अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम में दावा किया है कि भारत अब ईरान से कच्चा तेल खरीदने के बजाय वेनेजुएला से तेल आयात करेगा। वॉशिंगटन डीसी से एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने कहा कि भारत के साथ इस संबंध में एक समझौता पहले ही तय हो चुका है। हालांकि, भारत सरकार की ओर से इस दावे पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या प्रतिक्रिया साझा नहीं की गई है। ट्रम्प के अनुसार, इस सौदे का कॉन्सेप्ट तैयार है और चीन को भी वेनेजुएला के साथ इसी तरह के सौदे के लिए आमंत्रित किया गया है।
भारत और वेनेजुएला के बीच हालिया कूटनीतिक संवाद
ट्रम्प का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 30 जनवरी को वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के साथ की गई टेलीफोनिक बातचीत के ठीक बाद आया है। इस संवाद के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी थी कि दोनों देश अपनी साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के साझा विजन के साथ आगे बढ़ रहे हैं और विश्लेषकों के अनुसार, यह उच्च-स्तरीय संवाद ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में नए समीकरणों की ओर संकेत करता है।
वेनेजुएला पर अमेरिकी प्रतिबंधों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
भारत और वेनेजुएला के बीच तेल व्यापार का इतिहास प्रतिबंधों और कूटनीतिक उतार-चढ़ाव से भरा रहा है और वर्ष 2019 में अमेरिका ने वेनेजुएला पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, जिसमें सेकेंडरी सेंक्शंस भी शामिल थे। इन प्रतिबंधों के कारण वेनेजुएला से तेल खरीदने वाले देशों को अमेरिकी बैंकिंग प्रणाली और बाजार से बाहर होने का जोखिम था। इसके परिणामस्वरूप, भारत ने वेनेजुएला से तेल आयात बंद कर दिया था, जो उस समय भारत के कुल तेल आयात का लगभग 6% था। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, लेकिन प्रतिबंधों के कारण वैश्विक आपूर्ति में इसकी हिस्सेदारी सीमित रही है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज और अमेरिकी लाइसेंस की प्रक्रिया
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की निजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने के लिए अमेरिकी प्रशासन से विशेष अनुमति मांगी है। रिलायंस, जो गुजरात में दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स संचालित करती है, अपनी तेल आपूर्ति श्रृंखला को विविधता प्रदान करना चाहती है। 2025 के शुरुआती महीनों में रिलायंस ने वेनेजुएला से लगभग 63,000 बैरल प्रतिदिन तेल का आयात किया था, लेकिन मई 2025 में अमेरिकी सख्ती के बाद इसे रोकना पड़ा था। कंपनी के प्रतिनिधि वर्तमान में अमेरिकी विदेश विभाग और ट्रेजरी विभाग के साथ लाइसेंस प्राप्त करने के लिए चर्चा कर रहे हैं।
ऊर्जा बाजार पर प्रभाव और विश्लेषकों का दृष्टिकोण
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत द्वारा वेनेजुएला से तेल खरीदने का निर्णय वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति के स्रोतों को संतुलित करने की एक रणनीति हो सकती है। पश्चिमी देशों द्वारा रूस से तेल आयात कम करने के दबाव के बीच, वेनेजुएला एक वैकल्पिक स्रोत के रूप में उभर रहा है। ट्रम्प ने यह भी उल्लेख किया है कि वेनेजुएला अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल तेल सौंपेगा, जिसकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग ₹25,000 करोड़ है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह सौदा प्रभावी होता है, तो यह दक्षिण एशिया और अमेरिका के बीच ऊर्जा कूटनीति के एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है।
निष्कर्ष और वर्तमान स्थिति
वर्तमान में, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। वेनेजुएला से तेल आयात की बहाली न केवल रिलायंस जैसी रिफाइनिंग कंपनियों के लिए फायदेमंद हो सकती है, बल्कि यह भारत की समग्र ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती प्रदान कर सकती है और हालांकि, इस पूरे मामले में अमेरिकी प्रतिबंधों की स्पष्टता और भारत सरकार का आधिकारिक रुख सबसे महत्वपूर्ण कारक होगा। फिलहाल, वैश्विक बाजार की नजरें इस संभावित सौदे के कार्यान्वयन और इसके भू-राजनीतिक परिणामों पर टिकी हैं।