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बांग्लादेश: तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, बीएनपी में जश्न

बांग्लादेश: तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, बीएनपी में जश्न
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बांग्लादेश में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत हुई है। बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) के नेता तारिक रहमान ने आधिकारिक तौर पर देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। यह घटनाक्रम सोमवार को अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के अपने पद से इस्तीफा देने के बाद हुआ है। ढाका में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही देश में महीनों से चली आ रही राजनीतिक अनिश्चितता का अंत हो गया है। अधिकारियों के अनुसार, नई सरकार अब देश के प्रशासनिक कार्यों का पूर्ण उत्तरदायित्व संभालेगी।

सत्ता का हस्तांतरण और मोहम्मद यूनुस का इस्तीफा

सोमवार को अंतरिम नेता मोहम्मद यूनुस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और नवनिर्वाचित सरकार को सत्ता की बागडोर सौंप दी। पद छोड़ते समय यूनुस ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंतरिम सरकार अपना कार्य पूरा कर चुकी है और अब निर्वाचित प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे देश को आगे ले जाएं। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद यूनुस ने मुख्य सलाहकार के रूप में कमान संभाली थी।

संसदीय चुनाव परिणाम और बीएनपी का प्रदर्शन

हाल ही में संपन्न हुए 13वें संसदीय चुनावों में बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) ने प्रचंड बहुमत हासिल किया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 297 सीटों में से बीएनपी ने 209 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, दक्षिणपंथी दल जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटों पर कब्जा किया। उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को इन चुनावों में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया था। तारिक रहमान ने स्वयं ढाका-17 और बोगरा-6 सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों ही स्थानों पर बड़े अंतर से जीत हासिल की।

तारिक रहमान की राजनीतिक पृष्ठभूमि और विरासत

20 नवंबर 1965 को ढाका में जन्मे तारिक रहमान एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वह बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जिया-उर-रहमान के पुत्र हैं। तारिक रहमान का राजनीति में प्रवेश 1990 के दशक में हुआ था। 1991 के चुनावों में अपनी मां खालिदा जिया को सत्ता में लाने के लिए उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह लगभग 36 वर्षों के अंतराल के बाद बांग्लादेश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री बने हैं।

निर्वासन और कानूनी संघर्ष का लंबा दौर

तारिक रहमान का प्रधानमंत्री पद तक का सफर चुनौतियों से भरा रहा है। उन्होंने लगभग 17 साल लंदन में निर्वासन में बिताए। शेख हसीना के शासनकाल के दौरान उन पर कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे और एक मामले में उन्हें मृत्युदंड की सजा भी सुनाई गई थी और निर्वासन के दौरान उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं, विशेषकर रीढ़ की हड्डी की तकलीफ का सामना करना पड़ा। हालांकि, 2024 के छात्र आंदोलन और शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद उनके लिए वापसी का मार्ग प्रशस्त हुआ।

स्वदेश वापसी और नई सरकार का गठन

मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान तारिक रहमान के खिलाफ चल रहे कई कानूनी मुकदमों को रद्द कर दिया गया। दिसंबर 2025 में उन्होंने लंदन से बांग्लादेश लौटने की घोषणा की। उनके ढाका पहुंचने के समय ही उनकी मां खालिदा जिया का निधन हो गया, जो बीएनपी के लिए एक बड़ा भावनात्मक क्षण था। अब प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद तारिक रहमान के सामने देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और कानून व्यवस्था को बहाल करने की बड़ी चुनौतियां हैं।

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