BRICS घोषणापत्र के मुख्य वार्ताकार के रूप में चर्चा में रहे

सुधाकर दलेला हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तब खासी चर्चा में आए थे जब उन्होंने BRICS शिखर सम्मेलन की घोषणा पर सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनाने की कठिन चुनौती को सफलतापूर्वक पार किया था और bRICS के मुख्य वार्ताकार यानी शेरपा के रूप में दलेला ने उच्च स्तरीय वार्ताओं की अगुवाई की थी। इस दौरान पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण BRICS के सदस्य देशों के बीच स्पष्ट रूप से मतभेद और ध्रुवीकरण की स्थिति बनी हुई थी। संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के बीच की कूटनीतिक दूरी को पाटना भारत के लिए एक बेहद कठिन काम था, जिसके कारण BRICS घोषणापत्र तैयार करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य माना जा रहा था। हालांकि, ब्रिक्स शेरपा के रूप में दलेला ने कुशल कूटनीति का परिचय देते हुए वार्ताकारों की एक टीम का नेतृत्व किया और सभी पक्षों के बीच आम सहमति बनाने में ऐतिहासिक सफलता हासिल की, जिसके परिणामस्वरूप सफल घोषणापत्र सामने आ सका।

1993 बैच के अनुभवी IFS अधिकारी हैं सुधाकर दलेला

सुधाकर दलेला भारतीय विदेश सेवा यानी IFS के 1993 बैच के बेहद प्रतिष्ठित और अनुभवी अधिकारी हैं। वह फिलहाल विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंध सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इससे पहले वह वर्ष 2022 से 2025 तक भूटान में भारत के राजदूत के रूप में तैनात रहे थे। पिछले साल सितंबर के महीने में उन्हें आर्थिक संबंधों का सचिव नियुक्त किया गया था। इस महत्वपूर्ण भूमिका के तहत वह भारत की आर्थिक कूटनीति, ग्लोबल साउथ के देशों के साथ मजबूत विकास साझेदारी और तमाम बहुपक्षीय आर्थिक संबंधों की कमान संभाल रहे थे। इसके अलावा वह BRICS, IBSA और I2U2 जैसे बड़े मंचों के लिए भारत के शेरपा यानी मुख्य वार्ताकार की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। बहुपक्षीय वार्ताओं और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का उनका यह विशाल अनुभव अब नेपाल में भारत के राजदूत के रूप में भी बेहद उपयोगी साबित होने वाला है।

प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर दुनिया के कई अहम देशों में दी सेवाएं

सुधाकर दलेला ने अपने लंबे और शानदार राजनयिक करियर के दौरान नई दिल्ली में कई बेहद अहम और संवेदनशील पदों पर काम किया है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2009 से 2011 तक वह प्रधानमंत्री कार्यालय में निदेशक के पद पर कार्यरत रहे थे। इस महत्वपूर्ण कार्यकाल के दौरान उनका मुख्य फोकस दक्षिण एशियाई पड़ोसियों, पूर्वी एशिया, हिंद-प्रशांत क्षेत्र, खाड़ी देशों, मध्य पूर्व और अफ्रीका के साथ भारत के कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर था। इसके अलावा उन्होंने वर्ष 2006 से 2007 के बीच निदेशक उत्तर के रूप में अपनी सेवाएं दीं। बाद में वर्ष 2016 से 2019 के बीच उन्होंने विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव उत्तर की जिम्मेदारी संभाली, जिसके तहत उन्होंने भूटान और नेपाल के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को बेहद करीब से संभाला और आगे बढ़ाया था।

तेल अवीव से शुरू हुआ था शानदार राजनयिक सफर

सुधाकर दलेला ने अपने राजनयिक करियर की शुरुआत पश्चिम एशिया के देश तेल अवीव में भारतीय मिशन से की थी। इसके बाद उन्होंने दुनिया के कई महत्वपूर्ण देशों और राजधानियों में विभिन्न पदों पर कार्य किया। उन्होंने ब्रासीलिया, ढाका, शिकागो और वाशिंगटन जैसे प्रमुख शहरों में अपनी सेवाएं दीं। अमेरिका में तैनाती के दौरान उन्होंने शिकागो में भारत के महावाणिज्यदूत यानी कंसुल जनरल के रूप में काम किया। इसके बाद वर्ष 2011 से 2014 तक वाशिंगटन में राजनीतिक मामलों के मंत्री और वर्ष 2020 से 2022 तक भारतीय दूतावास में उप मिशन प्रमुख यानी डिप्टी चीफ ऑफ मिशन की जिम्मेदारी भी बहुत कुशलता से संभाली थी।

काठमांडू में सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति का कूटनीतिक संदेश

विशेषज्ञों का मानना है कि काठमांडू में सचिव स्तर के अधिकारी की यह नियुक्ति भारत की पिछली कूटनीतिक प्रथा से एक कदम आगे है। इससे पहले भारत आमतौर पर अतिरिक्त सचिव रैंक के अधिकारियों को ही काठमांडू में राजदूत बनाकर भेजता रहा है। भारतीय राजदूत के पद और स्तर में की गई यह बढ़ोतरी स्पष्ट रूप से यह दर्शाती है कि नई दिल्ली अपने इस अहम पड़ोसी देश के साथ द्विपक्षीय संबंधों को अब और अधिक प्राथमिकता और महत्व दे रही है। शुक्रवार की शाम को जब विदेश मंत्रालय ने सुधाकर दलेला की इस बड़ी नियुक्ति की घोषणा की, तो यह संकेत दिया गया कि वह बहुत जल्द ही काठमांडू पहुंचकर अपना कार्यभार संभालेंगे।

नेपाल के साथ आपसी संबंधों और विकास परियोजनाओं को मिलेगी नई गति

नेपाल में सुधाकर दलेला की यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत और नेपाल दोनों ही देश अपने आपसी संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने, लंबे समय से चले आ रहे लंबित विवादों को आपसी बातचीत से सुलझाने और तमाम महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की दिशा में पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं। आगामी नवंबर महीने में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की प्रस्तावित भारत यात्रा के दौरान दोनों देश बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, व्यापारिक समझौतों, लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवादों और नए हवाई मार्गों को लेकर विस्तृत बातचीत करने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में सुधाकर दलेला का काठमांडू पहुंचना इन सभी वार्ताओं को बेहद सहज और परिणाममूलक बनाने में निर्णायक साबित होगा।

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