पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले ही राज्य में राजनीतिक समीकरण बदलने लगे हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व नेता और अब जनता उन्नयन पार्टी (JUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर ने राज्य में एक 'तीसरे मोर्चे' के गठन की घोषणा कर दी है। मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कबीर ने सत्तारूढ़ टीएमसी और मुख्य विपक्षी दल भाजपा दोनों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने चुनावी आंकड़ों का दावा करते हुए कहा कि वह आगामी चुनावों में भाजपा को 100 सीटों और टीएमसी को 50 सीटों का आंकड़ा भी पार नहीं करने देंगे।
गठबंधन की नई रणनीति और AIMIM का साथ
हुमायूं कबीर की इस मेगा एलायंस रैली में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की उपस्थिति ने नए राजनीतिक संकेत दिए हैं। रैली के मंच पर AIMIM की बंगाल इकाई के अध्यक्ष इमरान सोलंकी भी नजर आए। कबीर ने स्पष्ट किया कि वह ईद के बाद ब्रिगेड मैदान में एक बड़ी रैली करेंगे, जिसमें असदुद्दीन ओवैसी के शामिल होने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके गठबंधन के दरवाजे इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) के लिए भी खुले हैं, जिससे राज्य में एक मजबूत अल्पसंख्यक केंद्रित मोर्चे की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
चुनावी वादे और लक्ष्मी भंडार पर कटाक्ष
रैली के दौरान हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी सरकार की महत्वाकांक्षी 'लक्ष्मी भंडार' योजना पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने घोषणा की कि यदि उनका मोर्चा सत्ता में आता है या प्रभावी भूमिका निभाता है, तो पश्चिम बंगाल की महिलाओं को दी जाने वाली सहायता राशि को बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह किया जाएगा। कबीर ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने राज्य के विकास के लिए पर्याप्त कार्य नहीं किए हैं और अब समय आ गया है कि जनता एक नए विकल्प को चुने।
मुस्लिम वोट बैंक और अभिषेक बनर्जी को चुनौती
82 करोड़ मुस्लिम मतदाता हैं, जो चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने टीएमसी के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि कई दल उनके साथ आने को तैयार हैं। इसके साथ ही उन्होंने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को भी चुनौती दी। कबीर ने कहा कि अभिषेक बनर्जी जहां भी रैली करेंगे, वह भी उसी स्थान पर अपनी जनसभा आयोजित कर उन्हें टक्कर देंगे।
विश्लेषकों का दृष्टिकोण और राजनीतिक प्रभाव
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हुमायूं कबीर द्वारा तीसरे मोर्चे का गठन और AIMIM के साथ उनकी नजदीकी टीएमसी के लिए चिंता का विषय बन सकती है। पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यक वोट बैंक पारंपरिक रूप से टीएमसी का मजबूत आधार रहा है। यदि यह वोट बैंक विभाजित होता है, तो इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है और हालांकि, भाजपा के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है क्योंकि कबीर ने भाजपा की बढ़त को रोकने का भी संकल्प लिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह गठबंधन धरातल पर कितना प्रभावी साबित होता है।