AI नौकरी खा जाएगा? गूगल सीईओ सुंदर पिचाई ने छात्रों की चिंता को बताया सही

Add as Preferred Source on Google News
विज्ञापन
AI नौकरी खा जाएगा? गूगल सीईओ सुंदर पिचाई ने छात्रों की चिंता को बताया सही
विज्ञापन

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया भर में चल रही बहस के बीच गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि नौकरियों को लेकर छात्रों और युवाओं के मन में जो चिंताएं हैं, वे पूरी तरह से सही हैं। हाल ही में हार्ड फोर्क पॉडकास्ट को दिए गए एक इंटरव्यू में पिचाई ने कहा कि एआई तकनीक बहुत तेजी से बदलाव ला रही है और लोग इसके संभावित असर को लेकर स्वाभाविक रूप से परेशान हैं। उन्होंने माना कि जब बदलाव इतनी तेजी से होता है, तो इंसान के लिए उसे तुरंत समझना और अपनाना कठिन होता है, जिससे डर का माहौल पैदा होता है। पिचाई के अनुसार, यह तकनीक काम करने के पारंपरिक तरीकों को बदल रही है, जिससे युवाओं में असुरक्षा की भावना पैदा होना स्वाभाविक है।

एआई को लेकर बढ़ता विरोध और पिचाई का नजरिया

पॉडकास्ट के दौरान सुंदर पिचाई से एक दिलचस्प सवाल पूछा गया कि अगर स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में उनके भाषण के दौरान छात्र एआई का विरोध करें, तो उनकी प्रतिक्रिया क्या होगी। यह सवाल हाल के उन विवादों के संदर्भ में था जहां टेक और म्यूजिक इंडस्ट्री की बड़ी हस्तियों को विरोध का सामना करना पड़ा था। उदाहरण के तौर पर, एरिक श्मिट और बिग मशीन रिकॉर्ड्स के सीईओ स्कॉट बोर्चेटा को एआई पर दिए गए उनके बयानों के बाद कड़े विरोध का सामना करना पड़ा था। पिचाई ने इस पर बहुत ही शांत और सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें नई पीढ़ी की क्षमताओं पर पूरा भरोसा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युवाओं का चिंतित होना जायज है क्योंकि वे एक ऐसे समय में करियर शुरू कर रहे हैं जब तकनीक काम के पुराने तरीकों को बदल रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संवाद के जरिए ही इन चिंताओं को दूर किया जा सकता है।

नौकरी के बाजार पर एआई का प्रभाव और बेरोजगारी

बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुंदर पिचाई ने इस बात पर जोर दिया कि एआई का असर अब नौकरी के बाजार में स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। पिछले कुछ महीनों में कई दिग्गज कंपनियों ने अपने यहां की गई छंटनी और संगठनात्मक बदलावों के लिए एआई को एक मुख्य कारण बताया है और आंकड़ों के अनुसार, हाल के महीनों में नए ग्रेजुएट्स के बीच बेरोजगारी की दर 4 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी। पिचाई ने माना कि लोग सही तरीके से चिंतित हैं क्योंकि एआई आने वाले समय में काम करने के हर पहलू को प्रभावित करेगा। हालांकि, उन्होंने एक उम्मीद की किरण भी दिखाई। उनका मानना है कि यही युवा पीढ़ी भविष्य में इस तकनीक को सही दिशा देने और इसके नकारात्मक प्रभावों से निपटने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी। उनके अनुसार, हर बड़ा बदलाव अपने साथ चुनौतियां लाता है, लेकिन नई पीढ़ी में खुद को ढालने की अद्भुत क्षमता होती है और वे भविष्य को बेहतर बना सकते हैं।

टेक इंडस्ट्री की विफलता और जनता का अविश्वास

इंटरव्यू के दौरान सुंदर पिचाई ने एक महत्वपूर्ण बात स्वीकार की कि पूरी टेक इंडस्ट्री अब तक आम लोगों को एआई के वास्तविक फायदे समझाने में पीछे रही है। उन्होंने कहा कि कंपनियों को अब यह साबित करने के लिए और अधिक मेहनत करनी होगी कि यह तकनीक किस तरह से मानव जीवन को बेहतर और सरल बना सकती है। पिचाई ने इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि हर बड़ी तकनीक की शुरुआत में लोग डरे हुए थे, लेकिन बाद में उसी तकनीक ने नवाचार और जीवन स्तर को ऊंचा उठाया। वर्तमान में स्थिति यह है कि आम जनता के बीच एआई को लेकर भरोसे की भारी कमी है। इंटरव्यू में न्यूयॉर्क टाइम्स के एक पोल का भी जिक्र किया गया, जिसमें पाया गया कि केवल 16 प्रतिशत लोगों ने ही एआई को सकारात्मक रूप से देखा, जबकि एक बड़ी आबादी इसे नकारात्मक नजरिए से देखती है। यही कारण है कि अब गूगल जैसी बड़ी कंपनियों पर एआई के विकास में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का दबाव बढ़ रहा है।

सुंदर पिचाई का यह बयान इस मायने में महत्वपूर्ण है कि उन्होंने केवल तकनीक की तारीफ नहीं की, बल्कि उसके साथ जुड़ी मानवीय चिंताओं को भी स्वीकार किया। उन्होंने अंत में यह विश्वास जताया कि भविष्य के युवा न केवल इस तकनीक का उपयोग करेंगे, बल्कि इसे समाज के लिए अधिक उपयोगी और सुरक्षित बनाने का रास्ता भी खोजेंगे और टेक इंडस्ट्री के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती लोगों का विश्वास जीतना और एआई के फायदों को धरातल पर उतारना है ताकि युवाओं के मन से नौकरी जाने का डर खत्म हो सके।

विज्ञापन