टीएमसी में बड़ी बगावत: बागी गुट ने दिल्ली दफ्तर पर ठोका दावा, लोकसभा में अलग गुट की तैयारी

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टीएमसी में बड़ी बगावत: बागी गुट ने दिल्ली दफ्तर पर ठोका दावा, लोकसभा में अलग गुट की तैयारी
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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की लहर अब एक बड़ी बगावत का रूप ले चुकी है। यह बागी तेवर केवल राज्य की विधानसभा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अब देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गए हैं। पार्टी के भीतर मचे इस घमासान के बीच अब खबर आ रही है कि टीएमसी का दिल्ली स्थित आधिकारिक दफ्तर भी उसके हाथ से निकल सकता है। बागी गुट ने अब इस दफ्तर पर अपना दावा ठोक दिया है, जिससे पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

दिल्ली दफ्तर को लेकर छिड़ी जंग

टीएमसी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बागी सांसद पार्थो भौमिक ने पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने दिल्ली स्थित पार्टी दफ्तर को खाली करने की मांग की है। आपको बता दें कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का दिल्ली कार्यालय 20 राजेंद्र प्रसाद रोड पर स्थित है, जो कि पार्थो भौमिक का सरकारी आवास है। भौमिक वर्तमान में बागी गुट के एक सक्रिय सदस्य हैं और उन्होंने अब अपने आवास से पार्टी की गतिविधियों को रोकने के लिए कदम उठाया है और इस कदम को पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे दिल्ली में पार्टी की आधारभूत संरचना प्रभावित होगी।

लोकसभा में भी बगावत की गूंज

पार्टी में फूट का असर अब संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में भी साफ दिखाई दे रहा है। हाल ही में टीएमसी के कई बागी सांसदों ने केंद्रीय मंत्री और पार्टी पर्यवेक्षक भूपेंद्र यादव के आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे। इस बैठक के बाद पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक औपचारिक पत्र सौंपा। इस पत्र में दावा किया गया है कि टीएमसी के 20 सांसदों ने एक अलग गुट बनाने का निर्णय लिया है।

लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं, जिनमें से 20 सांसदों के हस्ताक्षर इस पत्र पर होने का दावा किया गया है। हालांकि अभी सभी नामों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इसमें काकोली घोष दस्तीदार के साथ-साथ पार्थो भौमिक, प्रसून बनर्जी, असित माल, शर्मिला सरकार, जगदीश बसुनिया, कालीपद सोरेन, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी और देव जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं और इससे पहले सोमवार को राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने भी सांसद पद और पार्टी से इस्तीफा देकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी, जिससे पार्टी की स्थिति और कमजोर हुई है।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पर कानूनी लड़ाई

पार्टी का आंतरिक विवाद अब कलकत्ता हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है। टीएमसी ने विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस के उस फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिसमें उन्होंने बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) के रूप में मान्यता दी है। पार्टी का आरोप है कि स्पीकर का यह फैसला संसदीय परंपराओं और स्थापित नियमों के पूरी तरह खिलाफ है। सीनियर एडवोकेट सिरसन्या बंदोपाध्याय द्वारा दाखिल इस याचिका पर कल गुरुवार 11 जून को जस्टिस कृष्णा राव की सिंगल बेंच में सुनवाई होने की संभावना है।

अपनी याचिका में पार्टी ने मांग की है कि कोर्ट स्पीकर बोस के फैसले की न्यायिक समीक्षा करे। साथ ही, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा नामित वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी जाए। टीएमसी का तर्क है कि पार्टी से निष्कासित व्यक्ति को नेता प्रतिपक्ष बनाना लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है और यह सदन की गरिमा के विपरीत है।

विधायकों का गणित और बागी गुट का दबदबा

विधानसभा में बागी गुट की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन किया है। ऋतब्रत को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित कर दिया गया था, लेकिन निष्कासन के महज 2 दिन बाद ही उन्होंने 58 विधायकों के समर्थन के साथ सदन में अपना दावा पेश कर दिया। इसके अलावा, एक अन्य निष्कासित विधायक संदीपन साहा को स्पीकर ने सहायक नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी है। यह आंकड़े बताते हैं कि पार्टी के भीतर नेतृत्व के प्रति असंतोष कितना गहरा है और यह आने वाले समय में टीएमसी के राजनीतिक भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

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