पश्चिम बंगाल की सियासत में नया तूफान: सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को भेजा कानूनी नोटिस, 72 घंटे में मांगे सबूत
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक जंग तेज हो गई है। राज्य के नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक कड़ा कानूनी नोटिस भेजा है। यह नोटिस कोयला तस्करी (कोल स्मगलिंग) मामले में लगाए गए गंभीर आरोपों से जुड़ा है। सुवेंदु ने ममता से 72 घंटे के अंदर अपने दावों के ठोस सबूत पेश करने की मांग की है। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो वे मानहानि (डिफेमेशन) का मुकदमा दायर करेंगे।
सब कुछ 8 जनवरी 2026 को शुरू हुआ, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने TMC से जुड़ी पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के कोलकाता स्थित दफ्तर और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की। ED का दावा है कि यह छापेमारी कोयला तस्करी सिंडिकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में थी। जांच में पता चला कि 2017-2020 के बीच कोयला तस्करी से करीब 2,742 करोड़ रुपये का नकद कोष बना, जिसमें से लगभग 20 करोड़ रुपये हवाला के जरिए I-PAC तक पहुंचे।
ममता बनर्जी ने खुद छापेमारी के दौरान मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप किया। उन्होंने दावा किया कि ED TMC की चुनावी रणनीति, कैंडिडेट लिस्ट और अन्य गोपनीय दस्तावेज चुराने की कोशिश कर रहा था। इसके विरोध में उन्होंने दो FIR दर्ज कराईं और कोलकाता में बड़ा मार्च भी निकाला।
रैली में ममता ने भड़काऊ बयान दिए:
ममता ने कहा, "मैं संवैधानिक पद पर हूं, इसलिए चुप हूं। लेकिन अगर हद पार हुई, तो सब बेनकाब कर दूंगी।"
सुवेंदु अधिकारी ने इसे ED जांच से ध्यान भटकाने की साजिश बताया। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया:
"आज CM ममता बनर्जी ने ED की जांच से ध्यान भटकाने की कोशिश में मेरे खिलाफ बिल्कुल निराधार मानहानिकारक आरोप लगाए और मुझे केंद्रीय गृह मंत्री के साथ कोयला घोटाले से जोड़ा। ये लापरवाह बयान... बिना किसी सबूत के दिए गए। मैंने उन्हें कानूनी नोटिस भेजा है जिसमें 72 घंटे के भीतर सभी सबूत प्रदान करने की मांग की है। अगर विफल रहीं, तो मानहानि का केस करूंगा।"
नोटिस वकील सूर्यनील दास के जरिए भेजा गया है। इसमें ममता के बयानों को "लापरवाह, बेबुनियाद और पूरी तरह असत्यापित" बताया गया है।
इस मामले में ED और TMC ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल कीं। ED ने ममता पर जांच में बाधा डालने और सबूत हाईजैक करने का आरोप लगाया, CBI जांच की मांग की। दूसरी तरफ TMC ने ED पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई का इल्जाम लगाया।
9 जनवरी को जस्टिस शुभ्रा घोष की बेंच में सुनवाई होनी थी, लेकिन कोर्टरूम में भारी भीड़ और वकीलों के बीच धक्का-मुक्की के कारण हंगामा मच गया। जज ने कोर्ट खाली करने को कहा, लेकिन नहीं माना गया। आखिरकार परेशान होकर जज ने सुनवाई 14 जनवरी तक टाल दी और कोर्ट छोड़ गईं।
यह घटनाक्रम 2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हो रहा है, जब TMC और BJP के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही है। सुवेंदु अधिकारी का यह नोटिस राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर दबाव बनाने की कोशिश है। अगर ममता 72 घंटे में सबूत नहीं देतीं, तो मानहानि का मुकदमा और भी बड़ा विवाद खड़ा कर सकता है।
दूसरी तरफ, ममता बार-बार केंद्रीय एजेंसियों पर "BJP के दलाल" होने का आरोप लगा रही हैं और बंगाल की जनता से "संघर्ष" जारी रखने की अपील कर रही हैं।