उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं और प्रयागराज की झूंसी थाना पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ यौन शोषण के गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज की है। यह कानूनी कार्रवाई विशेष पॉक्सो कोर्ट के आदेश के बाद अमल में लाई गई है। पुलिस ने इस मामले में पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 समेत भारतीय दंड संहिता की अन्य सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। यह मामला दो नाबालिगों के साथ कथित तौर पर हुए यौन उत्पीड़न से जुड़ा है, जिसके बाद धार्मिक गलियारों और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है।
अदालत के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुआ मामला
इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया सीधे तौर पर पुलिस द्वारा शुरू नहीं की गई थी, बल्कि इसके लिए अदालती हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ितों की ओर से एफआईआर दर्ज कराने के लिए पहले झूंसी थाने में तहरीर दी गई थी, लेकिन जब पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया, तो शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। 28 जनवरी को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(4) के तहत जिला अदालत में एक अर्जी दाखिल की गई थी। इस अर्जी पर सुनवाई करते हुए एडीजे रेप एंड पॉक्सो स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने 21 फरवरी को अपना फैसला सुनाया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करने और नियमानुसार जांच शुरू करने का आदेश दिया था।
गुरुकुल की आड़ में बाल उत्पीड़न के आरोप
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी, जो तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य हैं, ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर और गुरुकुल की आड़ में नाबालिग बच्चों का यौन शोषण किया जाता था। आशुतोष ब्रह्मचारी ने 8 फरवरी को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने विस्तार से बताया कि किस प्रकार गुरुकुल जैसी पवित्र संस्था का दुरुपयोग बाल उत्पीड़न के लिए किया जा रहा था। एफआईआर में दो विशिष्ट नाबालिग पीड़ितों का उल्लेख किया गया है, जिनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार हुआ।
मुकुंदानंद ब्रह्मचारी का नाम भी एफआईआर में शामिल
पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में केवल स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ही अकेले आरोपी नहीं हैं। इसमें उनके करीबी शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को भी नामजद किया गया है और आरोपों के अनुसार, मुकुंदानंद ब्रह्मचारी की भूमिका भी इन कथित घटनाओं में संदिग्ध पाई गई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन गतिविधियों के बारे में प्रबंधन को जानकारी थी, फिर भी कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए। अब पुलिस मुकुंदानंद ब्रह्मचारी की भूमिका की भी गहनता से जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या वह इन कृत्यों में सीधे तौर पर शामिल थे या उन्होंने साक्ष्यों को छिपाने का प्रयास किया था।
पुलिस की आगामी जांच और कानूनी प्रक्रिया
एडीजे पॉक्सो कोर्ट के आदेश के अनुपालन में झूंसी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और अब विवेचना की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में सबसे पहले पीड़ितों के बयान दर्ज किए जाएंगे और पॉक्सो एक्ट के तहत होने वाली जांच में पीड़ितों के मजिस्ट्रेट के सामने बयान (धारा 164 के तहत) अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इसके साथ ही, पुलिस उन स्थानों का निरीक्षण भी करेगी जहां ये कथित घटनाएं घटित हुई थीं। सूत्रों का कहना है कि जांच के अगले चरण में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया जा सकता है। पुलिस इस मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य और गवाहों के बयानों को संकलित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
धार्मिक और सामाजिक हलकों में प्रतिक्रिया
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जैसे प्रभावशाली व्यक्तित्व के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज होना एक बड़ी घटना मानी जा रही है। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने अदालत में दिए अपने तर्कों में स्पष्ट किया है कि वह न्याय की मांग कर रहे हैं और बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और दूसरी ओर, इस एफआईआर के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों और कानूनी टीम की ओर से अभी विस्तृत आधिकारिक बयान आना बाकी है। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वह पूरी तरह से निष्पक्ष जांच करेगी और अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।