अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दो बड़े और महत्वपूर्ण दावे किए हैं और ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि ईरान जैसा देश अब अमेरिका के साथ बहुत जल्द और बेहद बेताबी से एक समझौता करना चाहता है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान वाशिंगटन के साथ जल्दी और बुरी तरह से एक एग्रीमेंट करने की कोशिश में है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि अमेरिका तेहरान के साथ बातचीत की मेज पर बैठेगा या नहीं, इसका अंतिम फैसला वह खुद करेंगे और ट्रंप के अनुसार, यह एक ऐसा विचार है जिसके लिए वे तैयार हैं, लेकिन पूरी प्रक्रिया उनके नियंत्रण में रहेगी।
ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक उतार-चढ़ाव
ईरान के साथ इस संभावित समझौते की पृष्ठभूमि काफी जटिल रही है और इस साल फरवरी के महीने में तेहरान ने पूरे क्षेत्र में इजराइल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की थी, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया था। इसके बाद, जून के महीने में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता के माध्यम से वाशिंगटन और तेहरान के बीच इस्लामाबाद समझौते पर सहमति बनी थी। लेकिन यह समझौता लंबे समय तक प्रभावी नहीं रह सका क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद पैदा हो गए, जिसके कारण इसे लागू करने की प्रक्रिया रुक गई।
तनाव तब और बढ़ गया जब अगस्त में अमेरिका ने ईरान पर फिर से सैन्य हमले शुरू कर दिए। इसके जवाब में तेहरान ने उन कई अरब देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाया जो वाशिंगटन के साथ जुड़े हुए थे। अब ट्रंप का यह दावा कि ईरान समझौते के लिए बेताब है, इस पूरे घटनाक्रम में एक नया मोड़ लेकर आया है और ट्रंप ने ईरान को एक नाकाम देश बताते हुए कहा कि वे जल्द से जल्द डील करना चाहते हैं।
रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का दावा
ईरान के अलावा, डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन युद्ध को लेकर भी एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि यूक्रेन और रूस एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमला करना बंद करने के लिए सहमत हो गए हैं और ट्रंप ने इस घटनाक्रम को वैश्विक स्तर पर डीजल की बढ़ती कीमतों और ईंधन आपूर्ति की चिंताओं से जोड़ा है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर अपनी पोस्ट में बताया कि उन्होंने एक दिन पहले ही यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से अपील की थी कि वे रूसी ऊर्जा केंद्रों पर हमले करना बंद कर दें।
ट्रंप के अनुसार, यूक्रेन अब रूसी ऊर्जा ठिकानों पर हमला न करने के लिए राजी हो गया है और रूस ने भी इसके बदले में ऐसा ही करने की सहमति जताई है। ट्रंप ने तर्क दिया कि दुनिया भर में डीजल की कीमतों में जो भारी बढ़ोतरी देखी गई है, उसका मुख्य कारण रूस और यूक्रेन के बीच जारी यह संघर्ष ही है। उन्होंने पहले भी जेलेंस्की से कहा था कि रूस के डीजल उत्पादन केंद्रों पर हमले करने से दुनिया भर में ईंधन की कमी हो रही है, जिसका नुकसान पूरी दुनिया को उठाना पड़ रहा है।
डीजल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति पर प्रभाव
आयरलैंड में अपने डूनबेग गोल्फ क्लब में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की और जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपनी हालिया बातचीत के बाद जेलेंस्की से संपर्क किया था, तो ट्रंप ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले इसके प्रभावों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि रूसी डीजल उत्पादन क्षमता को नष्ट करना पूरी दुनिया के लिए हानिकारक साबित हो रहा है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। पिछले शुक्रवार को डीजल की कीमतें 6 डॉलर प्रति गैलन से ज्यादा के रिकॉर्ड औसत पर पहुंच गईं। वैश्विक स्तर पर ईंधन की इस कमी के पीछे रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर यूक्रेन के हमले और होर्मुज स्ट्रेट में पैदा हुई रुकावटों को मुख्य कारण माना जा रहा है। ट्रंप का दावा है कि यदि ऊर्जा ठिकानों पर हमले रुकते हैं, तो इससे वैश्विक ईंधन बाजार को बड़ी राहत मिल सकती है।