TRAI का बड़ा फैसला: अब मिलेंगे सिर्फ कॉलिंग वाले सस्ते प्लान, वोडाफोन आइडिया के शेयरों में उछाल

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TRAI का बड़ा फैसला: अब मिलेंगे सिर्फ कॉलिंग वाले सस्ते प्लान, वोडाफोन आइडिया के शेयरों में उछाल
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भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने मोबाइल उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को ट्राई ने टेलीकॉम कंज्यूमर प्रोटेक्शन (तेरहवां संशोधन) रेगुलेशन, 2026 जारी किया है। इस नए नियम के तहत अब सभी टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे ग्राहकों को विशेष रूप से वॉयस और एसएमएस के लिए अधिक स्पेशल टैरिफ वाउचर (STV) उपलब्ध कराएं। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य उन ग्राहकों को सस्ते विकल्प देना है जिन्हें इंटरनेट या डेटा की आवश्यकता नहीं होती है और जो केवल कॉलिंग और मैसेजिंग सेवाओं का उपयोग करना चाहते हैं।

वॉयस और एसएमएस वाउचर की कमी को दूर करने की कोशिश

ट्राई ने अपने विश्लेषण में पाया कि वर्तमान में बाजार में सिर्फ वॉयस और एसएमएस वाले स्पेशल टैरिफ वाउचर की उपलब्धता काफी सीमित थी। विशेष रूप से कम समय वाली वैलिडिटी के विकल्पों की भारी कमी देखी गई थी। ज्यादातर उपलब्ध वाउचर लंबी वैलिडिटी वाले थे, जिसके कारण कम आय वाले ग्राहकों के लिए कम कीमत में रिचार्ज करना मुश्किल हो रहा था। ट्राई के इस नए फैसले से अब ग्राहकों को अपनी जरूरतों और आर्थिक क्षमता के हिसाब से रिचार्ज प्लान चुनने में काफी आसानी होगी। अब कंपनियों को अलग-अलग वैलिडिटी वाले वॉयस और एसएमएस वाउचर देने होंगे ताकि हर वर्ग का ग्राहक इसका लाभ उठा सके।

परामर्श प्रक्रिया और फीडबैक का महत्व

इस रेगुलेशन को अंतिम रूप देने से पहले ट्राई ने एक विस्तृत परामर्श प्रक्रिया का पालन किया। ट्राई ने 7 अप्रैल 2026 को इस संशोधन का एक ड्राफ्ट सलाह-मशविरे के लिए जारी किया था। इस ड्राफ्ट पर विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से ट्राई को कुल 1132 जवाब प्राप्त हुए। इन सुझावों और फीडबैक पर गहराई से विचार करने के बाद, 15 जून को एक ओपन हाउस डिस्कशन का आयोजन किया गया था। इन सभी चर्चाओं और प्राप्त प्रतिक्रियाओं के आधार पर ही टेलीकॉम कंज्यूमर प्रोटेक्शन (तेरहवां संशोधन) रेगुलेशन, 2026 को तैयार किया गया है।

नए नियमों की मुख्य विशेषताएं

संशोधित नियमों के अनुसार, टेलीकॉम कंपनियों को अब सिर्फ वॉयस और एसएमएस वाले ऐसे एसटीवी देने होंगे जिनके टैरिफ में उचित कटौती की गई हो और यह नियम विशेष रूप से उन वैलिडिटी पीरियड (30 दिन या उससे कम) के लिए लागू होगा जिनके लिए कंपनियां वर्तमान में वॉयस, एसएमएस और डेटा वाले कॉम्बो प्लान देती हैं। इसके अलावा, ऑपरेटर्स को कम से कम एक ऐसा वॉयस और एसएमएस वाला एसटीवी देना होगा जिसकी वैलिडिटी हर महीने उसी तारीख को रिन्यू हो सके। यदि किसी महीने में वह तारीख नहीं आती है, तो रिन्यूअल की तारीख उस महीने का आखिरी दिन मानी जाएगी। साथ ही, कंपनियों को एक ऐसा वॉयस और एसएमएस वाला प्लान भी देना होगा जिसकी वैलिडिटी उनके मौजूदा डेटा वाले प्लान के बराबर हो।

शेयर बाजार पर असर और कंपनियों का प्रदर्शन

ट्राई के इस फैसले की खबर आते ही शेयर बाजार में हलचल तेज हो गई। वोडाफोन आइडिया के शेयरों में करीब 3 फीसदी की तेजी देखने को मिली और यह 14 रुपये 26 पैसे पर बंद हुआ। निवेशकों को उम्मीद है कि इस फैसले से वोडाफोन आइडिया के कम आय वाले ग्राहकों का आधार मजबूत होगा। दूसरी ओर, भारती एयरटेल के शेयरों में 0 दशमलव 87 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 1817 रुपये पर बंद हुआ। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब कंपनियां अपने प्रति यूजर औसत रेवेन्यू (ARPU) को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

बढ़ते टैरिफ और एआरपीयू का संदर्भ

टेलीकॉम कंपनियां लगातार अपनी कमाई बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर, भारती एयरटेल ने अगस्त के महीने में अपने कुछ अनलिमिटेड डेली-डेटा प्रीपेड प्लान की शुरुआती कीमत 299 रुपये से बढ़ाकर 349 रुपये कर दी थी। जून तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी का मोबाइल एआरपीयू 264 रुपये दर्ज किया गया था, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 250 रुपये था। ट्राई का मानना है कि नया टैरिफ फ्रेमवर्क उन ग्राहकों के लिए बेहतर विकल्प प्रदान करेगा जो डेटा का उपयोग नहीं करना चाहते और केवल बुनियादी संचार सेवाओं पर निर्भर हैं। इससे कम आय वाले ग्राहकों को अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार रिचार्ज करने की आजादी मिलेगी।

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