अक्सर कार मालिक वाहन के रखरखाव के तकनीकी पहलुओं को नजरअंदाज कर देते हैं, खासकर जब बात टायर प्रेशर की आती है। ज्यादातर लोग टायर में हवा भरवाते समय सिर्फ यह देखते हैं कि टायर पिचके हुए तो नहीं दिख रहे हैं। पेट्रोल पंप पर पहुंचकर जितनी हवा भर दी जाती है, लोग उतने में ही संतुष्ट हो जाते हैं। लेकिन बहुत कम लोग इस बात से वाकिफ हैं कि टायर में सही प्रेशर रखना न सिर्फ गाड़ी का माइलेज बढ़ाता है, बल्कि यह गाड़ी की सुरक्षा और टायर की उम्र पर भी सीधा असर डालता है। टायर प्रेशर की सही जानकारी न होना न केवल आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है, बल्कि सड़क पर सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है।
PSI और कंपनी के मानकों को समझना
टायर में भरी जाने वाली हवा को मापने की इकाई को PSI यानी पाउंड्स प्रति स्क्वायर इंच कहा जाता है। हर कार निर्माता कंपनी अपनी गाड़ी के वजन, बनावट और प्रदर्शन के आधार पर अलग-अलग टायर प्रेशर तय करती है। इसकी सटीक जानकारी आमतौर पर ड्राइवर साइड के दरवाजे के अंदर की तरफ लगे एक स्टिकर पर दी जाती है। हवा भरवाने से पहले उस स्टिकर पर लिखे नंबर को देखना ही सबसे सही और सुरक्षित तरीका माना जाता है। कंपनी द्वारा सुझाए गए इन आंकड़ों का पालन करने से गाड़ी का संतुलन बना रहता है और ड्राइविंग का अनुभव भी बेहतर होता है।
विभिन्न कारों के लिए निर्धारित PSI रेंज
हालांकि हर कार के लिए कंपनी अलग आंकड़े देती है, लेकिन सामान्य तौर पर कुछ मानक रेंज तय हैं। छोटी हैचबैक कारों के लिए टायर प्रेशर आमतौर पर 30 से 33 PSI के बीच रखा जाता है। सेडान कारों की बात करें तो इनमें 32 से 35 PSI तक हवा रखना सही माना जाता है। कॉम्पैक्ट SUV श्रेणी की गाड़ियों में 33 से 36 PSI और बड़ी SUV में 35 से 38 PSI तक प्रेशर रखने की सलाह दी जाती है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि आपकी कार के लिए सबसे सही आंकड़ा वही होगा जो आपकी कार निर्माता कंपनी ने आधिकारिक तौर पर सुझाया है।
गर्मी के मौसम का टायर प्रेशर पर प्रभाव
गर्मी के मौसम में टायर प्रेशर को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना बहुत जरूरी हो जाता है। जब कार लंबे समय तक हाईवे या गर्म सड़कों पर चलती है, तो सड़क और टायर के बीच होने वाला घर्षण काफी गर्मी पैदा करता है। इस गर्मी के कारण टायर के अंदर मौजूद हवा फैलने लगती है और विज्ञान के इस नियम के कारण टायर का प्रेशर अपने आप 4 से 6 PSI तक बढ़ सकता है। बाहरी तापमान में होने वाली बढ़ोतरी भी इस दबाव को बढ़ाने में भूमिका निभाती है। यही कारण है कि गर्म मौसम में या लंबी यात्रा के दौरान टायर का प्रेशर सामान्य से काफी ज्यादा दिखाई दे सकता है।
सावधानियां और हवा कम करने की गलती
कई बार लोग सफर के दौरान टायर प्रेशर चेक करते हैं और बढ़ा हुआ आंकड़ा देखकर तुरंत हवा निकाल देते हैं। यह एक बड़ी गलती साबित हो सकती है। गर्म टायर में मापा गया प्रेशर हमेशा वास्तविक दबाव से ज्यादा ही दिखाएगा। इसलिए हवा निकालने या कम करने का फैसला तभी लेना चाहिए जब टायर पूरी तरह से ठंडे हों। अगर बहुत जरूरी हो, तो ही थोड़ा-बहुत प्रेशर कम करें। इसके अलावा, अगर आप पूरी फैमिली और भारी सामान के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो कंपनी द्वारा बताए गए फुल लोड प्रेशर के निर्देशों का पालन करें। ऐसे समय में पीछे के टायरों में सामान्य से कुछ PSI ज्यादा हवा रखना फायदेमंद होता है।
सुरक्षा तकनीक और माइलेज के लाभ
जो लोग व्यस्तता के कारण बार-बार टायर प्रेशर की जांच नहीं कर पाते, उनके लिए TPMS यानी टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम एक बेहतरीन विकल्प है। यह सिस्टम गाड़ी चलाते समय डैशबोर्ड पर टायर का प्रेशर दिखाता रहता है और किसी भी अचानक बदलाव या हवा कम होने पर तुरंत चेतावनी दे देता है। इसके साथ ही, गाड़ी की स्टेपनी या स्पेयर व्हील में भी हमेशा अतिरिक्त हवा भरकर रखनी चाहिए ताकि आपात स्थिति में वह पूरी तरह तैयार मिले। सही टायर प्रेशर बनाए रखना एक छोटी सी आदत है, लेकिन इससे माइलेज बेहतर होता है, टायर जल्दी नहीं घिसते और आपकी ड्राइविंग सुरक्षित बनी रहती है।