Bihar Politics: 'लोक' हारा और तंत्र जीता: तेजस्वी यादव का नीतीश सरकार को 100 दिन का अल्टीमेटम
Bihar Politics - 'लोक' हारा और तंत्र जीता: तेजस्वी यादव का नीतीश सरकार को 100 दिन का अल्टीमेटम
करीब 100 दिन के लंबे अंतराल के बाद पटना लौटे राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने अपनी वापसी के साथ ही अपने पुराने आक्रामक तेवर दिखाए,. जिससे बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है. तेजस्वी यादव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कहीं और मौजूदा सरकार को 100 दिन का अल्टीमेटम भी दिया है.
नीतीश सरकार पर गंभीर आरोप
तेजस्वी यादव ने पिछले विधानसभा चुनाव के परिणामों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले चुनाव में लोकतंत्र में 'लोक' की हार हुई और 'तंत्र' की जीत हुई. उन्होंने आरोप लगाया कि जनतंत्र को धन तंत्र और मशीन तंत्र में बदल दिया गया है. यह बयान मौजूदा सरकार की वैधता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सीधा हमला है. तेजस्वी ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें पता है कि किस तरह का षड्यंत्र रचा गया और किस तरह छल-कपट से ये चुनाव जीते गए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नई सरकार का गठन कैसे हुआ है, यह सब जानते हैं, लेकिन फिर भी उन्होंने सरकार को अपनी नीतियों और निर्णयों को साबित करने का मौका देने का फैसला किया है.लंबे समय तक अनुपस्थिति पर सवाल
आरजेडी नेता ने नीतीश सरकार को 100 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा. कि वह इस अवधि में सरकार के निर्णयों और नीतियों पर कुछ नहीं बोलेंगे. उन्होंने कहा कि वह देखेंगे कि इन 100 दिनों में माताओं, बहनों और युवाओं को क्या मिलता है. तेजस्वी ने विशेष रूप से 1 करोड़ नौजवानों को नौकरी देने के वादे का जिक्र किया और पूछा कि ये नौकरियां कब मिलेंगी और उन्होंने सरकार की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि जो घोषणापत्र इन्होंने जारी किया है, उसे धरातल पर अमल करने का काम करें. यह अल्टीमेटम सरकार पर अपने चुनावी वादों को पूरा करने का दबाव बनाने की एक स्पष्ट रणनीति प्रतीत होती है.
तेजस्वी यादव करीब एक महीने से ज्यादा समय और लगभग 100 दिन बाद पटना लौटे हैं. बिहार चुनाव में मिली हार के बाद से उनकी अनुपस्थिति पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) सहित विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए थे. उनकी गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दिया था. उनकी वापसी ऐसे समय में हुई है जब पार्टी और परिवार दोनों ही मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं, जिससे उनकी वापसी का महत्व और बढ़ जाता है.आरजेडी का चुनावी प्रदर्शन और नेतृत्व की चुनौतियां
पिछले विधानसभा चुनाव में आरजेडी को केवल 25 सीटें मिली थीं, जिससे तेजस्वी यादव के लिए नेता प्रतिपक्ष बनना भी मुश्किल हो सकता था, अगर एक भी सीट कम आती. यह प्रदर्शन पार्टी के लिए एक बड़ा झटका था. उनकी अनुपस्थिति के दौरान पार्टी के भीतर भी कई बयानबाजियां हुईं, जिससे आंतरिक कलह की खबरें सामने आईं. इस बीच, कांग्रेस ने भी 'एकला चलो' का राग अलापना शुरू कर दिया है, जो आरजेडी के लिए गठबंधन की राजनीति में एक नई चुनौती पेश कर रहा है. ये सभी कारक तेजस्वी के नेतृत्व के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो रहे हैं.परिवार और पार्टी के लिए बड़ी चुनौती
तेजस्वी यादव के लिए इस समय पार्टी और परिवार दोनों ही एक बड़ी चुनौती के मोड़ पर खड़े हैं. चुनावी हार के बाद पार्टी के मनोबल को फिर से उठाना, आंतरिक असंतोष को दूर करना और गठबंधन सहयोगियों के साथ संबंधों को मजबूत करना उनके सामने प्रमुख कार्य हैं और इसके साथ ही, परिवार से जुड़ी मुश्किलें भी उनके लिए एक अतिरिक्त दबाव का कारण बन सकती हैं. इन परिस्थितियों में, यह उम्मीद की जा रही है कि तेजस्वी अब एक अलग तेवर में दिखेंगे और पार्टी के संगठन में भी बदलाव के आसार लग रहे हैं, जिससे आरजेडी को एक नई दिशा मिल सके.