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पश्चिम बंगाल: चुनाव आयोग ने DGP और 4 IPS अधिकारियों का किया तबादला

पश्चिम बंगाल: चुनाव आयोग ने DGP और 4 IPS अधिकारियों का किया तबादला
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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों की निष्पक्षता और शांतिपूर्ण संचालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा फेरबदल किया है। चुनाव आयोग ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) और कोलकाता पुलिस आयुक्त सहित चार वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के स्थानांतरण का आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई मुख्य सचिव और गृह सचिव को उनके पदों से हटाए जाने के ठीक एक दिन बाद की गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह स्पष्ट किया था कि आयोग पश्चिम बंगाल में हिंसा मुक्त और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण का विवरण

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आधिकारिक निर्देशों के अनुसार, 1992 बैच के IPS अधिकारी सिद्ध नाथ गुप्ता को पश्चिम बंगाल सरकार में महानिदेशक एवं सूचना एवं पुलिस प्रमुख (प्रभारी) के पद पर तैनात किया गया है। इसी क्रम में, 1991 बैच के IPS अधिकारी नटराजन रमेश बाबू को सुधारात्मक सेवाओं के महानिदेशक के रूप में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। आयोग ने कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 1995 बैच के IPS अधिकारी अजय मुकुंद रानाडे को उप महानिदेशक एवं सूचना एवं पुलिस प्रमुख (कानून एवं व्यवस्था) के पद पर नियुक्त किया है। इसके अतिरिक्त, 1996 बैच के IPS अधिकारी अजय कुमार नंद को कोलकाता का नया पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है। आयोग ने इन निर्देशों को तत्काल प्रभाव से लागू करने और 16 मार्च तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

मुख्य सचिव और गृह सचिव पर आयोग की कार्रवाई

पुलिस विभाग में फेरबदल से पहले, निर्वाचन आयोग ने ममता बनर्जी प्रशासन के दो सबसे शीर्ष पदों पर कार्यरत अधिकारियों को हटा दिया था। आयोग ने मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को उनके पद से मुक्त कर दिया और उनके स्थान पर 1993 बैच के IAS अधिकारी दुष्यंत नारियाला को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि नंदिनी चक्रवर्ती को चुनाव से संबंधित किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कार्य से दूर रखा जाएगा और इसी प्रकार, पश्चिम बंगाल के गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को भी उनके पद से हटा दिया गया है। उनके स्थान पर 1997 बैच की IAS अधिकारी संघमित्रा घोष को गृह और पहाड़ी मामलों का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है।

शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने की रणनीति

निर्वाचन आयोग की यह कार्रवाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के उस आश्वासन के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की बात कही थी और आयोग के अनुसार, संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने और प्रशासनिक तटस्थता बनाए रखने के लिए यह बदलाव आवश्यक थे। आयोग ने राज्य सरकार को स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही या पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इन तबादलों का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर कानून व्यवस्था को नियंत्रित करना और मतदाताओं में सुरक्षा की भावना पैदा करना है।

प्रशासनिक फेरबदल और आगामी चुनावी प्रक्रिया

राज्य में चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद से ही निर्वाचन आयोग सक्रिय मोड में है। रविवार रात (15 मार्च, 2026) को राज्य सरकार को भेजे गए पत्र में आयोग ने नए अधिकारियों की नियुक्ति के साथ-साथ पुराने अधिकारियों को चुनावी ड्यूटी से अलग रखने के सख्त निर्देश दिए हैं। आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि नए नियुक्त अधिकारी तत्काल अपना कार्यभार संभालें ताकि चुनावी तैयारियों में कोई बाधा न आए। पश्चिम बंगाल में बहु-चरणीय मतदान के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती और स्थानीय पुलिस के समन्वय की जिम्मेदारी अब इन नए अधिकारियों के कंधों पर होगी। आयोग आने वाले दिनों में अन्य संवेदनशील पदों पर भी इसी तरह के बदलाव कर सकता है।

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