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सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की बाबूलाल कटारा की अंतरिम जमानत याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की बाबूलाल कटारा की अंतरिम जमानत याचिका
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नई दिल्ली: राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक करने के आरोपी कटारा की अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। बाबूलाल कटारा पर द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2022 और सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती 2021 के पेपर लीक करने के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मामले दर्ज हैं।

न्यायिक कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अंतरिम राहत देने से मना कर दिया। इससे पहले फरवरी के महीने में शीर्ष अदालत ने सेकंड ग्रेड शिक्षक भर्ती 2022 से जुड़े मामले में कटारा की अंतरिम जमानत याचिका को कुछ शर्तों के साथ मंजूर किया था। हालांकि, उस समय भी वह जेल से रिहा नहीं हो सके थे क्योंकि उनके खिलाफ एसआई भर्ती 2021 पेपर लीक मामला और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग का मामला लंबित था। अदालत ने इन मामलों की जटिलता और जांच की स्थिति को देखते हुए वर्तमान याचिका को खारिज करने का निर्णय लिया है।

राज्य सरकार का कड़ा विरोध और संवैधानिक पद का हवाला

राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बाबूलाल कटारा की जमानत का पुरजोर विरोध किया। सरकारी वकीलों ने तर्क दिया कि कटारा ने आरपीएससी सदस्य जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर रहते हुए अपने पद की गरिमा का उल्लंघन किया है। सरकार के अनुसार, कटारा ने अपने सरकारी आवास का उपयोग प्रश्न पत्र लीक करने के लिए किया, जो एक अत्यंत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और अभियोजन पक्ष ने आशंका जताई कि यदि आरोपी को जमानत दी जाती है, तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। सरकार ने अदालत को बताया कि इस घोटाले से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है, इसलिए आरोपी को किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जानी चाहिए।

पेपर लीक का घटनाक्रम और वित्तीय लेनदेन

जांच एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, बाबूलाल कटारा ने सेकंड ग्रेड शिक्षक भर्ती 2022 का प्रश्न पत्र अपने सरकारी आवास पर ही लीक किया था। जांच में सामने आया कि कटारा ने अपने भांजे विजय डामोर के माध्यम से प्रश्न पत्र को एक रजिस्टर में लिखवाया था। इसके बाद, इस पेपर को सबसे पहले अनिल मीणा को ₹60 लाख में बेचा गया। बाद में इसी प्रश्न पत्र का सौदा भूपेंद्र सारण के साथ ₹80 लाख में तय किया गया था। पुलिस और जांच एजेंसियों ने इस मामले में वित्तीय लेनदेन के पुख्ता सबूत होने का दावा किया है, जिसके आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने भी अपनी जांच शुरू की थी।

उदयपुर बस कांड और जांच का विस्तार

इस पूरे घोटाले का खुलासा 24 दिसंबर 2022 को हुआ था, जब उदयपुर के बेकरिया थाने की पुलिस ने एक संदिग्ध बस को रोका था। इस बस में 49 अभ्यर्थी सवार थे जो परीक्षा केंद्र पहुंचने से पहले ही प्रश्न पत्र के उत्तर याद कर रहे थे। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में यह स्पष्ट हो गया कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही पेपर बाहर आ चुका था। इस घटना के बाद हुई विस्तृत जांच के तार सीधे आरपीएससी सदस्य बाबूलाल कटारा से जुड़े। जांच में पाया गया कि कटारा ने आयोग की गोपनीयता को भंग करते हुए प्रश्न पत्र की प्रति अपने पास रखी और उसे व्यावसायिक लाभ के लिए लीक कर दिया।

ईडी की जांच और एसआई भर्ती मामला

बाबूलाल कटारा की मुश्किलें केवल शिक्षक भर्ती तक सीमित नहीं हैं। उन पर एसआई भर्ती 2021 के पेपर लीक मामले में भी संलिप्तता के आरोप हैं। इसके अतिरिक्त, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पेपर लीक के जरिए अर्जित की गई अवैध संपत्ति के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है और ईडी ने कटारा की संपत्तियों और बैंक खातों की जांच की है ताकि अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) का पता लगाया जा सके। 5 साल से अधिक समय बिता चुके कटारा के मामले में अदालत ने पूर्व में ट्रायल की स्थिति और चार्जशीट पेश होने के संबंध में भी जानकारी मांगी थी। वर्तमान में, विभिन्न मामलों में चल रही समानांतर जांच के कारण उनकी कानूनी चुनौतियां बनी हुई हैं।

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